इस्लाम को फलता फूलता देंखे यह इन से बर्दाश्त नहीं होता
मगर याद रखें अल्लाह का यह चराग़ नहीं बुझेगा, इसे बुझाने वाले बुझ जाएंगे,
इस्लाम के चराग़ को बुझाना चाहते हैं
नहीं बुझेगा, इस्लाम का चराग़ मुकम्मल हो कर रहेगा
हजरत फातिमा रज़ी. जब घर से बाहर निकलती तो उनका बुर्का इतना लंबा होता था कि पैर के निशा भी नजर नहीं आते थे।
इसपर लोगों ने हजरत अली से शिकायत की तो फातिमा रज़ी का जवाब :- मैं अपने बुर्के को दिन में 70 मर्तबा धो लूंगी लेकिन किसी गैर मरहम को मेरे पैर के निशान नहीं देखने दूंगी।