कभी कभी ख़ामोशी
कितना सुकून देती है ना..
न कोई शोर मचाती
न किसी से कोई बहस करती
न ख़ुद को सही साबित करने की कोशिश
न दूसरे को ग़लत बताने की ज़रूरत महसूस होती
बस जो भी है जैसा भी है
…सब ठीक है
مقدّر میں لکھا کر لئے ہیں ہم دربدر پھیرنا
پرندے کوئی موسم ہو پریشانی میں رہتے ہیں
~منوّر رانا
मुकद्दर में लिखा कर लाए हैं हम दर–ब–दर फिरना
परिंदे कोई मौसम हो परेशानी में रहते हैं!
~मुनव्वर राना
तुम्हें छूकर मैंने जाना
किसी रेलगाड़ी के गुजरने पर
धरती कांपती क्यों है।
तुम्हें चूमकर मैंने जाना
छूइमूई के पौधे का रहस्य।
तुम्हारे आलिंगन से मैंने जाना
चन्द्रमा पर प्रथम मनुष्य होने का एहसास।
तुमसे प्रेम करके मैंने जाना
मछुआरे और मछली के बीच का रिश्ता।
~ गीतांश विवेक