>सर का नाम -राहुल गांधी है
>सर आजकल तथाकथित छात्रों के साथ सम्मेलन में व्यस्त है
>सर 2-4 इनफ्लूसर प्रोटेस्टर के कंधे में बंदूक रखकर चला रहा है
>सर प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं
>सर देहरादून जा रहे हैं
>सर प्रयागराज जा रहे हैं
>सर मुंबई जा रहे हैं
>लेकिन सर झारखंड के बच्चों के नाम पर बीमार हो जा रहे हैं
>सर इसी को दोगलापन कहते है
I remember one of my first tweets against Reservations. It went viral & got around 500+ comments.
Around 90% were people tagging Delhi Police, demanding my arrest under SC/ST Act.
Today, the same issue is being discussed in the mainstream media. We've come a long way.
क्या एक ऐसी पार्टी और एक ऐसा प्रधानमंत्री देश चलाने लायक हैं जो CIA एजेंट/चीनी दLAल/सोरोस फंडिड लोगों के आगे झुक गए?
कहीं यह पार्टी भी CIA/सोरोस फंडिड तो नहीं जो हमारे देश को तोड़ना चाहती है?
'देशहित में लिया निर्णय'? देशहित के निर्णय पुलिस का मनोब��� तोड़ कर नहीं लिया जाता। देशहित के निर्णय में लाल क़िले पर खालिस्तानी झंडा नहीं होता। देशहित में सत्ता का ईगो आड़े नहीं आता। सत्ताधीश के ईगो और राजनीति से प्रेरित अनुपस्थित कार्रवाइयों ने इस राष्ट्र की बहुत क्षति कर दी है।
दो तरह के IT सेलिए होते हैं:
1>जो हर अच्छे-बुरे काम को डिफेंड करते हैं। ये सीधे-सीधे पार्टी पे-रोल पर होते हैं। ठेका/पैसा मिलता है और चाहे कुछ भी हो, मालिक को डिफें��� करना ही है, विरोधियों को गाली देनी है, सबको देशद्रोही-एंटी नेशनल-इसका एजेंट-उसका एजेंट टैग करना, फेक न्यूज़ फैलाना, अपने चू^यापे और पार्टी दLAली के चक्कर में हिन्दुओं को बदनाम कराते हैं।
साथ ही पार्टी के उल्टे काम भी कर्मठता से डिफेंड करने पड़ते हैं।
इन बेचारों के साथ समस्या यह होती है कि ऐसी सिचुएशंस में ��े लोग जनता से सीधे गालियाँ खाते हैं।
2>जिन्हें ठेका/पैसा नहीं मिल पाता पर ये लोग कोशिश जारी रखनी चाहते हैं कि कभी न कभी नज़रों में आएँ। इसके लिए ये लोग पहला वाला क्राइटीरिया तो पूरा करते हैं जैसे पार्टी को डिफेंड करना, विरोधियों को गाली देना, देशद्रोही बताना, फेक न्यूज़ फैलाना।
पर ये लोग पार्टी के कुछ उल्टे कामों के समय कंस्ट्रक्टिव क्रिटिसिज़्म के नाम पर मजे लेकर न्यूट्रैलिटी का लबादा ओढ�� लेते हैं।
इसका पहला कारण यह कि अभी पैसे नहीं मिल रहे और दूसरा कि इनको यह फायदा रहता है कि ये लोग ऐसी सिचुएशंस में जनता के साथ बहती गंगा में हाथ धोते हुए 'IT सेल का कट गया', 'IT सेल चू^या' लिखकर मजे ले लेते हैं।
दोनों में धागे भर का अंतर है पर अंतर समझना सीखिए।
एक चीज़ एकदम कॉमन है, डाइरेक्टली/इनडाइरेक्टली दोनों कहना यही चाहते हैं:
इस देश में आज एक बात साबित हो गई है। जो ईमानदारी से काम करेगा टैक्स भरेगा और कुछ ग़लत होने पर आवाज उठाएगा उसको FIR मिलेगी।
जो अराजकता फेलाएगा, दंगा करेगा और सरकार को गाली देगा वो सिस्टम से अपनी बात मनवा लेगा।
सीएम मोदी 2014 मे ही चले गए थे ये तो कोई और है।