@DelhiPolice@DCP_IFSO Here is @aajtak giving platform to Goons like Swatantra Bharadwaj.
Hello @anjanaomkashyap, You've invited him several times. When are you planning to invite him again to justify Sexualizing Women?
Have you observed this disturbing pattern? The more you abuse Muslims, target Dalits, spew hatred make derogatory remarks about a community and sexualize women, the more access you seem to get to the top leaders of a particular ideology. Unfortunately, Such conduct is rewarded with recognition instead of condemnation.
गुंडे - माफिया,अपराधी,अराजकतत्वों को गुंडागर्दी व अपराध करने की खुली छूट। भा.ज.पा. सरकार का भरपूर संरक्षण। जंतर-मंतर पर Gen-Z द्वारा किये जा रहे धरने में हिंसक वारदात करने वाले की सुनिए जुबानी।
निशु, घबराने की ज़रूरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूँ।
साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों के हक़ की आवाज़ उठाती हो।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस एक तरफ़ छात्रों के साथ अमानवीय बर्बरता करती है। दूसरी तरफ़ एक दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला अपराधी खुलेआम घूम रहा है।
@narendramodi ���ी, @AmitShah जी - ऐसे अपराधी को आपका और आपकी पार्टी के लोगों का संरक्षण क्यों है? अब भी कार्रवाई होगी या किसी को बचाते रहेंगे?
निशु, तुम्हारी लड़ाई अकेली नहीं है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
जय भीम। जय संविधान।
जिस देश में शिक्षार्थी भी सड़क पर आंदोलन करने पर मजबूर हों साथ ही शिक्षित और शिक्षक भी, उस देश की सरकार न केवल देश के वर्तमान को बल्कि भविष्य को भी बर्बाद करने की दोषी होती है।
नौकरी भाजपा के एजेंडे ��ें है ही नहीं!
शिक्षित कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
भाजपा जाए तो रोज़गार आए!
#SSC
#sscprotest
#SSCProtest2025
#Unemployment
#JusticeForAspirants
#युवा_विरोधी_भाजपा
लोकतंत्र में सवाल सत्ता से किया जाता है. विपक्ष तो है ही विपक्ष में. मगर न्यू नॉर्मल ये है कि सरकार से सवाल करने के पहले विपक्ष से ही सवाल करो. टीवी मीडिया ने इस प्रवृत्ति को न्यू नॉर्मल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. असर दिख रहा है. ये #sscprotest में शामिल एक ��िक्षक हैं. सरकार से लड़ने के लिए सड़क पर उतरे. हम जैसे लाखों लोग साथ खड़े हैं.
मगर सरकार नाराज़ न हो जाए, इसलिए विपक्ष को और बुरा बोल दो. बैलेंस करने की इसी प्रवृत्ति के चलते देश को नुक़सान हो रहा. शिक्षक की भी राजनीतिक समझ साफ़ नहीं, तो ये कैसे युवा तैयार करते होंगे? समझ साफ़ करने की ज़रूरत है. आंदोलन को भी लाभ मिलेगा और लोकतंत्र को भी. विपक्ष का क्या है, वह तो सबसे लड़ ही रहा है.
#sscprotest #SSC_System_Sudharo #SSC_System_Sudharo #SSCVendorFailure #SSC_VENDOR_FAILURE #sscreform #sscReforms2025
मनुस्मृति चैप्टर 9, श्लोक 18 में क्या लिखा है ?
बताओ @grok
साथ ही श्लोक 20 me क्या लिखा है उसे भी बताओ ।
क्या लगता है ग्रॉक जवाब देगा या पंचगव्य लेकर टल्ली हो कोमा में चला जाएगा ?
Andhbhakts in 2024:
Rahul Gandhi is a Chinese agent, China wants to destabilize India 🤡
Andhbhakts in 2025:
Rahul Gandhi is an American Agent, America wants to destabilize India 🤡
BRS cheated Christians and Muslims and other religious minorities in the broad daylight. In many villages there are no graveyards for minorities. Now the shameless BRS soulless leaders are cheating Christian on All Souls Day! Is it not model code violation? Pl book KCR and Talasani Yadav for this violation.
@ECISVEEP
मेरे बहुजन समाज के लोगों जो लाइने आचार्य प्रमोद जी ने, लिखी है इसके जरिए हमारे पूर्वजों का बहुत शोषण किया गया आईए जानते हैं इसके ���ीछे का इतिहास
मुस्लिम काल में अछूत कहीं जाने ��ाली जातियों ने छुआछूत भेदभाव से परेशान होकर, एक बड़ी संख्या में इस्लाम को अपनाया था.
और यह सिलसिला 16 सदी तक चला था।
उस समय धर्म के ठेकेदारों द्वारा हिंदू धर्म को बचाने के लिए अछूत जातियां में भक्ति आंदोलन चलाया गया था.
रामानुज और उनके शिष्य रामानंद ने
एक नारा दिया था वह नारा था - "जात-पात पूछे ना कोई हरि को भजे सो हरि को होई"
यह नारा देते हुए दूर से ही राम मंत्र देते हुए अछूत जातियों को वैष्ण��� बनाया था, दूर से इसलिए क्योंकि राम मंत्र देते समय अगर छू लिया तो खुद अछूत हो जाते।
जिन अछूत लोगों को राम मंत्र देकर वैष्णव बनाया था,इन अछूत वैष्णोवों को मंदिर के गर्भ गृह में जाने का अधिकार नहीं था.
वैष्णवन की वार्ता से यहां तक पता चलता है- इन अछूत वैष्णवों को ब्राह्मणों की जूठन खाने को दी जाती थी, और जिस दिन उनकी जूठन नहीं बचती थी उस दिन उनको भूखा रहना पड़ता था.
इसके लिए उनको यह कहकर संतुष्ट किया जाता था, ब्राह्मण का अवशेष भगवान जी का अवशेष है, इसको ग्रहण करने से आपको मुक्ति मिलेगी
@AcharyaPramodk जी जो नारा दे रहे हैं इस नारे ने उस समय भी हमारे पूर्वजों का शोषण किया था और आज भी हम लोगों का शोषण करेगा
आपने पढ़ लिया हो तो रिट्वीट कर और लोगो को भी पढ़ाये
कौन जाने किस घड़ी, वक्त का बदले मिज़ाज! आरोप किसी पर भी लग सकता है। जेल कोई भी जा सकता है। जेल जाने पर पार्टी का कोई भी नेता मुख्यमंत्री बन सकता है।
लेकिन क्रांति रुकनी नहीं चाहिए। बहुत ही क्रांतिकारी।
⬇️
परियार साहब की रामायण पथीरागल का हिंदी में ��नुवाद सच्ची रामायण था.
जिसको प्रकाशित अर्जक संघ से जुड़े कार्यकर्ता ललई सिंह यादव जी ने किया था
इस पुस्तक से राम को पूजने वाले उत्तर प्रदेश में हड़कंभ मच गया था, उत्तर प्रदेश सरकार ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप ��ें इस सच्ची रामायण को प्रतिबंधित कर दिया था,
और हिंदी अनुवाद की प्रतियां जब्त कर ली गई थी
इसके खिलाफ ललई सिंह यादव जी ने एक लंबी न्यायिक लड़ाई लड़ी.
सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर 1976 को अपने फैसले में किताब पर प्रतिबंध को गलत बताया और जब्त की गई प्रतियां ललई सिंह यादव को लौटाने का निर्देश दिया,
किंतु कोर्ट के आदेश के बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार ने सच्ची रामायण से प्रतिबंध नहीं हटाया.
1995 में जब बहु��न समाज पार्टी की सरकार सत्ता में आई तब इस किताब से प्रतिबंध हट सका
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रतिबंध समाप्त करते हुये अपने फैसले में स्पष्ट कहा हमें यह मानना संभव नहीं लग रहा है, कि इसमें लिखी बातें आर्य लोगों के धर्म को अथवा धार्मिक विश्वासों को चोट पहुंचाएगी।
वैसे आज भक्तगण छोटी-छोटी बातों पर धार्मिक भावनाएं आहत होने का इल्जाम लगाते हैं, वह जाकर सच्ची रामायण को जरूर पढ़ें उसमें देखें
रामायण की क��से पोल खोली गई है, राम और सीता के बारे में क्या-क्या लिखा गया है
और उसको माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी ठीक बताया है
सभी ओबीसी एससी एसटी वर्ग के लोगों को सच्ची रामायण पुस्तक जरूर पढ़नी चाहिए .
वह आपको अमेजॉन की साइट पर भी मिल जाएगी , हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीसा या कोई अन्य चालीसा पढ़ने से अच्छा है कि सच्ची रामायण पुस्तक पढ़ें और असली सच्चाई से परिचित हो
आपने यह पोस्ट पढ़ ली रिट्वीट कर और लोगों ��ो भी पढ़ाये
महुआ मोइत्रा को लोकसभा से बर्खास्त किया जाए।
ऑनलाइन युग के संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी सांसद ने अपना संसद का लॉग-इन पासवर्ड ही देश के एक बड़े उद्योगपति को सौंप दिया।
महुआ मोइत्रा ने जब ये बात खुद ऑन रिकॉर्ड स्वीकार कर ली तो उनकी सदस्यता जानी चाहिए। एथिक्स ���मेटी के सामने फ़ैसला लेने में कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए।
मैंने जब ये महुआ मोइत्रा से पूछा था कि वे अपने संसदीय क्षेत्र, अपने राज्य या जनता के सवाल क्यों नहीं पूछतीं तो ग़ुस्सा होकर उन्होंने मुझे ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया।
अब मैं समझ पाया हूँ कि वे ज़्यादातर कॉरपोरेट तथा बिज़नेस हितों के सवाल क्यों पूछती थीं। दरअसल उनके सवाल ही बिज़नेसमैन के आफिस में टाइप हो रहे थे।
हर सांसद को सरकार के ��र्चे से ₹30,000 वेतन वाला सेक्रेटेरियल असिस्टेंट मिलता है। दफ़्तर चलाने के लिए हर महीने कुल ₹45,000 मिलते हैं। लेकिन महुआ मोइत्रा कह रही हैं कि उद्योगपति हीरानंदानी के दफ़्तर में वे अपने संसदीय सवाल टाइप करवाती थीं। क्यों?
इस बात का कोई मतलब है?