भारतीय जनता पार्टी की सरकार कितनी बड़ी दलित बहुजन विरोधी है आप अंदाजा लगाइए 👇
बहुजन समाज के अधिकारों के खिलाफ होने वाले आंदोलन की सरकार द्वारा जंतर-मंतर पर परमिशन दी जाती है और खुलकर आरक्षण के खिलाफ हवाओं को बल दिया जाता है
परंतु जब बहुजन ��माज अपने हक-अधिकारों को बचाने के लिए एक दिवसीय संवैधानिक आंदोलन करना चाहता है तो उसकी परमिशन को रद्द कर दिया जाता है। न सिर्फ जंतर-मंतर बल्कि पूरी दिल्ली में कहीं परमिशन नहीं मिलती
यही भाजपा सरकार की हकीकत है, ये लोग पूरी बहुजनों से नफरत करते हैं
2027 में यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक है, पूरे उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज इन जातिवादियों का बहिष्कार करेगा और अपनी वोटबैंक की शक्ति इन्हें दिखाएगा।���
चन्द्रशेखर आजाद आज के समय में देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय नेताओं में एक हैं🔥
ये तस्वीरें आज राजस्थान के दौसा की हैं जहां नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे
समर्थकों का इतना भारी जनसैलाब उमड़ा कि दूर-दूर तक सिर्फ लोग ही लोग दिठाई दिये।।
काफी देर से यह वीडियो ढूंढ रहा था, अब ज���कर मिली👇🏻
जब मैं @BhimArmyChief के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने की बात करता हूं तो कुछ विरोधी लोग हंसते हैं। ये तस्वीरें ध्यान से देखो, आज #बस्ती के रूधौली में हुई चन्द्रशेखर आजाद की रैली की हैं
वो यूपी में जहां-जहां रैलियां कर रहे हैं वहां भीड़ रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है। कोई नेता बिना सरकारी तंत्र के इतनी भीड़ नहीं जुटा सकता। इसी से चन्द्रशेखर आजाद के चेहरे की ताकत का अंदाजा लगा लो
एक फार्म हाउस में मेरी हत्या करने का षड्यंत्र रचा गया है। मैं यह बात बहुत जिम्मेदारी से कह रहा हूं। मेरे पास जो सूचनाएं और स्रोत हैं, वे गलत नहीं हैं। मैं सरकार से मांग करता हू�� कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए और हत्या की साजिश से लेकर बाराबंकी हिंसा में शामिल लोगों की भूमिका सामने लाई जाए।
मैं अपने विरोधियों से भी कहना चाहता हूं—मौत तो एक दिन आनी है, मौत से डरकर जिया नहीं जा सकता। अगर मेरी मौत आपके हाथों लिखी होगी तो वह भी हो जाएगी, लेकिन अगर आप अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हुए और मेरे लोगों ने मुझे ताकत, हिम्मत और मेरा साथ दे दिया, तो याद रखिए, आप जैसे गुंडों को उत्तर प्रदेश से पलायन करना पड़ेगा।
आज सवाल सिर्फ मेरी सुरक्षा का नहीं है। जब सुरक्ष��� प्राप्त एक चुने हुए जनप्रतिनिधि और सांसद के साथ दिनदहाड़े पत्थरबाजी की जाए, पेट्रोल-डीजल जैसी ज्वलनशील चीजों से भरी बोतलों के जरिए गाड़ी में आग लगाने का प्रयास किया जाए और आरोपी इतने बेखौफ हों, तो सोचिए इस प्रदेश में दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों की सुरक्षा और न्याय की स्थिति क्या होगी?
मैं अपने साथियों से भी कहना चाहता हूं—डरने क��� जरूरत नहीं है। संघर्ष जारी रहेगा। मौत से डरकर जिया नहीं जा सकता।
जय भीम!
बड़ी खबर 🚨
कानपुर में आरक्षण व UGC के समर्थन में भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी का विशाल पैदल मार्च
बहुत बड़ी संख्या में SC-ST-OBC समाज के लोग सड़कों पर उतरे 👇🏻
@AzadSamajParty
संघर्ष, त्याग और समर्पण का पर्याय बन चुके हैं नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद ❤️
आज पूरे दिन बाराब���की में संघर्ष किया, गाड़ी पर हमला हुआ, रास्तों में रोका गया, कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, प्रशासन से नोंक-झोंक हुई
फिर भी बिना थके बिना रूके चन्द्रशेखर आजाद बाराबंकी से सीधे लखनऊ के ईको गार्डन में चल रहे पंचायत सहायकों के आंदोलन में पहुंचे और उन्हें हिम्मत दी
पूरे दिन में इतना समय भी नहीं मिला कि वो पेट भरकर खाना भी खा लें.... चन्द्रशेखर आजाद का यह संघर्ष मिसाल के तौर पर हमेशा याद किया जाएगा जि��� प्रकार आज हम मान्यवर कांशीराम साहब व बाबासाहेब अम्बेडकर के संघर्ष को याद करते हैं!!
आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना सांसद मा. चंद्रशेखर आज़ाद जी के काफिले को शाहब��ुर टोल गेट पर रोककर उन पर जानलेवा हमला किया जाना उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है।
मा. चंद्रशेखर आज़ाद जी गोंडा में एक पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे। इसी दौ��ान उनके काफिले को शाहबपुर टोल गेट पर रोका गया और उन पर हमला किया गया। इस हमले में उनकी सुरक्षा में मौजूद भीम आर्मी एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं के घायल होने तथा उनके वाहनों में तोड़फोड़ किए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह कोई सामान्य विवाद नहीं है। यह एक निर्वाचित सांसद, राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा करोड़ों वंचित, शोषित एवं बहुजन समाज की आवाज़ पर गंभीर हमला है।
मा. चंद्रशेखर आज़ाद जी केवल नगीना के सांसद या आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं हैं, बल्कि वे देश के करोड़ों वंचित, शोषित, पीड़ित एवं बहुजन समाज की आवाज़ को संसद और सड़क तक मजबूती से उठाते हैं। एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को रोकना और उनकी सुरक्षा को खतरे में डालना लोकतांत्रिक अधिकारों एवं संवैधानिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है।
हम उत्तर प्रदेश सरकार एवं पुलिस प्रशासन से मांग करते हैं कि पूरे घटनाक्रम की तत्काल निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
टोल गेट पर मा. चंद्रशेखर आज़ाद जी पर हमला करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान CCTV फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तत्काल की जाए तथा सभी आरोपियों को बिना किसी राजनीतिक दबाव के गिरफ्तार किया जाए। साथ ही, सभी आरोपियों के विरुद्ध घटना की गंभीरता के अनुरूप कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
हमले में घायल हुए सभी कार्यकर्ताओं का तत्काल समुचित उपचार कराया जाए। जिन कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों के वाहनों में तोड़फोड़ अथवा अन्य प्रकार की क्षति हुई है, उसका निष्पक्ष आकलन कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा उचित क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
मा. चंद्रशेखर आज़ाद जी पर पूर्व में भी गंभीर हमला हो चुका है। इसके बावजूद यदि आज उनके काफिले को रोककर उन पर फिर हमला किया जाता है, तो यह उनकी सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता तथा शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल है।
हम स्पष्ट मांग करते हैं कि मा. चंद्रशेखर आज़ाद जी की सुरक्षा की तत्काल उच्चस्तरीय समीक्षा की जाए तथा उन्ह��ं Z+ श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराने पर तत्काल निर्णय लिया जाए।
किसी निर्वाचित सांसद की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसके कार्यकर्ताओं की नहीं, बल्कि शासन एवं प्रशासन की होती है। यह अत्यंत चिंताजनक है कि आज भी भीम आर्मी एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं को आगे आकर अपने नेता की सुरक्षा करनी प��़ी।
* मा. चंद्रशेखर आज़ाद जी के काफिले को शाहबपुर टोल गेट पर क्यों रोका गया?
* उन्हें रोके जाने के बाद उन पर हमला कैसे हुआ?
* हमलावर कौन थे और उनकी तत्काल गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
* उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिस व्यवस्था उस समय कहाँ थी?
* घायल कार्यकर्ताओं और क्षतिग्रस्त वाहनों के संबंध में क्या कार्रवाई की गई?
* घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध अब तक कौन-कौन सी कानूनी कार्रवाई की गई?
इन सभ��� सवालों का जवाब प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन को देना होगा।
हम स्पष्ट शब्दों में कहना चाहते हैं कि मा. चंद्रशेखर आज़ाद जी की जान और सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यदि इस मामले में त्वरित गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच एवं कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) एवं भीम आर्मी इस अन्याय के विरुद्ध चुप नहीं बैठेंगे।
आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि पूरे देश में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
भविष्य में मा. चंद्रशेखर आज़ाद जी की सुरक्षा में कोई चूक होती है अथवा उनके साथ किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना घटती है, तो उसकी पूर्ण जवाबदेही उत्तर प्रदेश शासन एवं प��लिस प्रशासन की होगी।
डराने, धमकाने, रोकने और बहुजन समाज की आवाज़ को दबाने की राजनीति अब बंद होनी चाहिए।
संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की लड़ाई से आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) एवं भीम आर्मी न कभी पीछे हटी है और न पीछे हटेगी। किसी भी दबाव, धमकी अथवा सत्ता की ताकत के सामने बहुजन समाज की आवाज़ को झुकने नहीं दिया जाएगा।
@myogiadityanath
@Uppolice
@dgpup
Tag and repost @ghaziabadpolice & @myogiadityanath
📍 गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
इंदिरापुरम डी-मॉल में कैफ़े चलाने वाली महिला हरलीन कौर ने हिंदू रक्षा दल से जुड़े कुछ लोगों सौरभ पंडित, दक्ष चौधरी, अक्कु पंडित और अमित पहलवान पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
महिला का आरोप है कि फ़्री का खाना, गाली-गलौज, मारपीट और तोड़फोड़ के बाद उनसे ₹50,000 महीना मांगा गया। उन्होंने इसे “गुंडा टैक्स” बताते हुए कहा कि उनके पास पेमेंट के स्क्रीनशॉट, वीडियो फ़ुटेज और कॉल रिकॉर्डिंग समेत सारे साक्ष्य हैं।
हरलीन कौर ने योगी आदित्यनाथ से कार्रवाई की गुहार लगाते हुए कहा कि वह इतनी परेशान हैं कि आत्महत्या करने के लिए ��जबूर हो रही हैं।
पिछले कुछ दिन मेरे लिए बेहद मुश्किल भरे रहे। 6 सितंबर को हुए सड़क हादसे के बाद अस्पताल, जाँच और इलाज के बीच समय बीता। हादसा गंभीर हो सकता था, लेकिन प्रकृति ने मुझे बचा लिया। फिलहाल मैं खतरे से बाहर हूँ, अधिकांश जाँच रिपोर्ट सामान्य हैं और अब घर पर हूँ।
सीतापुर स�� लखनऊ के एरा अस्पताल और एम्स दिल्ली तक जिन चिकित्सकों ने पूरी गंभीरता और आत्मीयता से मेरा इलाज किया, उनका हृदय से आभार। विशेष रूप से एम्स के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. वरुण मल्होत्रा जी, छोटे भाई डॉ. सुधीर कुमार और मेरे सभी डॉक्टर मित्रों का सहयोग हमेशा याद रहेगा।
इस कठिन समय में माननीय सांसद एडवोकेट चंद्रशेखर आज��द जी, बड़े भाई विनय रतन सिंह जी, सीतापुर जिला संयोजक भाई राकेश राजवंशी जी सहित संगठन के सभी साथियों, मित्रों और शुभचिंतकों ने जिस तरह मेरा हौसला बढ़ाया और चिंता की, उसके लिए मैं हृदय से कृतज्ञ हूँ।
बहुत से साथी घर पर हालचाल लेने पहुंचे और बड़ी संख्या में लोगों ने फोन किया। सिर में चोट के कारण डॉक्टरों की सलाह पर मैं फोन नहीं उठा पा रहा था, इसलिए जिन साथियों से बात नहीं हो सकी, उनसे क्षमा चाहता ह��ँ।
सच में, ऐसे समय में इंसान को अपनी ताकत से ज्यादा अपनों का साथ और उनकी दुआएं संभालती हैं। आपका स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद मेरे लिए बहुत बड़ी ताकत है।
आप सभी का हृदय से धन्यवाद और आभार।
आपका स्नेह और विश्वास सदैव मेरे साथ बना रहे।
रूस में कानपुर के इंजीनियर चंदन गुप्ता को हिरासत में लेकर रूसी सेना में शामिल होने का दबाव बनाए जाने पर उनकी पत्नी की मदद की गुहार इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को दर्शाती है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि विदेश मंत्रालय के अनुसार 227 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती किया गया, जिनमें 51 की मृत्यु हो चुकी है। वहीं, आजमगढ़-मऊ के 13 युवक सुरक्षा गार्ड की नौकरी के भरोसे रूस गए थे, जिनमें रिपोर्ट के मुताबिक 10 की मृत्यु हो चुकी है। कुछ परिवारों को शव तक नहीं मिले, बल्कि टोपी, झंडा और मृत्यु प्रमाणपत्र भेजे गए।
@mygovindia रूस के सामने मजबूती से यह मुद्दा उठाए और सभी भारतीयों की सुरक्षित रिहाई व सकुशल वापसी सु��िश्चित करे।
भारतीय युवा रोजगार के लिए विदेश जाएं, किसी दूसरे देश की जंग में मरने के लिए नहीं।
24सितंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर आएगा बहुजन जनसैलाब आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट चन्द्रशेखर आजाद जी के नेतृत्व में आरक्षण के समर्थन में
अब दिल्ली चलेंगे, आरक्षण पर जब हमला हुआ था, तब हमने भोपाल नीला किया था अब दिल्ली नीली करेंगे, @BhimArmyChief बड़े ���ाई चन्द्रशेखर आज़ाद जी (नगीना सांसद) ने 24 सितम्बर को दिल्ली में आरक्षण के समर्थन में और सम्पूर्ण अधिकार सहित पूना पैक्ट धिक्कार दिवस के रूप बड़ा आंदोलन होने जा रहा है।
#sunilastay 📍 उज्जैन
दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी से सवाल पूछने की कोशिश करने पर पत्रकार शाहीन और नफीसा को पुलिस द्वारा कथित तौर पर मारपीट कर थाने ले जाने, गाली-गलौज करने, धमकाने और दुर्व्यवहार किए जाने के आरोप बेहद गंभीर और चिंताज��क हैं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि दोनों पत्रकारों का कहना है कि उनके मुस्लिम होने की जानकारी मिलने के बाद उनके साथ कथित दुर्व्यवहार और बढ़ गया। यदि यह आरोप सही है, तो यह न केवल प��रेस की स्वतंत्रता बल्कि धर्म के आधार पर भेदभाव को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
सत्ता से सवाल पूछना किसी भी लोकतंत्र में अपराध नहीं हो सकता। पत्रकार की पहचान, धर्म या समुदाय देखकर उसके साथ भेदभाव करना संविधान की भावना और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर पहले से ही गंभीर चिंताएं जताई जाती रही हैं। ऐसे में पत्रकारों के साथ इस तरह के कथित व्���वहार की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
सवाल पूछना अपराध नहीं है।
प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियाद है।
यह बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है।
23 जून को जंतर-मंतर की घटना पर पुलिस कहती है कि संजय कुमार की चोटें सामान्य थीं और खोपड़ी में दरार की बात निराधार है। लेकिन आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में वह खुद “7 टांके”, “मरने की स्थिति” और “307 बनता था” ��ैसी बातें कह रहा हैं।
वह यह भी दावा कर रहा हैं कि संजय कुमार की बेटी निशु, थाने के बाहर खड़े होकर कह रही थी कि “अगर मेरे बाप को इंसाफ नहीं मिला तो हम जहर खाकर मर जाएंगे।” साथ ही उनका दावा है कि वे जेल तक नहीं गए और “कपिल मिश्रा अपने बड़े भाई हैं”, “चिराग पासवान अपने बड़े भाई हैं” तथा “सबका सपोर्ट है।"
तो सवाल है कि अगर घायल की हालत इतनी गंभीर थी और 7 टांके लगे थे, तो पुलिस की MLC में चोटें सामान्य कैस�� बताई गईं? अगर धारा 307 का मामला बनता था, तो आरोपी जेल क्यों नहीं गया?
“कपिल मिश्रा के फोन के बाद छोड़ने का दावा सच है या झूठ? क्या पुलिस इसकी निष्पक्ष जांच करेगी? जब राजनीतिक संरक्षण का इतना स्पष्ट दावा सामने आ रहा है, तो पुलिस यह क्यों नहीं स्पष्ट कर रही कि इस मामले में किसी अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप की कोई भूमिका थी या नहीं?”
आखिर पुलिस के रिकॉर्ड और आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में इतना ब��़ा अंतर क्यों ��ै? हमें इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अपने पीड़ित परिवार को न्याय दिला कर रहेंगे। जय भीम, जय भारत।।
आज जिला जौनपुर की मछलीशहर विधान सभा में आयोजित विशाल जनसभा में अपनों के बीच।
जनसभा को सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का हृदय से आभार। अपने अपार प्यार, समर्थन और विश्वास से जनसभा को ऐतिहासिक बनाने वाली जौनपुर की महान जनता को दिल से सलाम और अभिनंदन।
आपकी यह एकजुटता आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मिशन-2027 को नई ऊर्जा और ताकत देगी।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल!
#ASP_K_Mission2027
जिला बदायूं के दातागंज थाना क्षेत्र में दलित युवक राजेश कोरी की पुलिस कस्टडी में मौत बेहद दुखद,गंभीर और चिन्ताजनक है।
परिजनों के अनुसार, पुलिस की पिटाई के बाद राजेश की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। अब हवालात क��� अंदर का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें राजेश पानी पीने की हालत में तक नजर नहीं आ रहा है और पुलिसकर्मी के हाथ छोड़ते ही वह जमीन पर गिर जाता है। यह वीडियो पुलिस की भूमिका और पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस कह रही है कि पहले राजेश की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि अगर राजेश की हालत इतनी खराब थी तो उसे समय रहते इलाज क्यों नह���ं दिया गया?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस के बचाव में परिजनों से तहरीर लेकर दूसरे पक्ष के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया गया। अगर हत्या हुई थी, तो राजेश पुलिस की हवालात में क्यों था? और अगर वह पुलिस हिरासत में सुरक्षित था, तो हवालात के अंदर उसकी हालत इतनी गंभीर कैसे हुई?
दातागंज थाने के CCTV फुटेज को तत्काल सुरक्षित कर सार्वजनिक किया जाए। पुलिस हिरासत में हुई इस मौत की जांच उसी पुलिस तंत्र से नहीं, बल्कि स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय एजेंसी से कराई जाए।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी जवाब दें कि दलित युवक राजेश कोरी की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है?
@UPGovt से हमारी मांग है कि पुलिस हिरासत में हुई दलित युवक राजेश कोरी की मौत की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। दोषियों को बचाने के बजाय उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा मृतक के परिवार को न्याय, सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए।
हमारी संवेदनाएँ भाई राजेश कोरी के शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद ने आरक्षण के मुद्दे को लेकर भाजपा को घेरते हुए बहुत बड़ा ऐलान किया🚨👇🏻
उन्होंने भाजपा पर सीधे आरक्षण का प्रहार करने व आरक्षण विरोधियों का साथ देने का आरोप लगा��ा है। उन्होंने कहा कि-"किसान आंदोलन में जो सरकार 13 महीने बाद सुनी, पेपर लीक आंदोलन पर एक महीना लग गया, लेकिन जातीय वर्चस्व बनाए रखने वाले लोग भाजपा-आरएसएस के छुपे प्रोपगंडे को लेकर जैसे ही इकट्ठा होते हैं तो सौहार्दपूर्ण वार्ता होने लगती है
चन्द्रशेखर आजाद ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि किसी कीमत पर मुट्ठीभर जातंकवादियों की आड़ में आरक्षण विरोधी षड्यंत्र कामयाब नही होने दिया जाएगा
"इसके लिए भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी 24 सितंबर को पूना पैक्ट दिवस के अवसर पर दिल्ली में एक विशाल महाआंदोलन करने जा रही है जिसका नाम "संपूर्ण भागीदारी जनआंदोलन" दिया गया है"
@BhimArmyChief @AzadSamajParty