समतामूलक समाज बनाने वाले अंबेडकर कांशीराम रविदास ज्योतिबा सावित्री की मूर्तियां फिजूलखर्ची थीं?
और जमीन समतल के नाम पर दंगे भड़काने वाले बाजपेई, उनके कम्युनल गुरुओं की मूर्तियां राष्ट्र प्रेरणा स्थल!
सच में राष्ट्र क�� तुम्हारी परिकल्पना में बहुजन नहीं हैं।
बिहार में पिछले तीन दिन से जो नीला जनसैलाब दिखा है उसका आधा पीला जनसैलाब दिखाने के लिए प्रशांत किशोर ने 3 साल मेहनत की है, करोड़ों रूपए खर्च किए हैं; देशभर की मीडिया में छाए रहे हैं।
बहुजन मिशन मीडिया मैनेजमेंट पर हावी हुआ है मगर ये बताइए मिशन मूवमेंट के साथ साथ मीडिया, सोशल मीडिया मैनेजमेंट होने लगेगा तो कुछ नुकसान हो जाएगा क्या?
मनु मीडिया जातिवादी मीडिया सब साज़िश रच रहे हैं चलो मान लिया, ये बताइए ऑफिशियल अकाउंट्स पर अच्छे विजुअल पोस्ट करने से डोनाल्ड ट्रंप ने बैन लगाया है क्या?
BSP समर्थक गरीब वंचित तबके से हैं, संवाद करने से उनमें जोश आ जाएगा, कॉन्फिडेंस बढ़ जाएगा तो किसी का कुछ चला जाएगा क्या?
@anubhavsinha पहले तो बॉलीवूड वालो को कॉपी करना बंद करना चाहिए।
आपकी भी एक फिल्म देखी नाम था 'थप्पड़', कई दिनों तक लगा कहानी कुछ जानी-पहचानी है, फिर दिमाग में आया ये स्कैन तो हुबहु एक टर्किस ड्रामा सीरीज में था। पता नहीं आपने कॉपी किया था या नहीं लेकिन बॉलीवूड की नींव तो कॉपी-पेस्ट पर ही है।
@SleepyPolitics1 विधानसभा चुनाव में बवानीखेड़ा सीट सै @SatbirRatera नै तन-मन-धन तीनों चींज लग्या दी। मैं खुद मास्टर जी की आईटी सैल का हैड था, दिन-रात एक कर राखी थी, 5 साल तै घर कौनी देख्या था। मिल्या के पार्टी खात्तर मेहनत करनीया अपनै घर और हैलिकोप्टर तै उतरनीया चुनाव लड़ों? मिल ग्या रिजल्ट?
ये बेहद विचलित कर द���ने वाली खबर है। @CollectorBhopal, @CMMadhyaPradesh, @mohdept, @DrMohanYadav51 ये एमपी में क्या हो रहा है? कृपया मामले का संज्ञान लें और पीड़ितों को सुरक्षा मुहैया कराएं। @NCSC_GoI को भी इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। क्या यही है बीजेपी का रामराज?
1. देश में बीएसपी बहुजन हित की एकमात्र अम्बेडकरवादी पार्टी है तथा पार्टी हित में लोगों पर कार्रवाई करने व पश्चताप करने पर उन्हें वापस लेने की परम्परा है। इसी क्रम में श्री आकाश आनन्द के उतार-चढ़ाव व उन्हें मुख्य नेशनल कोआर्डिनेटर बनाने से बहुत से लोगों में बेचैनी स्वाभाविक।
@Brijesh77956738@AadeshRawal जब विधानसभा बवानीखेड़ा से जब वहां का लोकल दावेदार मास्टर सतबीर रतेरा तन-मन-धन से मेहनत कर रहे थे। हर सर्वें रिपोर्ट में उनकी टिकट पर कांग्रेस की 100 प्रतिशत जीत निश्चित मानी जा रही थी। फिर वहां से दिल्ली दरबार का कारिंदा उतारने का क्या मतलब था। हार तो होनी ही थी।
@AadeshRawal जमीन पर मेहनत करने वाले जस्सी पेटवाड़ को का��ग्रेस से टिकट मिली परिणाम जीते, राजबीर फरटिया को टिकट मिली परिणाम जीते लेकिन बवानीखेड़ा से मास्टर सतबीर रतेरा की टिकट काटी परिणाम कांग्रेस की हार हुई।