@ConfirmTKT@IRCTCofficial
Bilkul fraud app h ticket cancel krne pr mene app k wallet mai refund liya tha app ne bina meri permission k wallet se account m refund kr diya ab na wallet m paisa h or na account m aaya h mera Paisa kha gya ye app
@PhonePe ye kaisa app k aapka transaction fail hone k baad bhi paise kat lete ho refund bhi nhi 5 din tk apne hi paise ka wait kro. Band kyo nhi kr dete aisa app jb kaam nhi kr pa rha h ache ss to...
@Paytm I sent money but it didn't reach my account and the money was deducted and you stopped the money,now I need the money and you people are saying it will take 4 days,I need it today so you should give it right now. It doesn't suit any company to fool its customers like this.
Hello @Uppolice
इस फीमेल गोरिल्ला पर अबतक कार्यवाही न हुई
क्या महाकुम्भ में आकर
ये राक्षस संताने यूंही उपद्रव मचाती रहेंगी?
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आज एक ब���न का फोन आया और बताया की भैया कल रात जब मैं कोचिंग से लौट रही थी तो कलीम नामक लड़के ने लात मारी और उसके साथी ने भी मेरे साथ बदतमीजी की,, इस घटना की सूचना लड़की ने फोन पर बजरंग दल नगर संयोजक अमन सोनी को दी ,, सूचना मिलते ही आरोपियों के घर जाकर आरोपियों को सबक सिखाया
एक उम्र के बाद आदमी शान्त होने लगता है, भागता हुआ सा शान्त। भागता हुआ सा शान्त आदमी बहुत खतरनाक होता है। आदमी रूक नहीं सकता, उसे रुकने नहीं दिया जाता। वह रुक जाए तो दुनिया का बोझ मालूम पड़ता है। भागते-भागते वह भीतर से खाली होने लगता है। आस-पास स्नेह ढू��ढता है जो दोस्तों से नहीं मिलता, दोस्त उलूल-जुलूल की बातों में फँसा कर खालीपन टाल सकते हैं, खत्म नहीं कर सकते।
स्नेह खोजते आदमी से सुंदर कुछ भी नहीं, स्नेह खोजते आदमी से बुरा कुछ भी नहीं। आदमी को, एक समय आने पर अपनी माँ से दूर कर दिया जाता है। उसका कमरा अलग कर दिया जाता है, और उसे आदमियों की श्रेणी में धकेल दिया जाता है जो कठोर मालूम होते हैं। ��ाँ से सिर्फ रसोई तक की बात होने लगती है। माँ के स्नेह की भूख आदमी को सारी उम्र एक खालीपन की और धकलेती है।
आदमी उस स्नेह को प्रेमिका में खोजता है और उसके साथ बच्चा होने लगता है। आदमी का बच्चा होना माँ के सिवा किसी को स्वीकार नहीं, प्रेमिका को भी नहीं। प्रेमिका कभी भी माँ नहीं हो सकती, उसकी अपेक्षाएं हैं, माँ की कोई अपेक्षा नहीं होती।
आदमी फिर आदमी होने लगता है और ढोने लगता है अपने आदमी होने का ब��झ। मैंने किसी आदमी से "कैसे हो?" के उत्तर में "बढ़िया" के अलावा कुछ नहीं सुना।
बाकी सब बढ़िया।
- संयम शर्मा