बारिश की हर बूँद स्वीकार है, मगर मासूमों पर अन्याय स्वीकार नहीं, जिन्होंने अन्याय किया वो कितने ही ताकतवर क्यों ना हो, उनके पीछे कितनी बड़ी शक्ति क्यों ना हो, लेकिन जवाब देना ही होगा��
महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताक़त हैं। जय भीम, जय भारत।
आजच्या महाराष्ट्र बंदला जनतेने मोठा प्रतिसाद दिलाय. या पुढील कार्यक्रम आम्ही काही पक्ष आणि आंदोलका��शी बोलून शांततापूर्ण आंदोलनाची पुढील दिशा ठरवू.
सरकारने विद्यार्थ्यांशी खेळ थांबवला पाहिजे.
#महाराष्ट्र_बंद #Student
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने छात्रों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान पर कार्रवाई करने के बजाय छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कायराना हरकत बताया। यह बयान राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है।
#SanjaySingh #AAP #cjp #StudentsProtest #Parliament
जवाबदेही की माँग करना, संवाद को बढ़ावा देना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान हैं। लेकिन जब जवा���देही माँग रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया जाता है और असहमति की आवाज़ को दबाया जाता है, तो यह अधिनायकवाद का संकेत देता है।
: ॲड. प्रकाश आंबेडकर
राष्ट्रीय अध्यक्ष, वंचित बहुजन आघाडी
#NEETExam #Exam
प���रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात��र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
रिपोर्टर्स की यह स्थिति उनकी कमाई हुई है. जब आज़ाद पत्रकारों ने “गोदी मीडिया” संज्ञा को दोहराना शुरू किया तो कुछ गोदी पत्रकारों को लगा की ये बस उनकी हताशा है. लेकिन अब हम देख रहे हैं कि गोदी पत्रकारों को ढंग से पता चल गया है कि आम जान खासकर युवा उन्हें पहचानता है जानता है और बाकायदा उनकी पहचाना जाहिर भी करता है. ये अलग बात है कि नए युवा पत्रकारों को इसकी क़ीमत चुकानी पड़ती है.
I strongly condemn the police brutality unleashed on our youth and students in Delhi today.
What kind of government fears its own students? What kind of democracy responds to questions with batons and tear gas instead of dialogue?
The Nation belongs to its students, its farmers, its women, its workers and to every citizen. Dissent is not a crime. Brutality is not governance.
I stand firmly with my young brothers and sisters. Accountability is non-negotiable.
Salute to each one of them for their courage, resilience and indomitable spirit. They have shown the nation what fearlessness is.
निराशा में आँख का पानी
जब समुंदर बन जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!!!
कोई अपनी ताक़त पर
जब सर उठा इठलाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!
हुक़ूमतों का घमंड-गुरूर
जब पर्वत सा बन जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!!!
दौर जब नाइंसाफ़ी का
हद ही पार कर जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!
जब-जब देश का ��विष्य
पूरा दांव पर लग जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!!!
अमित शाह यांना आज आयुष्यभर लक्षात राहील असा धडा मिळाला.
सत्तेच्या मस्तीत असलेल्यांनी हे लक्षात ठेवावं ….. तरुणाईची ताकद शस्त्रांनी नाही, तर शततेनं आणि एकजुटीनं सिद्ध होते.
देशातील सर्वात शक्तिशाली राजकारण्यालही रस्त्यावर उतरलेल् तरुणाईपुढे झुकावं लागेल
#आदोलनाचीताकत