देश हित के लिए दिया है न कि किसी बेईमान के कर्जमुक्ति के लिए।
जनता ने सरकार जरूर चुना है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि सरकार बेलगाम हो जाये।
आम जनता को ऐसे गलत फैसलों के लिए विपक्ष की अगुवाई में विरोध करना चाहिए।
इतने बड़े मुद्दे पर आम आदमी को जागरूक करने का कर्त्तव्य @INCIndia@samajwadiparty@AamAadmiParty समेत तमाम जनप्रतिनिधियों को उठाना चाहिए क्योंकि यह पैसा देश का इसे यूंही नहीं लुटेरों को सौंपा जा सकता है, 100 का पेट्रोल, डीजल, चीनी, दाल जैसे तमाम महंगाई को झेल कर देश के नागरिकों
22 लाख होम लोन न चुकाने पर मध्यम वर्ग के लोगों का घर नीलाम हो जाता है! इस नाइंसाफी के ख़िलाफ़ मध्यवर्ग को आवाज़ उठाना चाहिए। पर वो कहाँ उठाएगा। वह तो ‘राष्ट्रवाद के चिलम में धर्म की अफ़ीम’ पी रहा है और उधर असली माल सुभाष चंद्रा जैसे अरबपति को उड़ाने को मिल रहा है…
@Manoj_Yadav_ देश में फैले ज़हर के लिए यदि कोई जिम्मेदार है तो वो स्टूडियो में बैठे एंकर हैं।
कांग्रेस सरकार आने पर सबसे पहले उन एंकरों के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए जिन्होंने अपना पत्रकार धर्म नहीं निभाया और देश की एकता अखंडता और शांति व्यवस्था के लिए खतरा पैदा किया सिर्फ चंद रुपयों के लिए।
@yadavakhilesh अरे कहना क्या चाहते हैं सर ?
1 किलो पकड़ा 10 किलो दिखाया ?
सावन में बूटी का प्रयोग ज्यादा होने से दिक्कत बढ़ सकती है, कृपया अपना ध्यान दें।
@Ashok_Kashmir आपके दूसरे पैराग्राफ के मायने कई हैं।
इस हिसाब से क्या @RSSorg से जुड़े लोग भारत के नागरिक नहीं है?
फिर तो संघ भी राष्ट्रीय गान और तिरंगे की जवाबदेही के लिए बाध्य नहीं है
कांग्रेस की इसी दोगली नीति की वजह से विचारों की तिलांजलि देनी पड़ जाती है
लगे रही निष्पक्षता की खाल ओढ़कर
@riskyyadav41 UGC कानून के समय हमारे देश के प्रधानमंत्री जी को कुछ लोगों ने एक से बढ़कर एक अपशब्द कहे थे, शायद ही कोई अन्य कैटेगरी का नेता या व्यक्ति प्रधानमंत्री जी के लिए उतना अपमान जनक शब्द बोले हो।
खैर लाठीचार्ज की निंदा होनी चाहिए, लोकतंत्र में विरोध प्रकट करने का अधिकार होता है।
@JyotiDevSpeaks आत्मसम्मान तो अपने हाथ में है, ठोकर मार देना चाहिए ऐसी पार्टी को, इसमें रैली निकालने की क्या जरुरत ?
वैसे भी खुद पर आई तो आत्मसम्मान ?
समाज के साथ होते आ रहा था तब आत्मसम्मान नहीं जगा ?
गजब की स्क्रिप्ट चल रहा है देश में।
@PIBHindi बताइये सरकार के नाक के नीचे से सट्टेबाज महंगी चीनी बेचकर मुनाफाखोरी कर रहे है और हमारे सरकार स्टॉक की कोई कमी नहीं है का बखान कर रहे हैं?
आखिर बिचौलिए, जमाखोरों और सट्टेबाजों के पास इतनी हिम्मत कहा से आ गई है?
जब वृद्धि का आधार नहीं है तो यह वृद्धि क्यों?
सरकार को देखना चाहिए।
@ranvijaylive जेल से वापस आने के बाद क्या जरूरत थी अधिकारी के पास जाकर उसे उकसाने की ?
खैर भविष्य का मंत्री पद या राज्यसभा तय है, भैया बड़े उदार हैं, पूरा मौका देते हैं।
एक समय KVV बनारस के एक छात्रनेता की भी ऐसी ही हालत कर दी गई थी तब धरती पुत्र ने उन्हें भी मौका दिया था कर्ज चुकाने को।
@Abhimanyu1305 "हम चीनी उनकी खाते हैं वे पान हमारा खाते हैं"
रावण की लंका में हुई एक गुफ्तगू के व्यापारिक मार्ग खुल रहे हैं "2 दिल मिल रहे है,मगर चुपके चुपके" यह गाना और ऊपर का डायलॉग बहुत वायरल हुआ था अपने समय।
फिल्में कम देखने चाहिए क्योंकि दृश्यम का सिद्धांत बड़ा टेड़ा है।
ऑल इज वेल ।।
@VijaySingh_law वीडियो से पहचान कर मारने वाले लोगों के खिलाफ 2 मुकदमा दायर किया जाना चाहिए, पहला जानबूझकर लूट व अवैध वसूली के लिए गाय को सड़क पर छोड़ा गया ताकि किसी गाड़ी से टक्कर हो तो उस गाड़ी वाले से वसूली किया जा सके।
दूसरा लूट , तोड़ फोड़, छिनैती व मारपीट के संबंध में।
@RoflGandhi_@AmanChopra_ गोदिमीडिया को दिल्ली जन्तर मंतर जाने से डर लगता था?
मतलब उन्हें दिल्ली बीजेपी सरकार, गृहमंत्री के पुलिस पर बिल्कुल विश्वास नहीं था?
गोदिमीडिया झारखंड पहुंच गया निडर होकर, क्योंकि उन्हें हेमंत सोरेन सरकार की पुलिस पर पूरा भरोसा था।
बस यही अंतर है बीजेपी और विपक्ष की सरकार में।