@sumit1kalra अध्याय 5 के श्लोक 148
बाल्ये पितुर्वशे तिष्ठेत् ��ाणिग्राहस्य य���वने
पुत्राणां भर्तरि प्रेते न भजेत्स्त्री स्वतन्त्रताम्
अर्थात
बाल्यावस्था में पिता पुत्री की रक्षा करता है, युवावस्था में पति पत्नी की और पति की मृत्यु पश्चात पुत्र माता का संरक्षण करता है।
यह संरक्षण है गुलामी नहीं।
@Anindit26027967 Another reason of improper education and reservation.
थोथा चना बाजे घना और
बैलगाड़ी के नीचे चलने वाले कुत्तों को यही लगता है कि बैलगाड़ी को असल में वे ही धकेल रहै है बैल तो केवल सजावट के लिए बांध रखें हैं।