बनारस शास्त्री घाट UGC, SC, ST आरक्षण विरोध आंदोलन ��ा आज 7 दिन, 😭
दिन पर दिन हालत खराब होती जा रही है लेकिन सरकार की तरफ से कोई नही आया बात करने😡
धीरे धीरे ,दूर दूर शहरों ,गांवों नगरों से भाई बहन पहुचाने लगे हैं इन वीरों के समर्थन मे💪
आप ��गर नही पहुँच पा रहे हैं तो रिपोस्ट कमेंट में UGC रोल बैक लिखकर समर्थन करे ताकि हमारे भाइयों का हौसला बढ़े💪🙏✍️
#UGC_काला_कानून_वापस_लो
रचना गुप्ता 8 साल से लगातार Niva Bupa का प्रीमियम भर रही हैं,
अभी सर्जरी हुई तो कंपनी ने क्लेम रिजेक्ट कर दिया, खुद के पैसे से सर्जरी करवानी पड़ी।
सर्जरी दो बार इन्हीं की वजह से टली थी।
पहला कैशलेस क्लेम रिजेक्ट हुआ तो रीइम्बर्समेंट डाला,
वीडियो वेरिफिकेशन हुआ, होम वेरिफिकेशन हुआ, मेडिकल टीम वेरिफिकेशन भी ह���आ,
जो डॉक्यूमेंट्स पहले दे चुकी थीं वही दोबारा मांगे गए,
हर सबमिशन के बाद 10 से 15 दिन का टाइम मांगा गया,
रचना ने हर स्टेज पर कोऑपरेट किया सब दिया इंतज़ार किया,
फिर रिजेक्शन आया कि पेमेंट का प्रूफ सबमिट ही नहीं किया,
जबकि वो प्रूफ पहले ही जमा हो चुका था,
रेफरेंस आईडी है रिजेक्शन मेल है पूरा मेल ट्रेल है,
फिर मेल आया कि पेमेंट डॉक्यूमेंट्स मेल में दिए ईमेल आईडी पर दोबारा भेजो,
वो ईमेल आईडी खुल ही न���ीं रही थी,
रचना ने उसी मेल पर बताया और सारे डॉक्यूमेंट्स उसी थ्रेड में फिर भेज दिए,
न कोई एक्नॉलेजमेंट आया न कोई जवाब,
चार दिन बाद वही मेल दोबारा आ गया, वही इंस्ट्रक्शन, वही खुलने वाली नहीं आईडी,
रचना सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं हर मेल हर डॉक्यूमेंट संभालकर रखा है,
अब वो एस्केलेशन चैनल्स और लीगल एक्शन तक जाने की बात कह रही हैं।
8 साल प्रीमियम भरो, सर्जरी खुद करवाओ, फिर क्लेम के लिए मेल मेल खेलो,
अगर क्लेम करना इतना मुश्किल है तो प्रीमियम आखिर किस चीज़ का भरा जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर 'रीढ़ की हड्डी' और घरेलू राजनीति में 'अंधी लाचारी' का यह विरोधाभास ✍️
जब बात ग्लोबल जिओपॉलिटिक्स की आती है, तो भारत का रुख एकदम साफ दिखता है। ब्रिक्स (BRICS) की नई दिल्ली डिक्लेरेशन में पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा और चीन जैसे पुराने पैरोकार देश का भी उस पर दस्तखत करना—यह भारत के मजबूत 'डिप्लोमैटिक स्टांस' की जीत है। याद करिए जब चीन में SCO की बैठक के दौरान रक्षा मंत्री @rajnathsingh ने साझा घोषणाप��्र पर दस्तखत करने से साफ मना कर दिया था। उस वक्त दबाव कम नहीं था, अमेरिका के साथ रिश्तों की तल्खी और व्यापारिक व कूटनीतिक नुकसान का जोखिम सामने खड़ा था। लेकिन भारत की स्थिति स्पष्ट थी—अगर हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे और सम्मान पर पर्दा डालने की कोशिश होगी, तो हम समझौते की मेज पर दस्तखत नहीं करेंगे। भारत के इस एक कड़े और स्पष्ट संदेश का ही असर हुआ कि चीन को अपना 'कोर्स करेक्शन' करने पर मजबूर होना पड़ा, और परिणाम BRICS के जरिए हमारे सामने है।
आज देश के सामान्य वर्ग (General Category) की स्थिति ठीक उसी चौराहे पर आकर खड़ी हो गई है, जहाँ उस समय SCO बैठक के दौरान भारत खड़ा था। एक तरफ कूटनीतिक दबाव का जोखिम था, तो दूसरी तरफ अपने सिद्धांतों और वजूद पर समझौता न करने की चुनौती। सामान्य वर्ग भी आज उसी दबाव में फँसा हुआ है—उसे एक तरफ विपक्ष का डर दिखाया जाता है और दूसरी तरफ अपनी ही अनदेखी का कड़वा घूँट पिलाया जाता है। लेकिन जैसे भारत ने SCO में कोई 'फर्जी दस्तखत' करने से इनकार करके अपनी शर्त तय की थी, ठीक वैसे ही सामान्य वर्ग को भी किसी पार्टी की 'बंधुआ जागीर' या 'रखैल' की तरह प्रस्तुत होना बंद करना होगा। आपको अपने आने वाले हर चुनाव में—चाहे वह राज्य का हो या केंद्र का—एक बिल्कुल साफ और कड़ा संदेश देना ही होगा कि हमारी अनदेखी करक�� आप राज नहीं कर सकते।
जब तक सामान्य वर्ग अपना यह स्टांस खुद खड़ा नहीं करेगा, तब तक सत्ता में बैठे आका यह मानकर चलेंगे कि 'ये लोग जाएँगे तो जाएँगे कहाँ?' जब SCO की बैठक में भारत ने अपना रुख साफ किया, तो उसने पूरी दुनिया को यह समझा दिया कि भारत की शर्तों को दरकिनार करके कोई समझौता नहीं हो सकता। ठीक उसी तरह, जब सामान्य वर्ग चुनावी मैदान में अपना एकमुश्त और कठोर स्टैंड लेगा, तो न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी, बल्कि विपक्ष समेत हर राजनीतिक दल यह समझने पर मजबूर हो जाएगा कि सामान्य वर्ग को नज़रअंदाज़ करने की कीमत चुनाव हारकर चुकानी पड़ सकती है।
यही वह एकमात्र कदम होगा जिसके बाद सभी राजनीतिक पार्टियाँ अपना 'कोर्स करेक्शन' करने और आपकी स्थिति व सम्मान को स्वीकार करने के लिए मजबूर होंगी।
अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति का नियम हो या घरेलू राजनीति का, सम्मान कभी भी गिड़गिड़ाने या लाचार ��ने रहने से नहीं मिलता—वह सिर्फ एक कड़े 'स्टांस' और 'ना' कहने की ताकत से हासिल होता है।
#BRICSSummit #SCOSummit #GeneralCategory #PoliticalStance #CourseCorrection #VoteBankPolitics #CastePolitics #HinduEkta
@neha_laldas @ajeetbharti @NijiSachiv @AjeetBhartii @RHAreforms @Crystal_x_Clear @thorodinson07
स्वतंत्र भारद्वाज ने गलत किया तो 70 दिन बाद भी SC/ST लगा दिया जाएगा और वो जेल जाएगा लेकिन उसको पीटनेवाले वीडियो में दिख रहे हैं पर उनपर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
अजीत भारती को गाली देनेवाले का बाल भी बांका नहीं होगा लेकिन अजीत के जवाब पर SC/ST एक्ट भी लगेगा और उसको एंटीसिपेटरी बेल भी नहीं मिलेगी।
ये सिर्फ दो उदाहरण नहीं हैं.. यही आज की डेट में हमारे समाज की सच्चाई है।
सवाल बस इतना है कि जब किसी के गलत पर होनेवाला कानूनी एक्शन उसकी जाति देखकर होता है तो वो प्रक्रिया बटेंगे तो कटेंगे की कैटेगरी में आती है या नहीं?
जब देश की व्यवस्था ही हमें एक नहीं म��न रही तो काहे का एक हैं तो सेफ हैं फिर? आज कोई और है.. कल को हममें से कोई होगा। बस अपनी बारी का इंतजार कीजिए।
पिछले 15-20 दिनो�� में इसे देश में 4 SC/ST एक्ट के केस दर्ज हुए जो पूरे देश में चर्चित हुए:-
- राहुल गांधी, आशुतोष रांका, अजीत भारती स्वतंत्र भरद्वाज
- इन चारों ने ही प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष किसी दलित समाज का उत्पीड़न नहीं किया, ना ही किसी पर जातिसूचक टिप्पणी करने के सबूत मौजूद हैं
- स्वतंत्र भारद्वाज 14 दिन की हिरासत में हैं, अजीत भारती की अग्रिम जमानत रिजेक्ट हो गई है
- राहुल गांधी और आशुतोष रांका का कोई बाल-बांका नहीं कर सकता
एक ही देश... एक ही कानून... आरोप भी एक जैसे... तो फिर कार्रवाई का पैमाना अलग-अलग क्यों?
15 से 20 दिनों में SC/ST Act के तहत दर्ज मामलों की जमीनी हकीकत ये है...
स्वतंत्र भारद्वाज: 14 दिन की न्यायिक हिरासत
अजीत भारती: अग्रिम जमानत याचिका खारिज
राहुल गांधी: कोई बड़ी कार्रवाई नहीं
आशुतोष रांका: कोई बड़ी कार्रवाई नहीं
सवाल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, सवाल है 'कानून के निष्पक्ष और समान पालन' का...
सवाल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, सवाल है.. क्या देश में कानून सबके लिए बराबर है, या फिर राजनीतिक और सामाजिक हैसियत देखकर कार्रवाई तय होती है? क्या देश में कानून सबके लिए बराबर है, या फिर राजनीतिक और सामाजिक हैसियत देखकर कार्रवाई तय होती है?
पूरा विश्लेषण देखिए वीडियो में मेरे सोशल मीडिया चैनल्स पर
#SCSTएक्ट
#ajeetbarati
@ajeetbharti@NijiSachiv@AshutoshRanka@CJP_for_India@BhimArmyChief
We learnt about a case from a village in Delhi where a man - a practicing Muslim who recently buried his wife after her death - is availing of govt pension under Scheduled Caste quota
When Supreme Court has reiterated time and again that converts claiming SC status is “fraud on the constitution”, why is it not enforced on ground?
Why is this man’s SC certificate and benefits not being cancelled and he sent to jail for fraud?
Inquiry has been initiated after our complaint. We are in the process of submitting 10 witness statements under oath to back up the case. We will go to court if needed
Support @sewanyaya for this kind of work
Ajeet Bharti's anticipatory bail under SC/ST Act has been rejected because he allegedly abused the person who abused his sister
Swatantra Bhardwaj has been sent to 14 days of judicial custody because he allegedly made false claims in a podcast
Nida Khan, who was allegedly converting Hindu women at TCS Nashik, was granted bail because she was pregnant
Everything seems like an ironic, unjustifiable, inexplicable joke these days
23 साल से हक के लिए भटक रहा शहीद का परिवार...बलिदानी की मां बोली -
न्याय नहीं मिला तो लौटा दूंगी..पदक..अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप...!
सरकार पूरे देश में शहीद हुए जवानों को कई ���रह की तमाम सुविधाएं देने की बात करती है..लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहने वाले शौर्य चक्र विजेता शहीद विवेक सक्सेना का परिवार देश के हुक्मरानों से सपूत की शहादत के बदले मिलने वाले सम्मान के लिए 23 साल बाद भी अधिकारियों और सरकारी विभागों के चक्कर काट रहा है..!
सरकारी सुस्ती से खफा शहीद की मां ने कहा कि हम बेटे का शौर्य चक्र लौटाना ��ाहते हैं -
दरअसल, लखनऊ के सरोजनीनगर तहसील कार्यालय में शनिवार को एसडीएम अभिषेक सिंह की अध्यक्षता में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन हुआ..इस दौरान फरियादियों की संख्या कम रही, वहीं ज्यादातर अधिकारी गैरहाजिर थे..!
समाधान दिवस में दरोगा खेड़ा की कृष्ण लोक कॉलोनी निवासी 80 साल की सावित्री सक्सेना ने न्याय मांगा....वह शौर्य चक्र विजेता शहीद सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना की मां हैं..!
उन्होंने सालो�� से अटके भूमि आवंटन के मामले को लेकर शिकायत की..!
सावित्री सक्सेना अपने बड़े बेटे रंजीत सक्सेना के साथ पहुंची थीं..उन्होंने बताया कि उनके बेटे सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना 8 जनवरी 2003 को मणिपुर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे..!
उन्हें शौर्य चक्र और राष्ट्रपति पुलिस पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया था.. इसके बाद शहीद के परिवार को जमीन देने क��� आदेश हुआ था..!
बुजुर्ग सावित्री का कहना है कि -
जमीन आवंटन का सरकारी आदेश होने के बावजूद यह मामला सालों से एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर काट रहा है.. उन्होंने कई बार आईजीआरएस पर शिकायतें भी कीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई..!
उन्होंने कहा कि वह 80 साल की हो चुकी हैं और अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगा सकतीं..!
उन्होंने राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से मिलने का समय दिलाने की मांग की.. साथ ही उन्ह���ंने कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो वह शौर्य चक्र की उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी गई सम्मान राशि, शौर्य चक्र और राष्ट्रपति पुलिस पदक को सम्मान के साथ वापस करने की इजाजत चाहती हैं...!
मां सावित्री को सुनिए 👇👇👇
An 80-year-old mother is offering to return her son's Shaurya Chakra.
Not in anger at the nation.
In exhaustion.
Assistant Commandant Vivek Saxena fell fighting terrorists in Manipur on 8 January 2003. The country gave him the Shaurya Chakra. The state promised his family land and a memorial. Twenty-two years later, Savitri Saxena is still being sent from office to office. Asked for domicile papers. Asked where she lived before marriage. Asked to keep waiting.
She is 80. She says she no longer has the strength to keep doing the rounds. So she has brought the medal to a grievance camp and said: if this is the honour we give a martyr's mother, take it back.
A son gave his life.
A mother is being asked to prove she belongs.
That should break something in all of us.
@TheLallantop@IndiaToday
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक नाबालिग ब्राह्मण समाज की लड़की से दलित समाज के लड़के ने छेड़छाड़ की, जब गांव के लोगों ने इसका विरोध किया तो 7 लोगों पर SCSTACT लगवा दिया।
सोचों जिस आदमी पर POCSO के तहत कार्यवाही होनी चाहिए थी उस व्यक्ति के द्वारा SCSTACT लगवाया जा रहा है।
यह 7 के सातों ब्राह्मण समाज के लोग हैं जिन पर SCSTACT लगाई गई है, अब SCSTACT का दुरप��ोग अपराध करने और अपराध छिपाने और क्रास केस करने डर भय बनाने के लिए किया जाता है जिसका यह प्रत्यक्ष प्रमाण है।
हायकोर्ट को बंद करवाइए मोदी जी। ये कोई तरीका है कि क��ई दलित वकील इसे अपना धंधा बना चुका है, उसकी अब जाँच होगी? वकील संतोष दोहरे ने कुछ केस कर के ₹23,36,250 पाए और उसके बाद 10-12 और लंबित हैं। यानी और पैसे बनेंगे।
मोदी एक्ट केवल दंड विधान नहीं है, बल्कि यह एक @MSDESkillIndia का स्टार्ट अप प्रोग्राम भी है।
Civic activist Santosh Pandit has reportedly been detained by Pune Police after repeatedly highlighting dangerous potholes, open manholes and poor road conditions across the city. His demonstrations brought attention to the everyday risks faced by commuters.
The incident has sparked questions online about civic accountability. When citizens raise concerns over public safety, the response should be to fix the problem, not silence the person pointing it out. 🙏
पुणे में एक टेरेरिस्ट पकड़ा गया है संतोष पंडित नाम का पता है वो कितनी भयानक गतिविधियों में शामिल था, मैं बताता हूं...
संतोष पंडित रोज सुबह घर से कैमरा लेकर निकलता और सड़कों के गड्ढे जिनसे जान माल की हानि हो सकती है उसे सोशल मीडिया पर दिखाता था जो गड्ढे दूर से दिखते नहीं थे उनपर रंग डालकर मार्क करता था ताकि दूर से दिखाई दे और लोगों को हादसा होने से पहले बचा सके,और ये तो कुछ भी नहीं अभी जल्द में उसने बीजेपी विधायक को रास्ते में ये बोल दिया कि सर आपकी गाड़ी में आरटीओ के मानक वाली नम्बर प्लेट नहीं है बस फिर क्या था अगले ही दिन संतोष पंडित पर मुकदमा दर्ज हो जाता है और पुलिस संतोष पंडित को एक दुर्दान्त अपराधी की तरह खींच कर गिरफ्तार कर लेती है गिरफ्तारी का वीडियो वायरल है उस वीडियो में संतोष पंडित खुद को थप्पड़ मार रहे हैं शायद खुद से कह रहे हों कि इतना बड़ा जुर्म कैसे कर दिया तूने,
अपराध बहुत बड़ा है संतोष पंडित का तो न्यायपालिका से निवेदन है कि ऐसे आतंकवादी को फांसी से कम सजा ना हो इस देश में सच बोलने की सजा इतनी तो होनी ही चाहिए।
अनुज शुक्ला यूरेशिया वाले ✍️
देश में एक ही विधान के लिए दो अलग-अलग प्रावधान क्यों?
जिस SC/ST Act के तहत राहुल गांधी के विरुद्ध FIR दर्ज हुए एक सप्ताह बीत चुका है, वहां अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई। यहाँ तक कि इसी क़ानून के अंतर्गत नये नवेले कॉक्रोच आसुतोष रांका को भी मुकदमा पंजीकृत होने के महीना बाद भी गिरफ्तारी नहीं की गई है।
वहीं, उसी कानून के तहत स्वतंत्र भारद्वाज के मामले में शिकायत के बाद कुछ ही घंटों में हिरासत में लेने की कार्रवाई की खबर सामने आ रही है।
सवाल किसी व्यक्ति को बचाने या फंसाने का नहीं है, सवाल कानून के समान और निष्पक्ष अनुप्रयोग का है�� यदि कानून सबके लिए समान है, तो उसकी गति, कठोरता और प्रक्रिया भी समान दिखाई देनी चाहिए।
विधि का शासन तभी विश्वसनीय होगा, जब कानून व्यक्ति देखकर नहीं, अपराध और साक्ष्य देखकर चले।
सारे हिंदू इस हैशटैग को लगाओ
एक देश दो संविधान ऐसे कैसे चलेगा भाई
एक संविधान में— स्वतंत्र भारद्वाज भाई को जेल
एक संविधान में— खुला घूम रहा निशु आज़ाद का पिता
हिंदुओं अगर चूड़ी ना पहन लिया हो तुमने तो हैशटैग लगाओ
#ArrestSanjayAzad