लेकिन बाबाओं को व्यापारी बनना चाहिए ?
सरकार की चाटुकारिता करके अपना धंधा चमकाना चाहिए?
योग शिविर के नाम पर सियासी चाल चलनी चाहिए?
सस्ते तेल दिलाने और कालेघन में
हिस्सेदारी के नाम पर लोगों को ठगना चाहिए ?
सरकारों से सस्ते में अरबों की जमीन लेकर अपना साम्राज्य बनाना चाहिए?
अपने गि���ेबान में झांके पहले रामदेव
तब बच्चों को ज्ञान दें
मदन दिलावर जी या तो राजस्थान के सभी जर्जर स्कूल ठीक करे, या फिर हम पर एडवांस में FIR करवा दे।
आप हमें एडवांस में गिरफ्तार भी कर सकते है। आपकी सरकार है, आपकी पुलिस है।
लेकिन हम तब तक स्कूलों का निरीक्षण नहीं रोकेंगे जब तक राजस्थान के सभी स्कूल ठीक नहीं हो जाते।
#SchoolThikKaro
CJP की मुहिम से डरी सरकार
राजस्थान सरकार का फरमान
स्कूल के प्रधानाचार्य की पूर्व अनुमति के बिना स्कूल में कोई दाखिल नहीं होगा .
प्रधानाचार्य की लिखित अनुमति के बिना छात्रों , शिक्षकों और स्कूल की गतिविधियों की फोटोग्राफी , वीडियोग्राफी , साक्षात्कार या किसी तरह की रिकॉर्डिंग नहीं की जाएगी .
स्कूल के अधिकारी तय करेंगे कि स्कूली छात्रों के फोटो या वीडियो प्रसारित हों या नहीं .
बिना अनुमति अगर कोई स्कूल में दाखिल होता है या रिकॉर्डिंग करता है तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी
मतलब ये हुआ कि स्कूलों को ठीक करने की बजाय सरकार ने स्कूलों की दशा को छिपाने के लिए ये फरमान जारी कल दिया है .
#SchoolThikKaro
हृदय से- धीरे-धीरे सरकार से सवाल पूछने वाले हर व्यक्ति पर कोई न कोई ठप्पा लगाया जा रहा है।कभी "Cockroach", तो कभी "दिमागी नक्सल"।
अगर कोई छात्र कहता है- मैंने चार साल पढ़ाई की है, मेरा पेपर लीक मत होने दो।परीक्षा समय पर कराओ���परीक्षा करा दी, तो रिजल्ट समय पर दो।रिजल्ट दे दिया, तो नियुक्ति के लिए सालों मत घुमाओ।सरकारी नौकरी की सीटें बेची किसने?पेपर लीक करने वाले कौन हैं?सॉल्वर गैंग को संरक्षण किसने दिया?परीक्षा एजेंसी चुनते समय जवाबदेही किसकी थी?मेरी उम्र भर्ती के इंतज़ार में निकल गई, मेरी गलती क्या थी?फॉर्�� की फीस मैंने दी।तैयारी मैंने की।सेंटर तक जाने का किराया मैंने दिया।पेपर मैंने दिया।फिर सिस्टम की गलती की सज़ा भी मैं ही क्यों भुगतूँ? - क्या यह दिमागी नक्सल होना है|
अगर कोई बच्चा पूछता है- मेरे सरकारी स्कूल की छत जर्जर क्यों है?मैं इसी छत के नीचे बैठकर क्यों पढ़ूँ? पढ़ने आया हूँ, जान जोखिम में डालने नहीं।स्कूल में शिक्षक क्यों नहीं हैं?एक शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल क्यों चल रहा है? सरकारी स्��ूल बंद क्यों हो रहे हैं? गरीब परिवार निजी स्कूलों की महँगी फीस भरने को मजबूर क्यों हो रहा है?- क्या ये सवाल दिमागी नक्सलवाद है?
कोई मरीज पूछे- सरकारी अस्पताल में डॉक्टर क्यों नहीं हैं? दवाइयाँ बाहर से क्यों खरीदनी पड़ रही हैं? इलाज इतना महँगा क्यों है कि बीमारी से पहले बिल का डर लगता है? सरकारी अस्पताल पर्याप्त क्यों नहीं हैं? एक सामान्य परिवार इलाज के लिए अपनी जमा-पूँजी क्यों तोड़ने को मजबूर है? क्या वह भी द��मागी नक्सल है?
कोई किसान पूछे- मेरी फसल की लागत बढ़ती जा रही है, लेकिन आमदनी क्यों नहीं बढ़ रही? जिस अनाज को मैं पैदा करता हूँ, उसका दाम तय करने में मेरी आवाज़ कहाँ है? क्या वह भी दिमागी नक्सल है?
कोई नागरिक पूछे- मेरे टैक्स के पैसे से बनी सड़क पहली बारिश में क्यों धँस गई? नया पुल कुछ ही महीनों में कैसे टूट गया? हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी नोएडा एयरपोर्ट थोड़ी-सी बारिश में क्यों डूब गया? क��या वह भी दिमागी नक्सल है?
कोई मध्यमवर्गीय आदमी पूछे- पानी पीने लायक क्यों नहीं है?ह वा साँस लेने लायक क्यों नहीं है? टैक्स मैं भरूँ...महँगी शिक्षा मैं खरीदूँ...महँगा इलाज मैं कराऊँ...टोल भी मैं दूँ...तो बदले में व्यवस्था से जवाबदेही माँगना गलत कैसे हो गया?क्या वह भी दिमागी नक्सल है?
मोदी जी ,नक्सलवाद और सवाल में बहुत बड़ा अंतर है।एक हाथ में बंदूक लेकर संविधान को चुनौती देता है।दूसरा हाथ में संविधा��� लेकर सरकार से जवाब माँगता है।दोनों ��ो एक तराजू में मत तौलिए।हिंसा लोकतंत्र नहीं है।लेकिन असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है।पत्थर चलाना गलत है।लेकिन सवाल चलना बंद हो जाएँ...तो लोकतंत्र धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है।
मैं बच्चों से भी यही कहूँगा-कानून अपने हाथ में मत लेना।लेकिन...अपने अधिकारों के लिए सवाल पूछना कभी बंद मत करना।
पेपर लीक हुआ है-पूछो।भर्ती रुकी है-पूछो।स्कूल जर्जर है-पूछो।अस्पताल बदहाल है-पूछो।सड़क टूटी है—पूछो।भ्��ष्टाचार दिख रहा है-पूछो।चंदे और ठेकों का रिश्ता संदिग्ध लगता है-तथ्य माँगो।आपके टैक्स का पैसा बर्बाद हुआ है-हिसाब माँगो।क्योंकि सरकार किसी भी पार्टी की हो...सरकार मालिक नहीं है, सरकार जवाबदेह है।और नागरिक उसका दुश्मन नहीं, इस लोकतंत्र का मालिक है।
मुझे उस युवा से डर नहीं लगता जो सवाल पूछता है।मुझे उस युवा से डर लगता है जिसने सवाल पूछना ही छोड़ दिया है।जिस दिन देश का युवा कहने लगे-"मुझे क्या मतलब?"पेपर बिके-मुझे क्या मतलब।नौकरी बिके-मुझे क्या मतलब।स्कूल ��िरे-मुझे क्या मतलब।अस्पताल लूटे-मुझे क्या मतलब।भ्रष्टाचार हो-मुझे क्या मतलब।
उसी दिन देश को चिंता करनी चाहिए।क्योंकि सोया हुआ दिमाग देश की समस्या है।इसलिए शब्दों से मत डराइए।युवाओं के सवालों का जवाब दीजिए।उनके आंदोलन को सुनिए।उनकी पीड़ा समझिए।गलत माँग है, तो देश के सामने बताइए कि गलत क्यों है।सही माँग है, तो उसे पूरा कीजिए।लेकिन सवाल पूछने की संस्कृति को शक की नज़र से मत देखिए।क्योंक�� आज जो बच्चा पेपर लीक के खिलाफ आवाज़ उठा रहा है...वह सरकार गिराने नहीं निकला है।वह अपना भविष्य बचाने निकला है।जो शिक्षक स्कूल की टूटी छत दिखा रहा है...वह देश को बदनाम नहीं कर रहा।वह चाहता है कि अगली बारिश से पहले वह छत ठीक हो जाए।जो नागरिक अस्पताल की बदहाली दिखा रहा है...वह भारत के खिलाफ नहीं है।वह भारत को बेहतर देखना चाहता है।और मेरे लिए देशभक्ति का मतलब केवल देश की तारीफ करना नहीं है।जहाँ देश म��ं कमी दिखे...उसे ठीक करवाने के लिए आवाज़ उठाना भी देशभक्ति है।
सवाल लोकतंत्र को ज़िंदा रखते हैं।
इस Gen Z इनफ्लुएंसर को सुने...
इसने कोई स्कूल को लेकर एक वीडियो बनाया था उस वीडियो की वजह से इसको एंड इसकी टीम को FIR की धमकी आ रही थी लेकिन उनकी रीड की हड्डी मजबूत है।
यह Gen Z है यह किसी के बाप से नहीं डरता इसने कहा कि हमारे ऊपर कितनी भी FIR हो जाए, कितना ही डराया जाये लेकिन हम सच दिखाएंगे...
देश को सच दिखाकर रहेंगे....
#SchoolThikKaro
अभी थोड़ी देर पहले भाजपा के गुंडे स्कूल में घुस आए और हमारे टीम के लोगों के साथ मारपीट की। बच्चों के सामने।
और यह सब जब हुआ, तब थानागाजी के SHO ���े अपनी पूरी टीम पीछे कर ली।
भाजपा के गुंडो से हम डरने वाले नहीं है। स्कूल तो हम ठीक कराकर ही मानेंगे।
जोधावास, थानागाजी, राजस्थान में कल जो स्कूल की छत गिरी। वहाँ के बच्चों को जो पानी पिलाया जा रहा था, उसे एक बार ज़रूर देखियेगा।
@madandilawar@BhajanlalBjp आप आपने बच्चों को यह पानी पिलाओगे?
@AmitShah जी, सुना है आप परसो पास ही में रैली करने आ रहे है। यह पानी ज़रूर पीजिएगा।
SCHOOL THIK KARO!
Naya Parliament ban gaya. Naya PM Office ban gaya. Gaon ka school waise ka waisa hai.
80 years of Independence, and a child is still asking for drinking water and a functional toilet.
This Independence Day, we stop waiting. We audit it ourselves.
1. Download the checklist.
https://t.co/QEeRCfZqW1
2. Go to the school. In person.
Photograph every gap. Check for electricity, drinking water, functional toilets, mid-day meals.
3. Share with local authorities. Then tag us.
Share your audit report with the sarpanch, BDO, headmaster. Then tag us on our social media.
We amplify what you find. Every school counts.
#SchoolThikKaro #IndependenceDay #SarkariSchoolAudit