Schools में PTI के पद बहुत अधिक जरूरी हैं क्योंकि बच्चों का सिर्फ Mental Development ही नहीं, बल्कि Physical Development भी उतना ही महत्वपूर��ण है। एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का विकास होता है।
राजस्थान सरकार द्वारा विभिन्न भर्तियों में पदों की संख्या बढ़ाना एक सराहनीय कदम है, जिसका हम दिल से स्वागत करते हैं। 👏
इसी क्रम में यदि PTI भर्ती में भी पदों की संख्या बढ़ाकर 5000 की जाए, तो यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में माननीय राजस्थान सरकार की एक बहुत ही सकारात्मक और दूरदर्शी पहल होगी।
हम माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनला�� शर्मा जी से विनम्र अनुरोध करते हैं कि PTI भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने पर सकारात्मक विचार करें।
@RajCMO @BhajanlalBjp @RESMA_7
एक सरकारी सर्कुलर से हड़कंप...
राजस्थान सरकार के वित्त विभाग ने 2 जून को एक आदेश जारी किया गया है जिसमें कि तृतीय श्रेणी अध्यापकों को राज्य सरकार का कर्मचारी ना मानकर नहीं माना गया है और ऐसे जितने भी कर्मचारी अन्य उच्च पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्त हुए हैं और पे प्रोटेक्शन का लाभ लिया है उनके वेतन नियतन पुनः कर अधिक भुगतान वसूली के आदेश जारी करने की तैयारी की जा रही है।
इस परिपत्र के अनुसार राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों/ स्वायत्तशासी संस्थाओं/ स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं के कार्मिक राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं हैं, अतः ऐसे कार्मिक यदि सीधी भर्ती के माध्यम से राजकीय सेवा में नियुक्त होते हैं तो उन्हें राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 24 एवं 26 के अंतर्गत पूर्व पद का वेतन संरक्षण(Pay-protection) देय नहीं होगा।
जिसके आधार पर मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों द्वारा कार्यालय स्तर पर कमेटियों का गठन करके सेवा-पुस्तिकाओं का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। जिनमें ऐसे कार्मिक जो पूर्व में अध्यापक तृतीय श्रेणी में थे अथवा अन्य विभाग से अध्यापक तृतीय श्रेणी पर नियुक्�� हुए, की सेवा-पुस्तिकाओं में वेतन-संरक्षण(Pay-protection) को त्रुटिपूर्ण और नियम विरुद्ध बताया जा रहा है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के दिनांक 14/3/11 के परिपत्र के प्रारंभिक शिक्षा, स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन है एवं तृतीय श्रेणी अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया के अतिरिक्त समस्त सेवा प्रकरण पैतृक विभाग अर्थात स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संपादित किए जाने हैं। अतः जिन अध्यापकों की नियुक्ति जिला ��रिषद/ पंचायत समिति के माध्यम से तृतीय श्रेणी अध्यापक के रूप में हुई थी तथा वर्तमान में उनका पैतृक विभाग शिक्षा विभाग ही है।
उल्लेखनीय है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी एक प्रकरण में निर्णय दिया है जिसमें पंचायती राज संस्थानों के सभी कार्मिकों को राज्य सरकार के कार्मिक माना गया है, ऐसी स्थिति में यदि किसी प्रकार की वसूली के आदेश होते हैं तो सारे शिक्षक आंदोलन की राह पर जाएंगे।
आग्रह है इस आदेश को वापस लिया जाए।
@BhajanlalBjp @KumariDiya @GovindDotasra @madandilawar @RajCMO @RajGovOfficial
नौकरी लगने पर सबसे बड़ा सहारा RGHS ही है, हर व्यक्ति यही सोचता है कि बीमारी में घर धुपता है कम से कम अब अस्पताल में तो महीने के हजार रुपए की कटौती से सुरक्षित रहेंगे।
#RGHS_कर्मचारियों_का_हक
सरकार से निवेदन है कि RGHS योजना में तुरंत सुधार हो, अस्पतालों को जवाबदेह बनाया जाए और कर्मचारियों को उनका अधिकार दिलाया जाए। 🙏
कर्मचारियों के हक के लिए
आज रात 8:00 से सभी लिखें
#RGHS_कर्मचारियों_का_हक
किसी भी छात्र से लेकर अध्यापक तक, किसी से भी बात कर लीजिए, सभी की एक ही आवाज़ सुनाई देती है:‘भाजपा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को नई जान डाल दी है।’असिस्टेंट प्रोफेसर को लेकर जो नया राग छेड़ा गया है, वह वास्तव में अत्यंत उत्साहजनक और दूरदर्शी है।”
राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों का लगभग हॉस्पिटल RGHS में इलाज नहीं कर रहे हैं 💔🙏
अभी मैंने जयपुर में एक बड़े अस्पताल का अपॉइंटमेंट लेने के लिए फोन किया तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि RGHS में इलाज नहीं होगा।
सरकार से निवेदन है कि इस समस्या का समाधान ढूंढे। हम हर महीने कटौती करवाने के बावजूद भी परेशान है, इसमें बहुत ज्यादा सुधार की जरूरत है कर्मचारी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं😓
@officialRGHS@RajCMO@GajendraKhimsar@RESMA_7
राजस्थान के समस्त राजकीय महाविद्यालयों में 01 मई से 30 जून 2026 तक 2 माह का ग्रीष्मावकाश घोषित।
हकीकत में यह 2 माह का अवकाश सरकारी विद्यालयों में होनी चाहिए।
आज उच्च शिक्षा विभाग (कॉलेज शिक्षा) में स्कूल शिक्षा विभाग से अधिक वित्तीय भार होने के बाबजूद भी सरकारी स्कूलों पर ध्यान/हस्तक्षेप करने की तुलना अधिक रहता है।
5-18 वर्ष के बच्चों के लिए भीषण गर्मियों के बीच भी स्कूल आना होगा।
18-40 वर्ष या अधिक के लिए भीषण गर्मी होने के कारण 2 माह का अवकाश रहेगा।
जब कोर्ट के कर्मचारियों, वकील, जज तक की सर्दी गर्मियों की छुट्टी आती है
तब छोटे-छोटे बच्चों की किसी को परवाह नहीं है क्योंकि ये बच्चे वो���र नहीं है ना प्रदर्शन या आंदोलन कर सकतें।
मतलब साफ है - भीषण गर्मी में सरकारी स्कूलों के छोटे-छोटे बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है,
Note: - सरकारी स्कूलों के स्टाफ की छुट्टी मत करों चाहें तो उनको किसी अन्य काम में लगा दो परंतु बच्चों को भीषण गर्मी में 0-10KM तक रोज आना जाना होता है जो बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है इस बात का सभी को ध्यान रखना होगा।