विकासखंड इटवा जनपद सिद्धार्थनगर के प्राथमिक विद्यालय भदोखर में कार्यरत शिक्षक श्री शौकेंद्र का वेतन, बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र न बनवाने के आरोप में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सिद्धार्थ नगर द्वारा रोका गया. शिक्षक ने बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवश्यक कार्यवाही करके जमा भी कर दिया और अपना स्पष्टीकरण भी दे दिया. इसके बाद भी खंड शिक्षा अधिकारी इटवा श्री राजेश कुमार द्वारा वेतन जारी करने हेतु अपनी आख्या नहीं भेजी गया. शिक्षक व्हाट्सएप पर तथा उनसे मिलकर बार-बार गिड़गिड़ाता रहा लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी ने वेतन जारी करने हेतु आख्या नहीं भेजी. इस बात के चलते भारी डिप्रेशन में गुजरते हुए शिक्षक ने हानिकारक दवाइयों की ओवरडोज ले ली. शिक्षक के साथ रहने वाले लोगों ने किसी तरह से अस्पताल में ले जाकर उसकी जान बचाई. मामला मीडिया में आने के बाद जिला प्रशासन एवं बेसिक शिक्षा विभाग सिद्धार्थनगर द्वारा कमेटी- कमेटी का खेल करके मामले को रफा दफा कर दिया गया. आज खंड शिक्षा अधिकारी इटवा श्री राजेश कुमार ने पूरे उत्साह के साथ आकर विकास खंड इटवा के शिक्षकों को धमकी देना शुरू किया है कि जिन-जिन लोगों ने उस शिक्षक का साथ दिया था,दीपावली बाद उनको देख लेंगे. माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि कृपया प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए खंड शिक्षा अधिकारी इटवा जनपद सिद्धार्थनगर श्री राजेश कुमार के ऊपर कार्यवाही करने की कृपा करें, जिससे शिक्षक सुरक्षित रहकर शिक्षण कार्य कर सके और उनका सम्मान बचा रहे.
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शिक्षकों का शोषण किस प्रकार बढ़ गया है चारों तरफ से दबाव ही दबाव,, जनपद सिद्धार्थनगर के इटवा ब्लॉक के एक शिक्षक का खंड शिक्षाधिकारी की प्रताड़ना से जहर खा लेना , इसकी बानगी मात्र है,
कार्यवाही की प्रतीक्षा में...
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जनपद चित्रकूट के सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहा ।सम्मेलन में उपस्थित शिक्षकों में आरटीई लागू होने की तिथि से पूर्व के शिक्षकों पर टेट थोपने जैसे अन्याय पूर्ण फैसले से व्यथित होकर बुंदेलखंड में अब तक २ शिक्षकों द्वारा आत्महत्या करने ��ैसी घटनाओं पर जबरदस्त रोष देखने को मिला ।सम्मेलन में सभी शिक्षकों ने एक मत से निर्णय लिया कि आगामी १६ सितम्बर को जिलाधिकारी के माध्यम से मा प्रधानमंत्री जी को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा यदि उसके बाद भी भारत सरकार ने टेट प्रकरण पर आवश्यक कार्यवाही नहीं की तो दिल्ली में विशाल आंदोलन किया जाएगा ।
लगभग एक दशक अगर पदोन्नति लंबित है। नई शिक्षक भर्ती का पता नहीं है। अगर कोर्ट में टीईटी का आधार बना कर केस न किया जाता तो यकीन मानिए अब तक सभ��� की पदोन्नति हो चुकी होती, और "नई शिक्षक भर्तियां" भी समय पर निकल रही होती। लेकिन नहीं कुछ लोगों को सच्चाई का मसीहा बनना था। अगर इतनी ही परेशानी थी तो सरकार पर प्रेशर डालते। हर बात ��ें कोर्ट जाना, आगे क्या-क्या दिन दिखाएगा आप देखते जाएगा।
क्या मिला केस करके ? सिर्फ सरकार का फायदा हुआ !! इतने वर्ष पदोन्नति का पैसा बचा !!, नई शिक्षक भर्ती न करने का बहाना मिला।
हम आपस में ही कुढ़ते रहे
यह नीति ने विभाग ही खा लेगी एक दिन।
किसी की बाइक से कुढ़न , किसी की गाड़ी से, किसी के कुर्ते से।
हम पता नहीं कहां रुकेंगे
धन्य है 🙏