'ये पंजाब के एक सरकारी स्कूल की लाइब्रेरी है। अगली बार कोई कहे कि सरकारी स्कूल अच्छे नहीं हो सकते, तो उन्हें ये वीडियो दिखा दीजिए। बात सिर्फ नीयत की है'-अरविंद केजरीवाल
#Punjab
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिख��ने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं ह��ई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आध��र पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्��्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पु���्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रो��थाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
पहले शिक्षा में आरक्षण दो, तब जनाब पढ़ेंगे..
फिर नौकरी में आरक्षण दो, तब जनाब कमाएँगे..
पदोन्नति में भी आरक्षण दो, तब IAS, PCS और जज बनेंगे।
और उसके बाद कहेंगे “मैं हिंदू नहीं हूँ, मुझे 5,000 साल तक पानी नहीं पीने दिया गया।”
आरक्षण का लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुँचे, न कि एक ही परिवार को पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिलता रहे..
समान अवसर दो, समाज में समानता लाओ...
आओ मिलकर हाथ बढ़ाओ .. भारत को शशक्त बनाओ ✊
साथ में 3000 साल की स्तन टैक्स वाली रसीद भी लाना जिसे देने अपनी अम्मा इत्यादि को भेजने का दावा करके शोषित पीड़ित आरक्षण लेते हो
बिना उसके अब कोई आरक्षण नहीं देगे हम लोग
@SunilAstay
पुलिस जबर्दस्ती लोगों को जंतर मंतर से हटा रही है!
लेकिन हमने दिखा तो दिया कि आंदोलन हम भी कर सकते हैं और वोट हमारे पास भी कम नहीं!
और ये तो बस शुरुआत है!!
#21AugReservationHataoAndolan
आज आरक्षण में सुधार की मांग को लेकर हज़ारों लोग जंतर-मंतर पर जमा हुए हैं।
प्रदर्शनकारी आरक्षण और SC/ST एक्ट के गलत इस्तेमाल और उनके बढ़ते द��यरे को लेकर चिंता जता रहे हैं।
SC/ST/OBC के लिए उत्तर प्रदेश में निम्नलिखित योजनाएँ/प्रशिक्षण केन्द्र हैं:
१. छत्रपति शाहू जी महाराज शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, भागीदारी भवन, लखनऊ
२. आदर्श पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ (केवल महिलाओं हेतु) ३. राजकीय आई०ए०एस०/पी०सी०एस० कोचिंग सेन्टर, नियामतपुर, हापुड़ ४. संत रविदास आई०ए०एस० / पी०सी०एस० पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, वाराणसी ५. ड��० बी०आर० अम्बेडकर आई०ए०एस०/पी०सी०एस० पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, अलीगढ़ ६. न्यायिक सेवा प्रशिक्षण केन्द्र, प्रयागराज ७. IAS/PCS पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, गोरखपुर
इसमें सामान्य वर्ग के लिए क्या है? क्या @myogiadityanath या @narendramodi की एक योजना ऐसी है जिसमें सामान्य वर्ग के निर्धन बच्चों को निःशुल्क आवास, कोचिंग, फॉर्म, कोर्स फीस, हॉस्टल फीस की सुविधा है?
किस आधार पर ‘अभ्युदय योजना’ को आगे किया जा रहा है? इस योजना के पाँच लाभार्थी वर्ग में से एक सामान्य वर्ग है! क्या इसमें हर तरह के आरक्षण लगाने के बाद मेरिट लिस्ट नहीं निकाली जाती? तो ये चूरण तो बाँटना बंद कर दो तुम लोग।
मोदी जी आरक्षण मत हटाओ -
बस ये एक काम कर दो -
स्वतंत्रता के समय राजपूतानो द्वारा दान में दिये हुए
>565 रियासतें
>18700 किले
>45 लाख एकड़ जमीन
ये सब 80 वर्षों के सरकारी ब्याज दर के हिसाब से वापस कर दीज��ए सवर्णों को !
अगर मैं गलत हूं तो बताना ?
मध्यप्रदेश के शिक्षकों की गुणवत्ता सही रखने हेतु सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2009 से पूर्व के सभी शिक्षकों को TET परीक्षा देनी होगी। फिर मध्यप्रदेश सरकार को लगा कि इसमें कैसे आरक्षण दि���ा जाए, तो उन्होंने तय किया कि 20-20 वर्ष से अपने विषय पढ़ाते शिक्षकों में भी आरक्षित वर्ग को 10% कम नंबर लाने पर भी उन्हें पास मान लिया जाएगा।
ये तालिबान या ISIS की क्रूरता नहीं है, बल्कि ये सब बिहार में हुआ।
संतोष सिंह जी ने अंबेडकर को लेकर कोई टिप्पणी कर दी। जिसके बाद उन्हें बेरहमी से मारा। अर्धनग्न कर घुमाया।
ये उत्पीड़न अत्याचार बर्बरता और अन्याय नहीं तो क्या है? इस पर सब मौन क्यों है? मामला ब��हार के सीवान का।