मित्रता दिवस के अवसर पर आइए,हम केवल मित्रता का उत्सव ही न मनाएँ,बल्कि संविधान प्रदत्त आरक्षण और सामाजिक न्याय की रक्षा के संकल्प के साथ एक-दूसरे से जुड़ते जाएँ।
जितने अधिक लोग इस मुहिम से जुड़ेंगे,उतनी ही हमारी आवाज़ बुलंद होगी और हमारा अभियान मजबूत बनेगा
#आरक्षण#SaveAarakshan
आज जब अक्सर उच्च पदों के साथ अपार संपत्ति की चर्चाएँ होती हैं,ऐसे समय में किशन सहाय IPS (IG) का सादगीपूर्ण जीवन एक अलग उदाहरण प्रस्तुत करता है
सेवानिवृत्ति के बाद भी अपना घर नहीं,बल्कि किराए के घर से नई शुरुआत—यह सादगी, ईमानदारी और सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण का ��ंदेश देती है
आदरणीय किशन सहाय सर को भारतीय पुलिस सेवा में पुलिस महानिरीक्षक (IG) के पद से सेवानिवृत्ति पर हार्दिक शुभकामनाएँ।
पद से सेवानिवृत्ति होती है,सेवा और विचारों से नहीं। आपकी ईमानदार कार्यशैली,सरलता और समाज के प्रति समर्पण हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे।
आरक्षण समस्या नहीं, जातिगत असमानता का संवैधानिक स��ाधान है।
जिस दिन जाति आधारित भेदभाव समाप्त होगा, उस दिन आरक्षण की आवश्यकता भी स्वतः समाप्त हो जाएगी।
देश में आरक्षण हटाओ की बात चल रही है।
चलो अब आरक्षण की सच्चाई को जानते है।
कल राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर ने कॉलेज प्रोफेसर गणित का परिणाम जारी किया।
दलित 101 नंबर लाकर फेल हो गया।
आदिवासी 86 नंबर पर फेल हो गया।
EWS वाला सवर्ण 82 नंबर लाकर गणित का प्रोफेसर बन रहा है।
आरक्षण बचाओ मोर्चा
जब तक सामाजिक समानता का लक्ष्य पूरा नहीं होता,
तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी।
संविधान के सम्मान और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित।
जुड़ें .....
https://t.co/iHNptglsER
@riskyyadav41 धरातल पर उतर कर नेतृत्व करने वाला अलग ही दिखता है।
पहला भाषण सुना उस दिन ही देख लिया था। ये बहिन बहुत आगे तक जाएगी। असली लड़ाई ये ही लड़ेगी
आंदोलन के मंच से @neha_aisa जी का संबोधन बेहद दमदार था। यदि उन्हें आंदोलन की कमान दी जाती, तो युवाओं में एक अलग ही जोश और ऊर्जा देखने को मिलती
आप शानदार वक्ता हैं और नेतृत्व करने की क्षमता भी रखते हैं। उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।
@aisa_official_ ये स्पीच कमसे कम 10 बार सुनी है, और साथ वालों को भी सुनाई है, वाकई में स्पीच दमदार है। अगर आंदोलन का नेतृत्व इस बहिन के हाथों होता तो जो भीड़ अब दिखाई दी है। उससे 10 गुना भीड़ दिखाई देती। जोश भर देने वाला स्पीच
"सबको इस्तीफ़ा चाहिए था, वह हो गया। लेकिन अब असली ज़रूरत यह है कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों। यदि किसी की लापरवाही से लोगों की जान जाती है, तो केवल इस्तीफ़ा ही नहीं, बल्कि कठोर कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए। जवाबदेही तय हो और दोषियों को कानून के अनुसार सख्त सज़ा मिले।"
@JaikyYadav16 "सबको इस्तीफ़ा चाहिए था, वह हो गया। लेकिन अब असली ज़रूरत यह है कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों। यदि किसी की लापरवाही से लोगों की जान जाती है, तो केवल इस्तीफ़ा ही नहीं, बल्कि कठोर कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए। जवाबदेही तय हो और दोषियों को कानून के अनुसार सख्त सज़ा मिले।"