कॉकरोचों को जोधपुर में रगड़ दिया है हमने पहले ही कहा था की हम धरातल के मजबूत आदमी है कीड़ों का राजस्थान में कोई एजेंडा नहीं चलाने देंगे
अभिजीत दीपके ��ो जयपुर में गालों पर तमाचा जड़ने वाला हिंदू शेर भाई राकेश गुर्जर 🔥💪
🚨 अभिजीत दीपके को थप्पड़ मारने वाले राकेश गुर्जर भाई की फिर एक बार चेतावनी 🔥
जयपुर आने की गुंडे वाली भाषा तू बोल रहा है। गाँव वाले नहीं, गाँव के लोग सरल और भोले हैं।
तूने 2.0 की बात की थी… वो हम पहले ही करके दिखा चुके हैं। अब हम 3.0 की तैयारी में हैं।
जयपुर आ… इस बार अच्छे से इलाज होगा 💪🔥
तर्क: हमारे साथ 5000 वर्षों से डिस्क्रिमिनेशन हुआ। अतः आरक्षण सकारात्मक डिस्क्रिमिनेशन है और उचित है।
उत्तर: हिन्दुओं का नरसंहार मुगलों के समय में हुआ, बलात्कार हुआ, गाँव जलाए गए। यह 4-500 वर्ष पहले की ही बात है। तो क्या वर्तमान मुसलमानों का, उपरिलिखित तर्क से, नरसंहार उचित हो जाएगा?
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इस पर तुरंत भीम वाले पगला जाएँगे कि ऐसे कैसे तुम आरक्षण के डिबेट में लॉजिकल बा��ें ले आते हो। आज तक ये 5,000 वर्ष का कोई भी प्राइमरी सोर्स ले कर आए नहीं। और उस समय किसने किया, क्या किया, मैं उसका लोड क्यों लेता फिरूँ?
जिन जातियों को आरक्षण से हटाने के लिए 1960 के ही दशक में सिफारिश हुई, वो आज तक टिकी हुई हैं लिस्ट में, सबसे अधिक आरक्षण खा रही है। जिन जातियों को मुगलों के समय में जमींदारी दी गई, वो आज ओबीसी लिस्ट में हैं।
यदि सरकार को लगता है कि ये सारे डॉक्यूमेंट प्रधानमंत्रियों के तकिए की खोली में रखे होते हैं, तो वो भूल जाएँ। ये सब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आँकड़े और तथ्य हैं।
‘व्हाइट पेपर’ तो लाना ही होगा। नहीं लाओगे तो हम निकलवा लेंगे या ऐसे आँकड़े रख देंगे जो तुम्हें और भी असहज करेगा।
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एक बात संघ के लिए भी है: मूर्ख बनाना बंद करो ये सब ��ीक करवा कर कि ‘UGC पर तो हमें न उगलते बन रहा, न निगलते’। यह ऐसा स्तरहीन तर्क है कि सामने मिले ऐसा आदमी तो पूछूँ कि तुम्हारी बुद्धि घास चरने चली गई?
इसमें ‘उगलना-निगलना’ क्या है? सीधा वक्तव्य यह दो: “आज के संदर्भ में, जब विश्वविद्यालयों की दीवारों पर सवर्णों के नरसंहार की बातें लिखी जाती हैं, हर सप्ताह कब्र खुदने के नारे लगते हैं, तो यह मानना अनुचित है कि उनको लेकर जातिगत घृणा नहीं है। अतः उन्हें भ��� इस लिस्ट का हिस्सा होना चाहिए।”
तत्पश्चात्, इसमें एक और बिन्दु जोड़ा जाए: यदि कोई भी शिकायत झूठी निकली, उस पर दोगुना जुर्माना और जेल का दंड होगा।
ऐसा कोई रॉकेट साइंस नहीं है।
अगर वंदे मातरम् में देवी का नाम आने से उसे गाना मुस्लिमों की आस्था के खिलाफ है…
तो क्या उस देवी का नाम हटवा देना हिंदुओं की आस्था के खिलाफ ��हीं है?
ये किस तरह का Secularism?