@dromsudhaa संविधान और कानून की व्याख्या योग्यता और अध्ययन से तय होती है, किसी के मनमाफिक कोटे या पसंद से नहीं। न्यायपालिका में पद योग्यता के आधार पर मिलते हैं, पहचान की राजनीति के आधार पर नहीं।
@garvirawat जिन्हें लगता है समय 18वीं सदी की घड़ी से शुरू हुआ, वे मानसिक गुलामी में जी रहे हैं।
हमारे शास्त्रों में 'त्रुटि' से लेकर 'महायुग' तक की सटीक गणना है। इस प्राचीन खगोल विज्ञान को समझने के लिए तीव्र बुद्धि चाहिए, सोशल मीडिया का अधूरा ज्ञान नहीं।
@garvirawat अचरज है! बिना घड़ी के सूरज देखकर दोपहर समझ आ जाती है, पर पंचांग से आधी रात कैसे पता चली—यह समझने के लिए दिमाग कम पड़ रहा है?
श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र के 'निशीथ काल' में हुआ था। आधुनिक दिमागों को समझाने के लिए उसे '12:00 AM' लिखते हैं। थोड़ा खगोलशास्त्र पढ़िए।
@TheIncNews सोनिया गांधी को भारतीय कहना गलत है, वह इस देश की धरती पर एक भार हैं। जिन्हें अपनी जड़ें और देश की मिट्टी से मतलब नहीं, उन्हें भारतीय नहीं कहा जा सकता!
@Iftekha39418001 इफ़्तिखार भाई, ज़रा हिम्मत दिखाओ और 'वंदे मातरम' गाकर सुनाओ! असलियत सामने आते ही तुम्हारा दोगलापन और डगमगाता ईमान साफ़ दिख ��ाता है, राष्ट्रभक्ति सिर्फ बातों से नहीं, दिल से होती है!
@garvirawat बिल्कुल सही! आरटीआई (RTI) का इस्तेमाल करके ही 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले का सच जनता के सामने आया था। उस दौरान 'ईमानदारी' का आलम यह था कि खेल के फंड से लेकर दलित कल्याण तक का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। आरटीआई ने ही यूपीए सरकार की उस 'पारदर्शिता' की पोल खोली थी!"
@Kanchanyadav000 वैज्ञानिक रूप से बैक्टीरिया और ��ंगस का इलाज संभव है, लेकिन वायरस को सिर्फ 'न्यूट्रलाइज' किया जा सकता है। बिहार का 'RJD' रूपी वायरस कोरोना से भी खतरनाक है, जिसका कोई स्ट्रेन समझ नहीं आता—इसे हमेशा न्यूट्रलाइज ही रखना पड़ता है वरना ये फिर से तबाही मचा देगा!
@NewspressX 2014 से 2026 तक देश की सुरक्ष�� के लिए हर खतरे का कड़ाई से जवाब दिया गया। वहीं, पहले के दशकों में आतंकवाद चरम पर था और सरकारें सिर्फ भर्त्सना करने तक सीमित थीं। जनता का पैसा लुटता रहा और परिवारवाद फलता-फूलता रहा, फर्क साफ है!
@NewspressX NIA की जरूरत तब आन पड़ी थी जब यूपीए सरकार के कार्यकाल में देश में आतंकवाद चरम पर था और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी। आज देश सुरक्षित है, इसलिए हर बात पर बेवजह एजेंसियों का हौव्वा खड़ा करना सिर्फ राजनीतिक ड्रामा है, असलियत कुछ और है!
@NewspressX सीबीआई कोई आज की या नई एजेंसी नहीं है। इसकी नींव ब्रिटिश काल में ही 1941 में 'स्पेशल पुलिस इस्टेब्लिशमेंट' (SPE) के रूप में पड़ गई थी, जिसे 1946 के DSPE एक्ट के तहत ताकत मिली और 1963 में इसका नाम CBI हुआ। इतिहास जाने बिना आधे-अधूरे ज्ञान पर हवा में तीर न चलाएं!
@INCIndia Rahul Gandhi’s acts show Congress’s idea of foreign policy—not diplomacy, but bringing foreigners home. From shady funding to family ties, their foreign policy was about settling foreigners in India. Today, the nation pays the price and bears three foreigners for their foolishnes
@NayakRagini Before spitting venom against the Prime Minister and daring to question his character, look at your own family's questionable legacy and conduct. A leader of dignity doesn't need validation from those with zero morals. Look into your own pedigree first!"
Before spitting venom against the Prime Minister and daring to question his character, look at your own family's questionable legacy and conduct. A leader of dignity doesn't need validation from those with zero morals. Look into your own pedigree first!"