*प्रह्लाद द्वारा शील दान ...
इन्द्र का वैभव नष्ट हो चला! वे बड़े चिन्तित हुए और राजर्षि प्रह्लाद के पास जाकर उसका कारण पूछा! प्रह्लाद ने बताया- "राजन्! ���ुमने अहिल्या जैसी सती साध्वी का शील नष्ट किया है! जब तक उसका... https://t.co/BWfKJxoL0R
*शिष्टता, सभ्यता, आदर-सम्मान और सहयोग की भावना मानव जीवन की सफलता के लिए आवश्यक बातें हैं! कौन नहीं चाहता कि दूसरे व्यक्ति उसके साथ नम्रता से बोलें, सभ्यतापूर्ण व्यवहार करें, आवश्यकता पड़ने पर उसकी सहायता ���रें और... https://t.co/4dtUjrEjgl
*आत्मगौरव की रक्षा करना मनुष्य का परम कर्त्तव्य है, जिससे आत्मगौरव घटता हो, आत्मग्लानि ��ोती हो, आत्महनन करना पड़ता हो, ऐसे धन, सुख, भोग और पद को लेने की अपेक्षा भूखा, नंगा रहना ही अच्छा है! जिसके पास आत्मधन है उसी... https://t.co/CJ7aCHFoXR
*स्वर्ग के देवता बनाम जीवन देवता ...
एक बार स्वर्ग के देवता धरती पर विचरण करने आये! उन्हें आशा थी कि धरती के निवासी उनका विपुल स्वागत कर���ंगे! उन दिनों खेतों में अनाज के पौधे लहलहा रहे थे! कलियाँ और बालें निकल रही... https://t.co/xatSMsOWAa
*अच्छा हो या बुरा, धर्म ही हमारे राष्ट्रीय जीवन का प्राण है; तुम उससे निकल नहीं सकते! अभी और चिरकाल के लिए भी तुम्हें उसी का अवलम्ब ग्रहण करना होगा, चाहे तुम्हें इस पर उतना विश्वास हो या न हो, जो मुझे है! तुम इसी... https://t.co/g2r4e46QHB
*जब तक करुणा पिघल न जाये, चाव दरश के पलते रहन��!
जब तक मिले न प्रभु का मन्दिर, दीपक तब तक जलते रहना!!
निकल पड़े तो मंजिल पाना-मानवत्व का स्वाभिमान है,
मन चाहा पा लेने में ही-इस जीवन की रही शान है!
जब तक मिले न... https://t.co/MU72V5vLo5