7.8% GDP Growth का असली नंबर 2.6% है। मोदी सरकार में पूर्व व���त्त सचिव रहे सुभाष चंद्र गर्ग ने GDP के आंकड़ों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल के GDP आंकड़ों को नीचे संशोधित किया, जिससे इस साल की विकास दर कृत्रिम रूप से बढ़ी ह��ई दिखाई दे रही है। अगर इन संशोधनों का असर हटाया जाए तो वास्तविक GDP वृद्धि 7.8% नहीं, बल्कि केवल 2.6% रह जाती है।
गर्ग ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चेताते हुए कहा कि भारतीय आर्थिक स्थिति की वास्तविकता को पहचानिए..कोई वास्तविक विकास नहीं हो रहा है।
मोदी सरकार का एक और झूठ फिर से बेनकाब हो गया।
#FakeGDPGrowth @samajwadiparty @yadavakhilesh
ये वीडियो देखो, और गर्व और ख़ुशी का अनुभव करो। जो बात हमारी पीढ़ी को युवावस्था में समझ में आई थी, वो बात gen alfa को बाल्यावस्था में समझ में आ रही है।
आज ऐसा लग रहा जैसे इतने दिनों का संघर्ष फलीभूत हुआ है, उसके परिणामों में ऐसे कुछ चिराग और भी हमारे घरों में रोशन ह�� जाए। तो ये अंधकार टिक नहीं सकता 🙏👇🫶
@DrLaxman_Yadav ऐसे लोग जो संविधान को पढ़ना तो दूर देखे भी नहीं होंगे वही लोग ऐसी बेतुकी बात करते है.
मुझसे भी ऐसे कई लोग मिल चुके है ऐसे लोग समझाने पर समझते नहीं प्रमाण दिखाना पड़ता है
हमारे समाज के कुछ लोग जो जागरूक नहीं है वो भी उनकी हां में हाँ मिलाते ह��.
जागरूकता बहुत जरुरी है धन्यवाद सर
@DrLaxman_Yadav मै नीजी क्षेत्र में भी आरक्षण का समर्थक हूँ क्यों कि सबसे ज्यादा रोजगार निजी क्षेत्र में ही है जिस पर कुछ विशेष जाति के लोगों का कब्ज़ा है
आज देश में आदिवासी बच्चों की जान की कीमत सिर्फ 20 हजार रुपये है।
सरकार की तरफ से हर परिवार को सिर्फ 20 हजार रुपये दिए गए, लेकिन गलती इन बच्चों की नहीं थी।
गलती उस सिस्टम की थी, जिसमें आदिवासियों के विकास के नाम पर हजारों करोड़ रुपये आते हैं, लेकिन किसी को नहीं पता कि पैसा जाता कहां है?
सबसे दुखद बात यह है कि देश की राष्ट्रपति और मध्य प्रदेश के राज���यपाल खुद आदिवासी हैं, फिर भी मध्य प्रदेश में कुपोषण के कारण 22 बच्चों की मौत हो जाती है।
: @INCAdivasi के चेयरमैन @VikrantBhuria जी
📍 दिल्ली
डॉक्टर सोनेलाल पटेल पचास हड्डियाँ टूटने के बाद जब तीन महीने बाद बिस्तर से उठे, तो अपने शरीर की हड्डियों के दम पर नहीं, अपने शरीर में पड़े बारह किलो लोहे के दम पर उठे थे। वो उठे, वो उठे और वो एक हैसियत के साथ उठे, जो एक इंच भी नहीं झुकी, जो एक कदम भी पीछे नहीं हटी।
जेल में रहकर के उन्होंने पैंसठ साल की उम्र में, 1999 में, जन्मों-जन्मों की यातना झेली थी, जो उनकी रीढ़ की हड्डी पर चोट करती थी। डॉक्टर कह रहे थे कि तुम खेत में काम करने वाले, तुम खेत की मेड़ पर काम करने वाले राजनेता हो।
तब डॉक्टर सोनेलाल पटेल जब दोबारा खड़े हुए, तो चुनौती दे रहे थे। चुनौती दे रहे थे। आपने सुना होगा, मंचों से कहा था कि देश की राजनीति, देश की सत्ता किसी की बपौती नहीं है। इस देश में हक पिछड़ा वर्ग, आदिवासी का है। अपना अधिकार हमने लिया है, जानते हैं, कब्जा भी करना जानते हैं।
जो हमें तलवार से देती है, वो ��लवार चलाकर के गर्दन काटना भी जानते हैं और ढाल बनाकर के अपने वर्तमान और भविष्य को बचाना भी जानते हैं।
मैं आपको यह बात इसलिए बता रहा हूँ कि वो नेक्स्ट की पीढ़ियाँ, जो अपने पूर्व की पीढ़ियों के प्यार, तपस्या और संघर्ष को नहीं जानते, उनके बनाए हुए इतिहास को नहीं जानते, तो आगे लड़ी जाने वाली लड़ाई को अपने आप ही आधी हार जाते हैं। वो कभी नया इतिहास नहीं लिख सकते।
आरक्षण किसी की कृपा नहीं, बल्कि सदियों से वंचित और पिछ���़े समाज को समान अवसर देने का संवैधानिक अधिकार है।
आरक्षण का विरोध करने वालों से मेरा स्पष्ट सवाल है—जब सदियों तक भेदभाव और अवसरों पर एकाधिकार चलता रहा, तब आपको योग्यता और समान अवसर की चिंता क��यों नहीं हुई?
भारत का संविधान सामाजिक न्याय की गारंटी देता है। इसलिए आरक्षण का विरोध वास्तव में उन संवैधानिक प्रावधानों और सामाजिक न्याय की भावना का विरोध है, जिसने करोड़ों वंचित लोगों को आगे बढ़ने का रास्ता दिया।
आरक्षण को खत्म करने की बात करने वालों को पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समाज में भेदभाव, असमानता और अवसरों की गैर-बराबरी समाप्त हो। आरक्षण पर हमला संविधान का अपमान है
हम आरक���षण की रक्षा करेंगे, संविधान की रक्षा करेंगे और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाएंगे।और जनसंख्या के अनुपात में हिस्सेदारी लेगे
23 अगस्त क्या है?
23 अगस्त 1999 को इलाहाबाद के पी.डी. टंडन पार्क में डॉ. सोनेलाल पटेल ने एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कमेरा समाज से आह्वान किया था—
“ऐ मेरे कमेरा समाज के लोगों, उठो और इस देश की राजनीति पर कब्जा करो। जब राजनीति में हिस्सेदारी होगी, तभी तुम्हारे वर्तमान और भविष्य के लिए नीतियां बनेंगी; तुम्हारे खेत, मेड़ और पलियान के लिए नीतियां बनेंगी। और अगर चुप ब���ठ गए, तो मिट जाओगे।”
उनकी यह हुंकार हजारों लोगों के बीच गूंज रही थी। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह कमेरा आंदोलन के इतिहास का एक दर्दनाक अध्याय बन गया। 23 अगस्त 1999 को पुलिसिया कार्रवाई और लाठीचार्ज में डॉ. सोनेलाल पटेल ��ो गंभीर रूप से घायल किया गया।
यह सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं था—यह कमेरा समाज की राजनीतिक चेतना और उसके संघर्ष की आवाज़ पर हमला था।
इसीलिए 23 अगस्त सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि संघर्ष, चेतना और राजनीतिक अधिकार की लड़ाई की याद है।
23 अगस्त — दूसरी आज़ादी की पहली क्रांति दिवस।
बड़े-बड़े मंचों से कहा गया कि देश को आत्मनिर्भर बनाना है। हमें लगा—बाजार, बैंक, खेत, कंपनियाँ और फैक्ट्रियाँ आत्मनिर्भर होंगी।
लेकिन आज बाजार जाइए, हर तरफ विदेशी सामान दिखता है। मंच से “Vocal for Local” कहा जाता है, लेकिन बाजारों में “Made in China” का सामान बिकता है।
जब हमने बाजारों, फैक्ट्रियों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों की हालत देखी, तो समझ आया कि आत्मनिर्भरता के नाम पर देश को किस दिशा में ले जाया जा रहा है।
आज देश को अंग्रेजों या मुगलों की जरूरत नहीं है—देश को लूटने के लिए हमारे बीच के लोग ही काफी हैं।
पिछले 10 मिनट में दस बार सुन चुका हूँ…
नागालैंड के Wangnao Yato ने राष्ट्रीय गान के साथ अपनी आवाज़ का जो समां बाँधा वो अद्भुत है!
एक बार आप भी सुनिए फिर और लूप में डाल कर सुनते रहेंगे
Love you Wangnao Yato, Love you Nagaland 🇮🇳
अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर चीन ने हमारी सेना को पेट्रोलिंग करने से रोक दिया है - यह बेहद चिंताजनक है।
लेकिन उससे भी ज्यादा चिंताजनक है राजनाथ सिंह जी, अमित शाह जी और नरेंद्र मोदी जी की ओर से पसरा सन्नाटा। उल्टा मोदी सरकार चीन को रोकने के बजाय इस खबर को रोकने के लिए मीडिया पर दबाव डाल रही है।
देश को आज भ��� गलवान के बाद प्रधानमंत्री का वह बयान याद है, जिसमें उन्होंने यह कहकर कि चीन ने हमारी जमीन का एक इंच भी नहीं लिया, भारत को भारी नुकसान पहुंचाया था।
आज भी अपनी छवि बचाने का वही ऑपरेशन जारी है - और देश की सुरक्षा से ऊपर अपनी नकली छवि को प्राथमिकता देने वाला प्रधानमंत्री देश के लिए बेहद खतरनाक है।
चीन ने भारत की बहुत सारी भूमि लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में कब्जा कर ली है, स्थानीय नागरिक लगातार इस बात का विरोध कर रहे हैं और आवाज उठा रहे हैं, लेकिन डरपोक भाजपा की सरकार मुँह सिल कर बैठी है, और चीन के सामने सरेंडर है
लाल लाल आंख दिखाने का दावा, वायदा और बड़बो��ापन करके 2014 में आई भाजपा की सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है, देश की सीमाओं की रक्षा तो इन भाजपाइयों से हो नहीं पा रही और देश के अंदर विपक्षी दल तथा आम जनता के ऊपर लाठी चला कर, फर्जी मुकदमे लगाकर यह भाजपाई अपना जोर दिखाते हैं
भाजपा देश बेच रही है, देश लुटा रही है
झारखंड के छात्र आंदोलन में मेरा दूसरा दिन
स्याही से लिखा जा रहा है झारखंड के छात्रों का आगे का संघर्ष!
JPSC-JSSC आंदोलन जारी है! री-एग्ज़ाम की मांग पूरी करो!
सिर्फ़ सरकारी बस का ही नहीं, डबल इंजन सरकार का भी डबल धुंआ निकल गया है। न उधर बचेंगे, न इधर।
इलाहाबाद के आक्रोशित छात्र पूछ रहे हैं कि ये बस वाया प्रयागराज, लखनऊ से गोरखपुर जा रही है क्या?
विशेष उल्लेख : जागरूकता जगानेवाली, जन-ज़िम्मेदारी भरी ‘Main Street Media’ को दुस्साहसी पत्रकारिता के लिए बधाई। Mainstream Media इनसे कुछ सीखे।