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श्रीमद्भगवद्गीता के पहले अध्याय (अर्जुन विषाद योग) के चौथे श्लोक में कहा गया है:
श्रीमद्भगवद्गीता के पहले अध्याय का चौथा श्लोक युद्धभूमि में अर्जुन की मानसिक स्थिति और उनकी चिंता को उजागर करता है। इस श्लोक में अर्जुन कौरवों की सेना को देख रहे हैं और उन योद्धाओं का वर्णन कर रहे हैं, जो बहुत पराक्रमी और महायोद्धा हैं। वे अपने शत्रु पक्ष में उन महान धनुर्धारियों का उल्लेख करते हैं, जो युद्ध में भीम और अर्जुन के समान ही पराक्रमी हैं।
अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि |
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ||
अर्जुन कह रहे हैं कि यहाँ (कौरवों की सेना में) ऐसे महान योद्धा उपस्थित हैं, जो युद्ध में अद्वितीय वीरता दिखाने में सक्षम हैं। उनमें भीम और अर्जुन के समान योद्धा हैं, जैसे:
1. युयुधान (सात्यकि) - सात्यकि, जो यादव कुल से थे और श्रीकृष्��� के मित्र व अनुयायी थे, धनुर्विद्या में माहिर और वीरता के प्रतीक माने जाते हैं।
2. विराट - विराट, जिनकी नगरी में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय शरण ली थी, भी एक महाबली और महारथी थे।
3. द्रुपद - महाराज द्रुपद, जो द्रौपदी के पिता और द्रोणाचार्य के शत्रु थे, अपनी अद्वितीय योद्धा क्षमता और वीरता के लिए विख्यात थे।
अर्जुन जब इन योद्धाओं को देख रहे थे, तो उन्हें यह महसूस हो रहा था कि वे केवल सामान्य शत्रु से नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि उन योद्धाओं से लड़ रहे हैं, जो उनकी ही तरह वीर और पराक्रमी हैं। यह दृश्य अर्जुन के मन में युद्ध को लेकर संदेह और भय उत्पन्न कर रहा था, क्योंकि उन्हें अपने ही गुरु, सगे संबंधियों और मित्रों का सामना करना पड़ रहा था।
इस श्लोक के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि जीवन के संघर्षों में भी हमें कई बार अपनों से लड़ाई करनी पड़ती है, जो मन में द्��ंद्व और विषाद उत्पन्न करती है। यही द्वंद्व आगे गीता के संवाद का आधार बनता है, जहां भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करते हैं।
#GeetaGyan
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श्रीमद् भगवद् गीता के अध्याय 1 के श्लोक 5 का अर्थ इस प्रकार है:
श्लोक: धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्। पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः।।1.5।।
अनुवाद: वीर्यवान धृष्टकेतु, चेकितान, काशिराज, पुरुजित, कुन्तिभोज और महान योद्धा श���ब्य भी (तुम्हारी सेना में हैं)।
धृष्टकेतुः:
धृष्टकेतु चेदि राज्य का राजा था। चेदि राज्य वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में फैला हुआ था। धृष्टकेतु एक वीर योद्धा थे जो कौरवों की सेना में शामिल थे।
चेकितानः:
चेकितान वृष्णि वंश से थे और वे महाभारत के महान योद्धाओं में से एक थे। उनकी वीरता और युद्ध में कुशलता के लिए उनका विशेष स्थान था।
काशिराजः वीर्यवान्:
काशिराज काशी राज्य के राजा थे। 'वीर्यवान्' शब्द से उनके वीर होने का संकेत मिलता है, जो युद्ध में उनकी शक्ति और साहस को दर्शाता है। उनका समर्थन दुर्योधन को था, और वे भी कौरवों की सेना में महत्वपूर्ण योद्धा थे।
पुरुजित् कुन्तिभोजः:
पुरुजित और कुन्तिभोज दोनों महापुरुष थे और पांडवों की माता कुंती के संबंधी थे। कुन्तिभोज पांडवों की माता कुंती के मामा थे, परंतु महाभारत युद्ध में वे कौरवों के पक्ष में लड़े थे।
शैब्यः:
शैब्य महान योद्धा थे और उनकी वीरता प्रसिद्ध थी। उन्हें भी 'नरपुंगव' (श्रेष्ठ पुरुष या नायक) कहा गया है, जो उनकी प्रतिष्ठा और शक्ति को दर्शाता है।
विशेष टिप्पणी:
इस श्लोक में दुर्योधन यह बताने की कोशिश कर रहा है कि उसकी सेना में अनेक शक्तिशाली और महान योद्धा शामिल हैं, जिनके होते हुए वह युद्ध जीतने के प्रति आश्वस्त है। यह सभी योद्धा अपने-अपने राज्य और वंश के महान राजा और योद्धा थे। महाभारत के युद्ध में, प्रत्येक योद्धा की अपनी भूमिका थी, और उनकी वीरता की चर्चा कई स्थानों पर की गई है।
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भगवद गीता का पहला श्लोक (अध्याय 1, श्लोक 1) है:
धृतराष्ट्र उवाच: धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय॥ 1॥
धृतराष्ट्र ने कहा: हे ���ंजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध के लिए एकत्रित हुए मेरे पुत्रों और पाण्डवों ने क्या किया?
इस श्लोक में धृतराष्ट्र, जो कि नेत्रहीन हैं, संजय से पूछ रहे हैं कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में, जहाँ कौरवों और पाण्डवों के बीच युद्ध होने जा रहा है, दोनों पक्षों ने क्या किया। यह श्लोक युद्ध के प्रारंभिक क्षणों का वर्णन करता है, और यहाँ धृतराष्ट्र की चिंता इस बात को लेकर है कि युद्ध में क्या होने ��ाला है।
#bhagavadgita
Rohit Sharma on Team India Batting Collapsed: भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने स्वीकार किया कि न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट के दूसरे दिन टीम को 46 रन के न्यूनतम स्कोर पर सिमटते देखकर वह 'दुखी' हैं. बारिश के कारण पहले दिन का खेल रद्द होने के बाद दूसरे दिन रोहित ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया. भारत की पारी 31.2 ओवर में सिमट गई और पांच बल्लेबाज खाता भी नहीं खोल सके.
रोहित ने दूसरे दिन के खेल के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा,"बतौर कप्तान 46 रन का स्कोर देखकर दुखी हूं क्योंकि पहले बल्लेबाजी का फैसला मेरा था. लेकिन साल में एक या दो खराब फैसले चलते हैं." इससे पहले भारत में टीम का न्यूनतम टेस्ट स्कोर 75 रन था जो 1987 में वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली में बनाया था.
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श्रीमद् भगवद गीता, अध्याय 1, श्लोक 2:
सञ्जय उवाच:
दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा | आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत् ||
संजय ने कहा:
जब राजा दुर्योधन ने पांडवों की सेना को युद्ध के लिए व्यवस्थित खड़ा देखा, तब वह अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाकर उनसे यह वचन (बात) कहने लगा।
अर्थ: दुर्योधन ने पांडवों की शक्तिशाली सेना को देखकर चिंता महसूस की और अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास सलाह के लिए गया। यह श्लोक दुर्योधन की मानसिक स्थिति को दर्शाता है, जिसमें वह पांडवों की शक्ति को देखकर चिंतित हो रहा है और युद्ध से पहले अपने गुरु से मार्गदर्शन मांग रहा है।
#bhagavadgita
#xforbharat
India vs New Zealand 1st Test Day 3: बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में इंडिया वर्सेस न्यूजीलैंड पहला टेस्ट मैच खेला जा रहा है। पहले दिन बारिश की वजह से खेल नहीं हो सका, लेकिन दूसरे दिन टीम इंडिया ने 46 रनों पर घुटने टेक दिए थे और न्यूजीलैंड ने 130 रनों से ज्यादा की बढ़त हासिल कर ली थी। वहीं, तीसरे दिन न्यूजीलैंड ने फिर से दमदार खेल दिखाया और रचिन रविंद्र के शतक, टिम साउदी और डेवन कॉनवे के अर्धशतकों की बदौलत टीम ने 402 का स्कोर हासिल किया और 356 रनों की विशाल बढ़त हासिल की। इसके जवाब में भारत ने तीसरे दिन 49 ओवर में तीन विकेट खोकर 231 रन बना लिए हैं। विराट कोहली आखिरी गेंद पर आउट हुए। तीसरे दिन का खेल खत्म होने पर सरफराज (70) क्रीज पर मौजूद हैं।
भारत ने दूसरी पारी में अच्छी शुरुआत की। रोहित और यशस्वी के बीच पहले विकेट के लिए 72 रन की साझेदारी हुई। यशस्वी 52 गेंद में 35 रन बनाकर आउट हुए। वहीं कप्तान रोहित शर्मा 63 गेंद में 52 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद विराट कोहली और सरफराज के बीच शतकीय साझेदारी हुई। कोहली 102 गेंद में 70 रन बनाकर पवेलियन लौटे। सरफराज 78 गेंद में 70 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं।
#ViratKohli𓃵
#INDvsNZ
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श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 1 और श्लोक 1.3
"अर्जुनविषादयोग"। इसमें अर्जुन का मानसिक संघर्ष और युद्ध करने की दुविधा दिखाई गई है। वह अपने संबंधियों, गुरुओं, और मित्रों को देखकर युद्ध में भ���ग लेने से हिचकिचा रहा है।
पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्।
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता॥
धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन, अपने गुरु द्रोणाचार्य से क���ते हैं:
"हे आचार्य, देखिए! आपके बुद्धिमान शिष्य द्रुपद के पुत्र धृष्टद्युम्न ने पाण्डवों की इस विशाल सेना को कैसी व्यवस्थित रूप से सजाकर खड़ा किया है।"
इस श्लोक में दुर्योधन, द्रोणाचार्य को पाण्डवों की सेना के बारे में बताकर, उन्हें सजग करने की कोशिश कर रहा है।
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हर दिन एक नया मौका लेकर आता है। चाहे छोटा हो या बड़ा, हर कदम मायने रखता है। बस चलते रहो, मंज़िल खुद-ब-खुद करीब आ जाएगी। 🚶♂️💫 #KeepMoving#Motivation#BelieveInYourself