सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज़ादी हमारे स्वतंत्र��ा सेनानियों द्वारा दिया गया सिर्फ़ एक तोहफ़ा नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी भी है।
यह ज़िम्मेदारी है सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलने की, संविधान और तिरंगे के मूल्यों को अपने दिल में रखने की और हर हाल में लोकतंत्र की रक्षा करने की।
मुझे गर्व है कि हमारे देशवासी, खासकर युवा, इन मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हैं।
जय हिंद! 🇮🇳
जय जोहार!
विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में मीणा समाज कोटा द्वारा कोटियाभील प्रतिमा से लेकर कोटा दशहरा रंगमंच तक निकाली गई शोभायात्रा का केशवपुरा सेकंड चौराहे पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया तत्पश्चात भील समाज नयागांव द्वारा नयागांव से लेकर कोटियाभील प्रतिमा तक निकाले जाने वाली 1/2
लोग अफवाह फैलाते रहते है मै कह रहा हू अफवाहों पर ध्यान मत दो कुछ विरोधी लोग जो 'बाबा' को डाऊन करना चाहते है हो तो नही सकता खूब ताकत लगा ली लोगो ने लेकिन उन लोगो की बातो पर ध्यान नही दे और इस बात का ध्यान रखे आगे कोई बात करता है तो उसका जवाब दे ये संपत्ति आप��ी है सबकी है
- जगमोहन मीना
विश्व आदिवासी दिवस पर देश के सभी आदिवासी भाई-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं।
आदिवासी इस देश के पहले मालिक हैं - उनकी ऐतिहासिक संस्कृति भारत की अमूल्य धरोहर है।
जल, जंगल और ज़मीन पर उनके अधिकार के साथ आदिवासी अस्मिता और सम्मान की लड़ाई में हम हमेशा उनके साथ खड़े हैं।
You are the one who has harmed the future of our youth the most.
You allowed and encouraged the total capture and destruction of our education system - and protected every person responsible for it.
The students’ demands are clear:
1. Sack Dharmendra Pradhan.
2. Apologise to the students.
3. Take action against those who assaulted them.
आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है।
आपने न सिर्फ हमारी education system पर पूरा कब्ज़ा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया - और इसके ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया।
छात्रों की मांगें साफ़ हैं:
1. धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं।
2. छात्रों से माफ़ी मांगे।
3. छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें।
आपने हमारे लोकतंत्र के इतिहास में कभी देखा है कि सरकार के सांसद खुद संसद के बाहर प्रदर्शन करें? ये संसद नहीं चला पा रहे हैं, बेहद कमजोर और कायर हैं।
इस लोकतंत्र में युवाओं के साथ कैसा व्यवहार हो रहा है? जायज मांगों के लिए उनपर अत्याचार कर रहे हैं, लाठ�� और आंसू गैस चलवा रहे हैं। प्रधानमंत्री जो हर भारतीय की उपलब्धि का श्रेय लेते हैं, जो भारत के मंगल ग्रह पर जाने का भ��� श्रेय लेते हैं, वे पेपर लीक की जिम्मेदारी क्यों नहीं ले रहे? 152 पेपर लीक हुए और किसी को सजा नहीं हुई। मोदी जी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
पेपर लीक क्यों हुआ, इसका जवाब शिक्षा मंत्री को देना चाहिए।
बच्चों पर लाठी क्यों चलाई गई, इसका जवाब गृहमंत्री को देना चाहिए।
इन दोनों की जवाबदेही क्यों नहीं तय हुई, इसका जवाब प्रधानमंत्री को देना चाहिए।
केन्द्र सरकार ने लगभग एक महीने तक असंवेदनशीलता और संवादहीनता की स्थिति बनाए रखी। जब युवाओं ने अपनी बात सरकार तक पहुँचाने के लिए संसद मार्च करने का निर्णय लिया, तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले तक दागे।
नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से संसद में इस पर चर्चा की माँग की, परंतु सरकार न तो संसद में चर्चा कर रही है और न ही युवाओं से संवाद करने को तैयार है। इसी हठधर्मिता के कारण आज लोकसभा और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्षों को प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देना पड़ रहा है। यदि यह सरकार लोकतंत्र और संवाद में विश्वास रखती, तो देश को यह दिन नहीं देखना पड़ता।
छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।
प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे - नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।
मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए - प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों।
भारत के छात्रों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
An attack on students is an attack on every Indian family.
PM Modi believes he can get away without answers, without consequences. He cannot. Not this time.
I ask every patriotic Indian who believes our students deserve justice - join us in dharna in front of the Prime Minister’s residence.
The voice of India’s students will not be ignored.
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरो��ी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ ��ुवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज करना और आँसू गैस के गोले दागना पूरी तरह ग़लत है। मैं इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ।
पेपर लीक जैसे बेहद गंभीर मुद्दे पर सरकार ��ो छात्रों की माँगों को गंभीरता से सुनना चाहिए और उनसे संवाद करना चाहिए, न कि बल प्रयोग का रास्ता अपनाना चाहिए।
छात्रों की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए।
सरकार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा लेना चाहिए और परीक्षाओं में हो रही धांधली को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी ने भी छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर कई बार सरकार को घेरा है।
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
ज़िद ही पकड़नी है, तो छात्रों के हित में डटे रहने की ज़िद पकड़े सरकार! जिस पेपर लीक ने सैकड़ों छात्रों को
ना-उम्मीदी की कगार पर ला खड़ा किया है, उसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के हितैषी क्यों बनना?
छात्रों का हित सर्वोपरी- और उनको हमारा समर्थन, अडिग
सरेआम भविष्य की नीलामी।
Paper Leak Rate Card:
* NEET - ₹40 लाख
* IIT-JEE - ₹15 लाख
* उत्तराखंड पटवारी - ₹15 लाख
* बिहार शिक्षक भर्ती - ₹10 लाख
* ओडिशा पुलि��� भर्ती - ₹25 लाख
जिसके पास पैसा है, वो मेन्यू से पेपर चुन लेता है। ��र जो सिर्फ़ मेहनत करता है वो अपना सपना खो देता है।
152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित और सज़ा? एक को भी नहीं। यही इस माफ़िया की असली ताक़त है - बच्चों का भविष्य बेचो, पैसा कमाओ और बेख़ौफ़ घूमो।
मोदी जी, देश का हर छात्र आपसे यही पूछ रहा है - यह गिरोह किसकी शह पर इतना बेख़ौफ़ है?
प्रधानमंत्री जी,
श्री राम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अपनी कमाई अर्पित की - वहां हुई चंदा चोरी अब किसी से छुपी नहीं है।
ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था। इस चंदा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है।
तत्काल स्वतंत्र जांच कराइए, पूरा हिसाब सार्वजनिक कीजिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाइए।
आपकी सरकार की विश्वसनीयता अब आपकी कार्रवाई पर निर्भर है।
5 साल रोज़ाना 10 घंटे की तैयारी और औसतन ₹9 लाख - हर छात्र की मेहनत और उसके परिवार का त्याग।
10 साल में 152 पेपर लीक, सीट-नौकरी का रेट कार्ड, 0 सज़ा, 7.5 करोड़ युवाओं का बर्बाद भविष्य - System की हालत।
इस भ्रष्ट Education System को जड़ से बदलना होगा - बनानी होगी 21वीं सदी की परीक्षा व्यवस्था, स्वतंत्र और जवाबदेह संस्था जहां छात्रों को मिले पूरी सुरक्षा।
#ChhatronKiGoonj