कुछ *Beep* की औलादें कह रही है कि दलितों के अलग कॉलेज स्कूल बना दिया जाए, सारे प्रोफेसर, शिक्षक सब उनके कर दिए जाए,
मनु की औलादों जब शिक्षा पर तुम्हारा 100% अधिकार था, सारे शिक्षक प्रोफेसर सब तुम ही लोग थे, दलित तो अछूत थे, इसलिए वह कभी तुम लोगों के साथ पढ़े ही नहीं थे,
100% मैरिट थी, जहां देखो वहां सिर्फ मैरिट ही मैरिट थी, फिर भी तुम एक सुई तक का अविष्कार नहीं कर पाए,
आज भी दुनिया की टॉप 100 यूनिवर्सिटी में भारत की एक भी नहीं है, जबकि 96% प्रोफेसर, कुलपति सुवर्ण समुदाय से आते हैं
आज देश की AI कंपनी में CEO से लेकर बोर्ड मेंबर तक तुम ही लोग हो, एक भी AI मॉडल तुम नहीं बना पाए, अब यह मत कह देना कि AstroTalk हमने बनाया है, 😂
तुम लोगों के अविष्कार और थ्योरी देखकर भारत को दुनिया में शर्मिन्दा होना पड़ता है, शेषनाग के फन पर धरती टिकी है, मुंह से पैदा होते हैं, मोर के आंसुओं से बच्चे पैदा होते हैं और भी कई सारी बंदर भालू की मनोहर कहानियां गढ़ी,
तुमने सिर्फ दलित पिछड़ा के शोषण के नियम बनाए, उसी में तुम माहिर हो, बिना परिश्रम के कैसे कमाया जाए उसपर ज़्यादा ध्यान है,
Remember My Word "एक सुई तक का अविष्कार नहीं किया तुम लोगों ने"
"झांट घमंड का सर पर लेकर तुम मनुवादी कहलाते हो" 🔥
ChatGPT से कॉपी करने की झूठी कहानी फैलाकर IIT Bombay के छात्र साहिल को सोशल मीडिया पर बदनाम किया जा रहा है.
Exam में अगर किसी छात्र पर चीटिंग या परीक्षा में अनुचित साधन इस्तेमाल करने का आरोप लगता है तो परीक्षा केंद्र या विश्वविद्यालय उस घटना की UFM रिपोर्ट बनाता है.
• छात्र ने क्या किया
• किस समय और कहां पकड़ा गया
• क्या सामग्री या सबूत मिला
• Invigilator की रिपोर्ट
• संबंधित दस्तावेज या सबूत
इसके बाद संस्थान की UFM Disciplinary Committee तय करती है कि मामला वास्तव में Cheating का है या नही.
साहिल के मामले में पहले ChatGPT से नकल की अफवाह फैली गयी. सोशल मीडिया और पूरे देश में छवि को खराब किया गया.
फिर IIT Bombay ने अपनी कहानी को वापस लेकर माफी मांगी. साहिल की माँ का आरोप है उनके बेटे को तीन महीने से परेशान किया जा रहा था.
@tradeandgrowww एक सवाल आत्महत्या करने वाला तक OBC-SC-ST ही होता हैं क्यों।
NFS वाला भी इसी वर्ग का क्यों।
लेटरल एंट्री में यही OBC-SC-ST वंचित हैं।
OBC-SC-ST वर्ग ही उच्च न्यायालय में वंचित हैं
इनकी आबादी 90% टैक्स सबसे अधिक 90% यही वर्ग दे रहा
एक मंझे हुए एक्टर से ऐसी उम्मीद न थी।
सब सही था,फोकस सही था, लाइटिंग सही थी, मेकअप ओके था, चेहरे पर गजब का कॉन्फिडेंस था, नज़रे कैमरा से 30° कोण बनाते हुए हल्का चिन-अप, एक हाथ जेब में , दूसरे से फाईल पकड़े आप सेंटर ऑफ द फ्रेम में थे....
पीछे दो लोग परफेक्ट V एंगल पर थे...
तीनों का दायां पैर आगे था, कदमताल करते हुए ये एक जहीन, पढ़े-लिखे, साउथ इंडियन हीरो की एंट्री का कहर सीन था,
पता नहीं साहब कैसे फाइल में कागज डालना भूल गए।
इस छोटी सी गलती ने फिल्म डुबो दी...🤣
पीड़ितों का बदनाम करना इनका पेशा है।
साहिल वाकोडे की संस्थागत हत्या के मामले में जब IIT बॉम्बे के छात्रों और दलितों ने न्याय की आवाज़ उठाई, तो मनुवादियों ने उसे फर्जी नकलची कहना शुरू कर दिया है।
ये जाहिल इतने नीचे गिर चुके हैं कि इन्हें इंसान मानना भी गलत होगा। ये लोग इतने नीच हैं कि हाथरस में दलित लड़की के साथ गैंगरेप एवं हत्या की घटना में पीड़िता का चरित्र हनन कर रहे थे। कठुआ में रेपिस्टों के समर्थन में तिरंगा यात्रा तो देखा ही होगा। ऐसे ही कुछ महीने पहले दिल्ली में रेपिस्ट कुलदीप सिंह सेंगर के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे।इन्हें न्याय, मानवता, समानता, शील.. किसी चीज से मतलब नहीं है। बलात्कारी अगर सवर्ण हो तो धर्म के जयकारे लगाते हुए उनके समर्थन में भी खड़े हो जाते हैं।
ऐसे में इन मनुरोगियों से नैतिकता एवं संवेदनशीलता की उम्मीद करना बेमानी है। यह लोग मनुष्यता के नाम पर कलंक हैं। जरा सोचिए, दलित समाज का एक छात्र, जो पिछले कई महीनों से डायरेक्टर और फैकल्टी मेंबर्स द्वारा जातीय उत्पीड़न का शिकार हो रहा था, अंततः हारकर आत्महत्या करने को मजबूर हो गया। ऐसे में मृतक साहिल वाकोडे को न्याय दिलाने की बजाय ये लोग उसका चरित्र हनन कर रहे हैं। धिक्कार है।
IIT-Bombay के बीटेक (एनर्जी साइंस) द्वितीय वर्ष के दलित छात्र साहिल वाकोड़े की असामयिक मृत्यु ने देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, सम्मान और संस्थागत जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
साहिल जी की आत्महत्या के अगले दिन कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी बयान में परीक्षा के दौरान उनके पास मोबाइल फोन मिलने की बात कही गई। लेकिन साहिल की मृत्यु के अगले दिन प्रशासन द्वारा यह बयान जारी किया जाना और पूरे मामले को मुख्य रूप से मोबाइल मिलने की घटना से जोड़ना कई गंभीर सवाल खड़े करता है और मामले को लेकर संदेह को और गहरा करता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि परीक्षा कक्ष में साहिल जी के आसपास अन्य परीक्षार्थी मौजूद थे, लेकिन अभी तक उनमें से किसी अन्य परीक्षार्थी द्वारा उनके पास मोबाइल फोन होने की बात कहे जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
वहीं, कॉलेज प्रशासन के नियमानुसार, यदि परीक्षा के दौरान किसी परीक्षार्थी के पास मोबाइल फोन या अन्य प्रतिबंधित सामग्री मिलती है, तो संबंधित सामग्री जब्त कर परीक्षार्थी को नई उत्तरपुस्तिका देकर परीक्षा पूरी कराई जाती है और आगे की कार्रवाई के लिए मामला कमेटी के सामने रखा जाता है।
साहिल के परिजनों और साथी छात्रों का कहना है कि उन्हें प्रोफेसर द्वारा परीक्षा कक्ष से बाहर ले जाकर धमकाया गया और एक वर्ष के लिए निलंबित करने की बात कही गई। परिवार ने उनके साथ पहले भी जातिगत भेदभाव और संस्थागत प्रताड़ना किए जाने की भी बात कही है।
18 सितंबर की शाम करीब 6 बजे साहिल ने आत्महत्या कर ली। इसके कुछ ही समय बाद @iitbombay के छात्र इस घटना से चिंतित होकर कैंपस में एकत्र हुए और कैंडल मार्च निकाला। इसके बाद से छात्र धरने पर बैठे हुए हैं। धरने पर बैठे छात्रों ने अपनी प्रमुख मांगों में IIT के निदेशक और डीन (छात्र मामले) के इस्तीफे, साहिल जी के परिवार को मुआवजा, IIT प्रशासन की सहमति से प्रोफेसर दुल्ला के खिलाफ FIR दर्ज करने, प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने और सभी छात्रों के साथ ओपन हाउस बैठक आयोजित करने की मांग रखी है।
हम @EduMinOfIndia से मांग करते हैं कि घटनाक्रम से जुड़े सभी CCTV फुटेज, परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाए। सभी संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएं और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो।
देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव, अपमान या किसी भी प्रकार की संस्थागत प्रताड़ना की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। छात्रों की शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस दुःख की घड़ी में हमारी गहरी संवेदनाएँ साहिल के शोकाकुल माता-पिता और पूरे परिवार के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दे।
#JusticeForSahilWakode