श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ! संपूर्ण विश्व में व्याप्त श्री कृष्ण जी के उपासकों पर घनश्याम जी की स्नेह कृपा-अनुकंपा बनी रही यही कामना है।
आज इस शुभ अवसर पर श्री कृष्ण जी के जन्म क्षेत्र के विकास के लिए हम ये ��ंकल्प दोहराते हैं कि जिस प्रकार हमने सपा सरकार में ब्रज क्षेत्र के विकास के लिए आधारभूत कार्य किये थे उसी को आगे बढ़ाते हुए हम अपनी आगामी सरकार में ‘मथुरा-वृंदावन-बरसाना-गोवर्द्धन’ के श्री क्षेत्र का इस तरह संतुलित विश्वस्तरीय चतुर्दिक विकास करेंगे कि यहाँ का धार्मिक-पौराणिक महत्व भी बना रहे और तीर्थयात्रियों और आध्यात्मिक पर्यटकों को अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर-सुविधाएं भी उपलब्ध ह��� सकें।
‘ब्रज’ के विकास का अर्थ ‘ब्रजवासियों’ की उपेक्षा नहीं होना चाहिए। हमारा मानना है कि ब्रजवासियों की सहमति-सहयोग से ही यहाँ का समुचित विकास संभव है। ब्रजवासियों के उत्थान-कल्याण में ही ब्रज क्षेत्र के विकास के सूत्र सन्निहित हैं।
इलाहाबाद छात्र आंदोलनों की राजधानी है। वहाँ भी जिस तरह भाजपा के ख़िलाफ़ जनाक्रोश उभरा है, वो कल का इतिहास रचेगा।
है इलाहाबाद के छात्रों के साथ, हमारी भी पुरज़ोर आवाज़!
प्रिय छात्रों और अभिभावकगण,
जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की युवाओं और उनके अभिभावकों की मुहिम में, हम सब पूरी तरह से आपके साथ हैं।
बदले की भावना में जल रही भाजपा सरकार जौहर यूनिवर्सिटी को अपनी संकीर्ण राजनीति का शिकार बनाने की कोशिश न करे। इस दुर्भावनापूर्ण पक्षपाती फ़ैसले के ख़िलाफ़, हमारे साथ हमारा छोटे-से-छोटा कार्यकर्ता, समर्थक, बड़े-से-बड़ा नेता और वो सब हज़ारों बच्चे व उनके मेहनतकश माता-पिता भी हैं जिनके सपने पर बुलडोज़र चलाने की निकृष्ट कोशिश भाजपा सरकार कर रही है।
हर विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर होता है, हम ‘शिक्षा के मंदिर’ को बचाने के लिए देश भर से अपील करते हैं कि वो हमारे साथ आएं। विश्वविद्यालय में हर समाज के बच्चे पढ़ते हैं, क्या भाजपा अब हर समाज के युवाओं के विरुध्द हो गई है। भाजपा का अहंकार ही ये सब गलत काम करा रहा है। अगर कहीं कुछ काग़ज़ी कमी है भी तो उसके काग़ज़ पूरे करके यूनिवर्सिटी को बचाया जाए और स्टूडेंट्��� के भविष्य को भी। यहाँ ग़रीबों के बच्चे पढ़ते हैं, जिनके पास इतना पैसा नहीं होता कि वो भाजपाइयों की तरह अपने बच्चों को महँगे विश्वविद्यालय या विदेशों में पढ़ा सकें। जिनके न परिवार हैं न बच्चे,वो परिवारवालों का दर्द क्या जानें। अगर भाजपा के मन में बच्चों, युवाओं, उनके परिवार-परिजनों व समाज के लिए रत्ती भर भी सहानुभूति होती तो वो ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी से भ��ी इस विध्वंसक कार्रवाई का तत्काल कोई विकल्प ढूँढती।
सच तो ये है कि भाजपा शिक्षा के ही विरुद्ध है क्योंकि शिक्षित लोग जागरूक और प्रगतिशील होते हैं , वो अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ भी उठाते हैं और सवाल भी, जो दक़ियानूसी सोचवाली दमनकारी भाजपा की सत्ता को जरा भी रास नहीं आता है। इसीलिए भाजपाई और उनके संगी-साथी, गाँव-गाँव में प्राथमिक विद्यालय तथा अन्य स्थानों पर विश्वविद्यालय तक बंद करवाने की भूमिगत योजना बनाते रहते हैं। भाजपाई जानते हैं कि पढ़-लिखकर लोग नौकरी-रोज़गार माँगेंगे, जो भाजपा सरकार देना ही नहीं चाहती है। नौकरी-भर्ती भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं। जब हमारे प्राइमरी स्कूल बंद किये गये तो हमारे सजग शुभचिंतकों ने ‘पीडीए पाठशाला’ खोलकर, भाजपाई साज़िश नाकाम कर दी थी, इसीलिए अब उनके निशाने पर यूनिवर्सिटी आ गई है।
जौहर यूनिवर्सिटी पर हो रहा ये हमला, हर समाज के विद्यार्थियों के विरुध्द भाजपाई संगी-साथियों की एक बेहद घिनौनी साज़िश है। उन अपंजीकृत लोगों के अपने सभी स्कूल-विद्यालय चल रहे हैं लेकिन दूसरों पर प्रतिशोध की भावना से एकतरफ़ा कार्रवाई का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
अति निंदनीय!
आपका
अखिलेश
NEET है या CHEAT है?
NEET REEXAM में घपलों की ख़बरें बढ़ती जा रही हैं लेकिन भाजपा सरकार में न किसी की ज़िम्मेदारी तय की जाती है, न किसी की जवाबदेही। इस्तीफ़ा देना या दिलवाना तो असंभ��� बात है।
अभ्यर्थी कह रहे हैं कि कड़वा सच ये है कि भाजपा के संगठन में भी सबसे ऊपर बैठे तथाकथित नैतिक लोग अपने किसी संगी-साथी मंत्री पर दबाव बनाकर इस्तीफ़ा लेने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अपने को फँसता देख, वो मंत्री जी कहीं बाक़ी सारे भाजपाई हिस्सेदारों के घपलों का दबा-छुपा राज़ न खोल दें। यही हाल भाजपा सरकार के हर मंत्रालय का है, इसीलिए भाजपा में इस्तीफ़े नहीं होते हैं।
���नता पूछ रही है कि ‘मुख़बिरी और लीक में कोई ऐतिहासिक संबंध होता है क्या?’
छुपे बैठे भ्रष्टाचार की काली कोठरी में
भाजपाई साझेदार हैं लूट की पोटली में
#NTA
#NEET
#NEET_REEXAM
पूरे देश में प��रदर्शनकारियों को हटाने से अच्छा है, भाजपा सरकार स्वयं ससम्मान हट जाए।
यदि भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों ने इतिहास पढ़ा होता या स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया होता तो वो जानते कि जन-शक्ति जब हर संभावना से निराश हो जाती है, तो वो ख़ुद एक ��क्ति बन जाती है।
भाजपा के राज में लोग जीते-जी अपनी चिता ख़ुद सजा के लेट गये, अब इससे ज़्यादा ‘अच्छे दिन’ भाजपा क्या लाएगी। भाजपा का समय पूरा हुआ।
भाजपा का अंतिम दौर शुरू होता है अब…
#चिता_आंदोलन
#केन_बेतवा_विरोध
इस शासनादेश के आधार पर भाजपा सरकार चाहे तो बदले की भावना छोड़कर जौहर यूनिवर्सिटी का नक़्शा भी आसानी से एक दिन में पास करा सकती है। भाजपा अपने लोगों के लिए इस शासनादेश को मानती है लेकिन किसी और के लिए इसे इस्तेमाल न करके हर समाज के छात्रों और उनके परिवारवालों के ख़िलाफ़ नाइंसाफ़ी कर रही है। इस जीओ के आधार पर ही भाजपा सरकार ने हज़ारों भवनों को नियमित करके, उन्हें वैध स्वरूप प्रदान किया है।
भाजपा बहाना न बनाए, शिक्षा के मंदिर को बचाए!
विद्वेष हारेगा, सौहार्द जीतेगा!
‘पक्षपात’ अन्याय का सबसे प्रत्यक्ष रूप होता है।