जबसे होश संभाला है मैंने... भारत में यही सुनता आया था कि...
"पा कि स्तान, आ तं क वादी भेजता है भारत में।"
भारत की पूर्ववर्ती सरकारें, पूरी दुनिया के हर मंच पर जा जाकर रोती थीं, कि पा कि स्तान को समझाओ कि रहम करे हम पर।
इस दो बित्ते के अनपढ़ गंवारों को, हमारे नेता लोग बेशरमों की भाँति हर साल डोजियर भेज भेज कर सबूत देते थे, और ये आज की दुनिया के घोषित भिखारी.. पा कि स्तान के ज़ाहिल ज़ोंबी नेता... हमारे भारत देश पर हँसते थे! हमारे भारत जैसे विशाल देश के प्रधानमंत्री मंदमोहन को, खुलेआम उन्हीं अंतरराष्ट्रीय मंचों से "झगड़ालू औरत" तक कह दिया जाता था।
मैं अपनी कच्ची उम्र में, गाँव गाँव और शहर के चौराहों पर यही सुनते-सुनते बड़ा हुआ कि रास्ते में पड़ी कोई चीज न छुओ, वह बम हो सकती है।
सौ करोड़ से ऊपर के वे लोग, जो आज बाहुबली बने हुए हैं, सोशल मीडिया पर किसी को भी गाली बक दे रहे हैं... वे लोग भी उस समय भयभीत चूहों की तरह डर डर कर जीते थे। रोज, जब तक परिवार के सभी लोग घर न पहुंच जाते थे शाम तक, सबकी धुकधुकी लगी रहती थी कि कब न जाने कौन सी बस, ट्रेन, चौराहे पर ब म फट गया हो! हमारे परिवारों में जिनके बच्चे आर्मी आदि में होते थे, उनकी कसमसाहट सुन-सुन कर, हृदय भीतर से फट जाता था!
हजारों नहीं, बल्कि लाखों की संख्या में हमारे योग्य लड़के कायराना पा कि स्ता नी हमलों में जान गँवा रहे थे, और मरते मरते भी उन जियालों की केवल एक ही तड़प, गूँजती रह जाती थी मेरे मस्तिष्क में कि... "काश! हमारी सरकार हमारे हाथ खोल देती... तो मरने में भी कोई दुःख नहीं होता... कम से कम दस बीस जाहिल सू-वरों को साथ तो लेकर मरते!"
तब हम सोचते थे, कुढ़ते थे... भगवान से प्रार्थना करते रहते थे कि काश! भारत में कोई तो ऐसी सरकार बने, जो हमारे सैनिकों के हाथ बाँधकर बॉर्डर पर खड़ा नहीं करती! काश ऐसा हो जाता, कि हम इन जाहिल बदबूदार जानवरों को इतना मार पाते, कि ये डेढ़ टांग पर कूदना भूल जाते!
उस समय हमें जाति याद नहीं आती थी...
उस समय हमें "नैतिकता और मर्यादा" आदि का पाठ याद नहीं आता था। कुछ याद आता था, तो बस सेना की गाड़ियों में लदे, शहर-शहर और दूर दराज के गाँव-गाँव तक पहुंचते हमारे वीर बलिदानी भाइयों के शव!
मेरे, और समीप के लगभग सभी गाँव में, सबसे ज्यादा सरकारी नौकरी वाले "सेना" में ही होते थे। मुझे उन सहमे परिवारों की भयभीत निगाहें आज भी याद आती हैं, जो डर के मारे न्यूज पेपर आदि नहीं पढ़ते थे, कि कब युद्ध आरम्भ होने की खबर छप जाए!
और आज... एक ऐसी मजबूत सरकार है, जिसने उपरोक्त सब असंभव से कार्य को, आज सम्भव कर दिया है।
..कश्मीर से अप्रिय सूचना 1 प्रतिशत से भी कम हो गई है!
.. एक दशक से ऊपर हो गया, और मैंने इस बीच पूरा भारत सैकड़ों बार भ्रमण किया है, एक एक शहर में एक एक हफ्ते से ज्यादा समय तक भी रुकता आया हूं... लेकिन कहीं एक सिंगल लाउडस्पीकर नहीं मिला, जो यह कहता हो कि सम्भल कर चलो, लावारिस वस्तु में विस्फोटक हो सकता है।
और... हम आज इस सरकार को भी गालियाँ बक रहे हैं। इतना ही नहीं, हम घुमा फिरा कर... दो दो कौड़ी का तर्क पे ल कर, उन्हीं नेताओं का समर्थन करने में लग पड़े हैं, जो उपरोक्त सभी प्रकार की आ तं की घटनाओं के आरोपी हैं, या उनके समर्थक हैं।
यूँ ही नहीं, मेरा मन यहाँ अब कुछ लिखना नहीं चाहता है! अब तो 99% लोग यहाँ नीच, अवसरवादी, देशद्रोही नेताओं के समर्थक ही नहीं हैं, बल्कि स्वयं भी वैसे ही हो चुके हैं।
खैर, जिसने स्वयं ही मानसिक कोढ़ी होकर ही जीना चुनना है, उनको कितना ही समझाया जा सकता है। लेकिन मेरे वोट की पूरी कीमत मुझे मिल रही है, मैं पूर्णतया संतुष्ट हूं, ऐसी खबरों से अब....
कि, भारत, पा कि स्ता न में हमले करवा रहा है।
कि, भारत ने पानी रोक कर इन जाहिलों को तड़प तड़प कर रोने को मजबूर कर दिया है।
मुझे तो बहुत सुकून मिल रहा है अब, जब पा कि स्ता नियों को हर रोज, हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर, फेसबुक ट्विटर आदि हर जगह, इस प्रकार यूँ कलप कलप कर रोते देख रहा हूं।
प्रदीप शुक्ला की कलम से …
What a bunch of liars. No shame over blatant public land grab by illegal mosque/dargah committees but protesting over their lawful demolitions?
What's the point of doing this drama on streets when the committees repeatedly fail to prove land ownership in courts?
Land grabbing has been validated by courts in more than 500 such structures researched by @BhaiPreetSingh alone. These encroachments have consumed land meant for public parks, public toilets, govt hospitals, govt schools, footpaths and so on
If only the community members were open-minded enough to see through the drama and lies, and join our movement to free public land for public use
IIT Bombay में Professors बनने में Reservation नहीं है, इसलिए Dalit अधिक हैं, ये तर्क ही गलत आंकड़ों पर खड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट के Indira Sawhney Judgment में भी Professor, Defence, Scientist, Pilot जैसे महत्वपूर्ण पदों को Reservation से बाहर रखने की बात स्पष्ट है। फिर मोदी सरकार ने IIT और IIM में Reservation Roster लागू करने को कहा।
ब्राह्मण सांसद लोकसभा में 80% हैं?
ब्राह्मण सांसद राज्यसभा में 96% हैं?
छत्तीसगढ़ का यह शिक्षक खुलेआम-सरेआम ब्राह्मणों के खिलाफ झूठा नफरत फैला रहा है। झुलेकर कोचिंग राजनांदगाँव के इस टीचर के वीडियो को अब तक 23 लाख लोग देख चुके हैं।
इसका ये झूठ ना तो अभी तक हटवाया गया है ना ही इस पर कोई कार्रवाई की गई है। जबकि ये पूरे आंकड़े झूठे हैं। लोकसभा में 60-70% SC/ST/OBC/माइनॉरिटी हैं।
Hello Everyone,
We are trying to collect materials from our school & university textbooks which are promoting Anti-Hindu, Anti-brahmin or Anti-GC content.
Please share such materials (textbooks, reference books, reference essays/articles, recommended reading materials) from following subjects-
-Gender studies
-Sociology/Social sciences
-History
-Political science
-Literature (Hindi/English)
-Philosophy
-Psychology
Material can be from
1. UPSC study syllabus
2. UG/PG courses
3. Primary/Secondary education
Please reply under this post with link, share in DM, or tag us.
Thanks.
हाथों में ॐ का भगवा झंडा लिए ये कोई RSS या हिंदू सम्मेलन की रैली नहीं है बल्कि राजस्थान में असली आदिवासी भील समाज की आरक्षण वर्गीकरण के समर्थन में रैली है।
आरक्षण वर्गीकरण और क्रीमीलेयर जैसे रिफॉर्म को लेकर वंचित वर्ग ने बिगुल फूंक दिया है।
Data based periodic review & sunset clause of reservation is a must!
Infact, we have enough data to debunk all the fake narratives being spread so far.
We are still working on the reports & will release all data soon.
That's the beauty of data.
-People lie, data doesn't!!
@JaipurDialogues पर अचानक हमला क्यों ?
क्या योगी आदित्यनाथ जी महाराज को चुनाव हराकर साबित किया जाएगा कौन सामान्य वर्ग का हितैषी है ?
या सामान्य वर्ग की समस्याओं को अपने प्लेटफॉर्म्स पर हम बात करके विमर्श पैदा कर सकते है ?
मातंग, भंगी, भुइयाँ, मुसहर, डोम, बाल्मीकि जैसी जातियाँ अपने ही जाति समूह में आरक्षण से वंचित हैं क्योंकि इन समूहों के डोमिनेंट कास्ट उनका आरक्षण खा जाते हैं।
‘जितनी आबादी उतना हक’ सबसे पहले तो SC/ST/OBC में होना चाहिए। सवर्ण तो 30-32% हैं, मुसलमान 15%, अन्य अल्पसंख्यक 3% हैं।
पूरे NCERT से लग रहा है कि हिंदू शब्द को push out किया जा रहा है। अगर कोई decision लिया भी जा रहा है तो वो बस ब्राह्मणों और ब्राह्मणवाद को निशाना बनाया जा गया है। हर चीज में एक जाति को push किया गया है।
अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और ऐसे लोगों का, उनके विचारों का सबसे बड़ा शत्रु था, ब्राह्मण था। उसी संदर्भ में मोदी सरकार और पुस्तकें लिखने और अपडेट करने वाली समिति का vision NCERT पुस्तकों में आसानी से दिख जाएगा।
इसलिए जब मैं कहता हूँ कि भाजपा ने केवल ध्यान नहीं "नहीं" दिया, समझ रहे हैं? बल्कि इन्होंने purposefully शिक्षा व्यवस्था की डैश मार ली है। कायदे से मारी है, मार के चबूतरा बना दिया है।
People who say Yogi should be taught a lesson and no one from the Hindutva Ideology should vote for him
These people have forgotten the SP Gundaraj
Not Voting for Yogi means you indirectly want the Opposition to come to Power
When the Opposition comes to power, the Gundaraj will either shoot you or you’ll be in Jail
So be careful what you wish for!
UGC, Reservation, SC/ST can be tackled while BJP is in power, if they are not, the opposition will tackle you first!
Some people are saying that the posionous content against Hinduism & GCs were from old NCERT text books and they have changed everything.
Now let's see what NIOS board is teaching the students.
NIOS comes directly under Central Government of India.
Following extract is from page 41 of the NIOS Gender Studies text book, which is currently followed.
It says:
"Vedic texts like Smritis, Dharmasastras and Puranas subjugated women."
It agrees with Rahul Gandhi on Manusmriti.
It says that "women were considered impure in Hinduism."
& All these are taught to our school children.
So what Rahul Gandhi is saying in meetings, Central government is teaching the same to the Hindu students year after year.
2.65 लाख डॉक्टरों में से आधे न्यूनतम अंक (36%) नहीं ला सके। GC/EWS का कटऑफ 262 रहा। 256 को शून्य, अंतिम रैंक में इम्प्रूवमेंट रही। अब अंतिम रैंक पाने वाला -40 की जगह -19 पर आ चुका है। @narendramodi को नमन कीजिए क्योंकि उन्हीं की कृपा से यह सब संभव हो पा रहा है। दलीत-पीड़ीत डॉक्टर बन रहा है।
सामान्य वर्ग का साथ देने का मतलब BJP को हराना क्यों है ?
समाजवादी पार्टी सत्ता में लेकर सामान्य वर्ग के साथ कौन सा न्याय करेगी ? उसके नेता तो बोल रहे है सामान्य वर्ग को गायब करवा देंगे ?
Text from Class 12 History Textbook (NCERT):
"Drona, a Brahmana, demanded Eklavya's (Nishad, a hunting community boy) thumb"
Qs:
-What do you think this story conveys to Nishads? To Kshatriya?
-Was Drona, as a brahmana, following Dharmashastra?
"Brahminical texts described Mauryas as low origin.
Buddhist texts described them as Kshatriya."
Clearly brahmins are being targeted, Buddhist text is being glorified, hindu texts are refered as "brahminical texts"!
And this is latest 2026-27 print.
Available on NCERT website.
मैं ब्रह्म-विष्णु- महेश को ईश्वर नहीं मानूंगा और ना ही उनकी पूजा करूँगा, मैं राम और कृष्ण को ईश्वर नहीं मानूंगा ना ही उनकी कभी पूजा करूँगा….
राजेंद्र पाल गौतम का 2024 में ये वीडियो वायरल हुआ था। जिसके बाद आम आदमी पार्टी ने पहले उन्हें मंत्री पद से हटाया फिर पार्टी से हट गए।
मुझे नहीं पता कांग्रेस की ऐसी क्या मजबूरी थी जो UP जैसे राज्य में उन्हें प्रभारी बनाया…. सपा का कांग्रेस से गठबंधन हुआ तो ये वीडियो फिर BJP वाले घर-घर पहुँचाएँगे।
सपा-कांग्रेस गठबंधन दुविधा में।