शायरांश
दिनांक :- 22/08/2024
दिन :- गुरुवार
विषय :- #तबाह ,, #तबाही
आप कोई भी हिंदी शायरी, कविता, नज़्म, गीत, ग़ज़ल लिख सकते हैं
हैशटैग 👉 #शायरांश अवश्य लगाएँ
समय :- रात 08:00 बजे तक
धन्यवाद 🙏
#भूली_बिसरी यादों का पिट���रा खुल गया
जमी हुई यादों पे कोई गुल रख गया ..
वो गुलाब का फूल मोर का मयूरपंख
डारियों बीच ,पन्नो पे उकेरे तस्वीर याद आ गया ...
सौम्य कोमल सी, हया के दुपट्टे में लिपटी ख्वाब
यादों के दरखत पे , यादों का सैलाब उमड़ गया ..
#शायरांश #बज्म
उन भूली बिसरी यादों में,
अब लौट के वापस चलते हैं ।
सृजन और विध्वंस जहां,
नन्हीं आंखों में पलते हैं ।।
हम उस बचपन को याद करें,
स्वच्छंद खुशी जब मिलती थी���
माता पिता की छाया में,
जीवन कलिका नित खिलती थी।।
#शायरांश
कुछ यादें हैं #भूली_बिसरी
जो एक हवा के झोंके से तरोताजा हो जाती हैं,
लाख कोशिश��ं करके भी
वो भूलाए ना भूल पाती है,
हर #ढलती_सांझ के साथ
सोचती हूं वो यादें भी ढल जाएगी,
पर कुछ बातें हैं भूली बिसरी
जो हर शाम जहन को याद आ ही जाती है !!
🥀❤️🤞
#AISH
#बज़्म
#शायरांश
छिपे हैं अपनों में हीं
पापी व्यभचारी सब
यहाँ सभ्य वेष बनाय ।
अंधी अदालत इहाँ
बहरा प्रशासन है
भीरु है सकल समाज ।
बाबूजी ने हिम्मत जो
बेटी तुम में देखी थी
चिता में रहें हैं जलाय।
- उदय प्रकाश
#छोटादरवाज़ा #शायरांश#सरस#बज़्म#कविता#साहित्य#विचार
दौर कई आए गए पर
इश्क के चर्चे रुके नहीं
नाकामिल हुए बहुत मगर
आजाद हौसले झुके नहीं।
फेहरिस्त बहुत है लंबी पर
सबकी यहां बिसात रही
जब इश्क़ जुड़ा हो रब से
कोई मिटा सके औकात नहीं ।
अजय झा *चन्द्रम् *✨✨
@Shayarns#शायरांश
तुम शब्दों का हेरफेर मत देखो
तुम इश्क़ में हूई देर मत देखो
लोग बड़े ही कमबख्त है यहां
इतना बड़ा ये शहर मत देखो
दिल लगाना है तो मुझसे लगालो
यहां ��न दिलों का ढेर मत देखो
अमरजीत धीमान
#shayri #बज़्म
#शायरांश
@Parikalita_ @letusssstaycalm @BazmKavyamanch
#कश्मकश क्या है ?
जब चाह कर भी जो हम कह नही पाते
��िना कहे भी ��ह नही पाते
एहसासो को जब हम दबाते है लफ्ज़ो मे कह नही पाते
आंसुओ को अपने भीतर बहाते जाते
इसी उधेडबुन मे रिश्तो को खोते चले जाते
फ़िर जुदाई की आग मे तपते चले जाते
@ताजा✍
#अपनी मौज़ का मुसाफ़िर
#बज्म #शायरांश
कल्पनातीत हो चला प्रकृतिनस्थ हो पाना
कृत्रिमता के आवरण में डूबी मानवता का
अब किंवदती सी हैं #भूली_बिसरी यादें
जिन्हें हम मनुष्यता कह गर्वित होते होंगे
अपितु किंचित शेष है अवसान हमारा
तो क्यों न संजो लें मर्म ये पीढ़ियों के लिए
@गार्गी
#शायरांश#बज़्म#शब्दनिधि
#भूली_बिसरी यादों का
एक कोष बनाया...
तेरी मीठी यादों से
बड़े सलीके से उसे सजाया...
ये यादें...
तेरे होने का अहसास कराती है
तनहाई में महफिल का
और
बेचैनी में सुकून का आभास कराती है।
#रिचा#बज्म#शायरांश#HPEDK