संत के बताए हुए रास्ते पर चलना या न चलना मनुष्य तय कर सकता है लेकिन मनुष्य को नियम और कानून से अनिवार्य रूप से चलना संविधान तय करता है इसलिए संविधान ऊपर है।
जो लोग बागेश्वर वाले ढोंगी पाखण्डी धीरेंद्र शास्त्री का समर्थन कर रहे हैं उनके लिए कोई नया नही है ये ,पहले भी वे लोग रामरहीम ,आ��ाराम और रामपाल ज���से दिव्य ,चमत्कारी बाबाओं का समर्थन कर चुके हैं
देश में इन जैसे हज़ारों कथा वाचक हैं, कोई ज्यादा लोकप्रिय है तो कोई कम लोकप���रिय है
इन सभी का बोलने का, गाने का अंदाज़ एक दूसरे से भिन्न है लेकिन दोबातेंसभीकथावाचकों में समान है !
पहला 99% कथावाचक एक जातिविशेष से आते हैं और दूसरा वर्ण व्यवस्था और जातीय व्यवस्था के प्रबल समर्थक है