इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने ���ो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिच���लिए पंडित और नेता,उसी प्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने ���ो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिच���लिए पंडित और नेता,उसी प्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने ���ो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिच���लिए पंडित और नेता,उसी प्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने ���ो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिच���लिए पंडित और नेता,उसी प्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने ���ो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिच���लिए पंडित और नेता,उसी प्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने ���ो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिच���लिए पंडित और नेता,उसी प्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने ���ो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिच���लिए पंडित और नेता,उसी प्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने ���ो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिच���लिए पंडित और नेता,उसी प्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने ���ो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिच���लिए पंडित और नेता,उसी प्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने ���ो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिच���लिए पंडित और नेता,उसी प्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने ���ो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिच���लिए पंडित और नेता,उसी प्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने ���ो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिच���लिए पंडित और नेता,उसी प्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
मंदिर में चोरी करने वाले को कभी ईश्वर का डर नहीं होता,उसे पाप से डर नहीं लगता....लेकिन आम जनता का विश्वास देखिए उन्होंने चोरों को ही चौकीदार समझ अपने इष्ट देवों को चोरों के हवाले कर दिया।
जो राम को लाए थे,वो अब सिर्फ दाम कमाए जा रहे है,उन चोरों को न राम से मतलब है न आम से।
इस सनातनी देश में अगर आम चोर या जेबकतरा पकड़ा जाए,तो जनता उसको पेल पेल कर अधमरा कर देती है,लेकिन वही चोर जब लंबी तिलक लगा कर धर्म के नाम पर मंदिर के तिजोरी और दानपात्र साफ कर दे,तो जनता श्रद्धा से नेता जी का जयकारा लगाती है।
इन अनपढ़ नेताओं को अच्छे से मालूम है,कि भूखी जनता के मुंह से रोटी कैसे छीननी है,बस उन्हें मुसलमानों का डर दिखाओ,नकली विकास और फर्जी राष्ट्रवाद के जुमले बेचो,जनता भी त्रस्त रहे,ताकि नेताजी मस्त रहे,और बात न बने तो हर आपदा में अवसर ढूंढने वाले नेता जी चंदा का कटोरा ले कर बाजार में आ ही जाते है।
गरीब अपनी टपकती छत के नीचे बैठ कर जिस भगवान से प्रार्थना करता है,दलाल बिचौलिए पंडित और नेता,उसी ��्रार्थना को धंधा में बदलकर अपने बड़े बड़े बंगले संगमरमर से बनाए है।
धरती पर स्वर्ग है, तो वो अपना गांव ही है।
गांव अब वीरान हो रहे है, लोग शहर की ओर भाग रहे है।
पलायन एक गंभीर समस्या है,लेकिन हर पार्टी युवाओं को सिर्फ झांसा देती है।
हकीकत में गांव में युवा बेरोजगार है,उसके सामने उसके अपने सपने टूट रहे है... अपनो का साथ छूट रहा है।
मोदी एक महान अभिनेता है,उ���की एक्टिंग देख कर हर नर नाग,किन्नर,देव दानव मानव, सब सम्मोहित हो जाते है, इसमें कौन शक करेगा ?
लेकिन पर्ची से पढ़ने वाले एक्ट में उन्होंने कुछ ज्यादा ही ओवर एक्टिंग....मतलब कि मस्त एक्टिंग कर दिया,दस बार हिज एक्सीलेंसी बोल कर ट्रंपवा को दीवाना बना दिया है।
मोदी जी रत्ति भर में अभिमानी होने का स्वांग नहीं करते है....तभी पीछे से डायरेक्टर की आवाज आई, "कट कट,चल ने तेरा कौवा कभी मोर नहीं बनेगा"
जारी है.....
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