खुद में ही उलझा हुआ,
खुद से ही अनजान हूँ मैं ।
ग़लतफ़हमी है लोगों की ,
बहुत समझदार हूँ मैं ।
मंजिल का अता पता नहीं ,
रास्तों से भटका हुआ हूँ मैं ।
बहुत सोचते है लोग मेरे बारे में ,
मगर सबकी सोच से बाहर हूँ मैं ।
चार दिवारों से है दोस्ती,
फ़िलहाल तो अकेला हूँ मैं । ✨💕❤️