#India is redefining itself as an immersive #travel experience amid rising demand for spiritual tourism. Watch Hon'ble Minister of Culture & #Tourism, Shri Gajendra Singh Shekhawat, talk about Indian tourism's transformational story on Times Now.
@TimesNow@gssjodhpur
तुम्हारी सरकार में गुंडाराज, भ्रष्टाचार, रंगदारी, डकैती, चोरी, महिलाओं के खिलाफ अपराध चरम पर थे, उत्तर प्रदेश लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था था, इसी नोएडा में शाम होते ही लोग घरों में दु���क जाते थे और अनेक सेक्टर्स ऐसे हैं जहां सड़क तक नहीं थी, चारों तरफ अव्यवस्था का माहौल था, व्यापारी नोएडा से पलायन कर रहे थे और आज नोएडा देश में ही नहीं अपितु विश्व के निवेशकों को भी आकर्षित कर रहा है, आज नोएडा में बने हुए मोबाइल फोन सहित अनेक उत्पाद विश्व के अनेक देशों में बेचे जा रहे हैं, नोएडा को जिस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से सपा सरकार ने दूर रखा था आज नोएडा वासियों का वह सपना भी साकार हुआ है, नोएडा विश्व के व्यापारियों की पसंदीदा जगह बनता जा रहा है।
और रही बात गांवों की तो कुछ गांवों में नए सामुदायिक भवनों के निर्माण से ले करके नई पानी एवं सीवर की निकासी की लाइन डालने का कार्य हो रहा है और कुछ में शुरू हो रहा है और जितना कार्य पिछले 9 वर्षों में हुआ है उतना पहले कभी नहीं हुआ। आगे भी जो भी समस्याएं आएंगी उनका समाधान सभी के साथ समन्वय से होगा।
उत्तर प्रदेश की जनता सपा के माफियाराज और #���ाल_टोपी_काले_कारनामे वालों को भूली नहीं है और अब कभी भी उनको प्रदेश की बागडोर नहीं सौंपेगी।
सपा 27 में सफाचट होगी।।
Wrong to think #FlipkartBLACK was just another membership. Early Access on 8th May, double SuperCoin savings, 15% bank offer — this is premium shopping redefined! #SASALELEFlipkart#Flipkart
https://t.co/emiqaf8HZy
ओमप्रकाश राजभर जी ने जिस स्पष्टता से @yadavakhilesh को आईना दिखाया है, वह बताता है कि अब बहुजन समाज भावनात्मक नारों से नहीं, ठोस सच्चाई से प्रभावित होता है।
जब आपकी सरकार थी तब भी गरीब यादव और बाकी वंचित वर्ग वहीं क�� वहीं रहे
तो फिर यह ‘समाजवाद’ आखिर किसके लिए था?
इतिहास की आड़ लेकर बहुजन समाज को भ्रमित करना अब संभव नहीं है, क्योंकि जनता समझ चुकी है कि असली लड़ाई अधिकार, सम्मान और समान भागीदारी की है
न कि किसी एक परिवार के राजनीतिक वर्चस्व की।
अखिलेश यादव को यह स्वीकार करना होगा कि बहुजन समाज का इतिहास किसी एक जाति या परिवार तक सीमित नहीं है।
महाराजा सुहेलदेव राजभर से लेकर डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम तक
इन महान विभूतियों ने संघर्ष और बलिदान से समाज को दिशा दी है। लेकिन आज भी जब दो-दो हजार बीघा जमीन वाले लोग खुद को ‘वंचित’ बताकर राजनीति करते हैं, तो यह बहुजन समाज का अपमान है।
अब यह समाज जाग चुका है, और वह पहचान चुका है कि कौन उसके नाम पर सत्ता चाहता है और कौन वास्तव में उसके हक के लिए खड़ा है।
महाराजा सुहेलदेव राजभर, अवंती बाई लोधी, भगवान बिरसा मुंडा, झलकारी बाई, ऊदा देवी, डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम
ये वो नाम हैं जिन्होंने बहुजन समाज को दिशा दी।
इनकी तुलना किसी राजनीतिक परिवार से करना ही इनके बलिदान ��ा अपमान है।
ओमप्रकाश राजभर जी ने सही सवाल उठाया है
क्या अखिलेश यादव जी अपने इतिहास के 10 असली क्रांतिकारियों के नाम बिना विवाद के गिना सकते हैं?
या फिर वही नाम आएंगे जो गलत कारणों से चर्चित रहे?
ओमप्रकाश राजभर जी ने जो कहा है, वो सीधा सच है
और सच हमेशा कड़वा होता है।
अखिलेश यादव को यह समझना होगा कि सत्ता में रहते हुए भी अगर गरीब यादवों की हालत नहीं बदली, तो फिर उनकी राजनीति सिर्फ नारों तक ही सीमित रही है।
अखिलेश, समाज के नाम पर राजनीति करने वालों को अपने ही कार्यकाल का हिसाब देना होगा। ओमप्रकाश राजभर ने जो मुद्दा उठाया है, वह सिर्फ बयान नहीं—जमीनी अनुभव का निचोड़ है, जिसे अब अनदेखा नहीं किया जा सकता।
अखिलेश, ओमप्रकाश राजभर का बयान यूं ही नहीं आया। यह लंबे समय से दबे असंतोष की आवाज है। इतिहास को अपने हिसाब से पेश करने से सच्चाई नहीं बदलती—बहुजन चेतना किसी एक समाज तक सीमित नहीं है, और अब हर वर्ग अपना हक खुलकर मांग रहा है।
अखिलेश, समाज के नाम पर राजनीति करने वालों को अपने ही कार्यकाल का हिसाब देना होगा। ओमप्रकाश राजभर ने जो मुद्दा उठाया है, वह सिर्फ बयान नहीं—जमीनी अनुभव का निचोड़ है, जिसे अब अनदेखा नहीं किया जा सकता।
अखिलेश, प्रतिनिधित्व सिर्फ नाम लेने से नहीं होता। राजभर ने साफ कहा—जमीनी बदलाव जरूरी है। आपके शासन में भी गरीब वहीं रहा, और आज वही वर्ग पूछ रहा है कि आखिर हिस्सेदारी कब मिलेगी?
कालनेमि, गोहत्या पर यूपी को घेरने वाले, ममता के बंगाल में सबसे ज्यादा गोहत्या पर चुप क्यों? अपने गिरगिट नेता लाल टोपी वाले से क्यों नहीं कहते कि ममता बानो के राज में गो-कटाई बंद करवा��ं? बटुकों के साथ हो रहे दुराचार पर दोनों पूरी तरह चुप क्यों?
गोहत्या पर व्याख्यान देने वाले कालनेमि, बंगाल क्यों नहीं जाते? जहां ममता राज में सबसे ज्यादा गोतस्करी और गोहत्या होती है। अपने नेता लाल टोपी वाले गिरगिट से क्यों नहीं कहते कि ममता से गोहत्या बंद करवाएं, बटुकों के साथ हुए घिनौने दुराचार पर दोनों की चुप्पी क्यों? सिलेक्टिव गुस्सा अब बहुत हो गया।
गोहत्या का ड्रामा करने वाले कालनेमि, बंगाल जाकर हकीकत देख लो। सबसे ज्यादा गोतस्करी और गोहत्या ममता के राज में होती है। लाल टोपी वाले गिरगिट से कहो कि ममता को गोहत्या रुकवाने को कहें। बटुकों पर ह��� रहे दुराचार पर तुम दोनों हमेशा चुप्पी साध लेते हो। जिससे लगता है कि दाल में कुछ काला जरूर है।
अरे ओ कालनेमि, गोहत्या की बात करने वाले बंगाल जाकर देखो, जहां रोज गाय���ं का कत्लेआम होता है। अपने लाल टोपी वाले गिरगिट नेता से पूछो कि ममता से गोहत्या बंद करवाने की हिम्मत है या नहीं। बटुकों के साथ दुराचार पर तुम दोनों की जबान क्यों बंद रहती है?
कालनेमि बाबा, गोहत्या पर चिल्लाओ तो यूपी में, लेकिन बंगाल में सबसे ज्यादा गायें कट रही। अपने लाल टोपी वाले गिरगिट नेता को बोलो, ममता बानो से गोहत्या बंद कराए। बटुकों के साथ हुए दुराचार पर दोनों की खामोशी बताती है कि तुम्हारी नैतिकता सिर्फ दिखावा है।
यूपी में हल्ला करने वाले कालनेमि बंगाल में गोहत्या और तस्करी पर कुछ नहीं बोलता है, मुंह में दही जम जाता है, लाल टोप��� वाले गिरगिट से ममता तक खबर क्यों नहीं पहुंचाते कि गोहत्या और तस्करी बंद करवाए, बटुकों पर अत्याचार का मुद्दा उठाने की हिम्मत दोनों में क्यों नहीं?