जब भी कोई Jee , neet या upsc जैसे कोई भी exam का रिजल्ट आता है ,
तो social मीडिया पर बहुत सारे लोग merit पर ज्ञान देने आ जाते है ।।
उन सब से मेरा बस इतना सा सवाल ये देश के दो स्कूल की तस्वीर है ,
क्या वो बच्चा 👦 जो गाँव के सरकारी स्कूल से पढ़ा हो और एक वो
जो देश के सबसे बेहतरीन स्कूल से पढ़ा हो जब भी कोई एग्जाम देंगे तो
दोनों बराबर होंगे , क्या दोनों का मूल्यांकन का आधार एक ही होना चाहिए ।।
थ्रेड 6
🔸 प्याज की राजनीति का अनोखा किस्सा
एक बार प्याज की कीमतें बहुत बढ़ गईं थीं। एक पत्रकार ने उनसे पूछा:
“क्या सरकार गिर जाएगी प्याज से?”
चरण सिंह ने हँसते हुए कहा:
“जिस देश में किसान की चीज़ इतनी ताक़तवर हो जाए कि सरकार गिरा दे, वहाँ की राजनीति में अब भी दम है!”
थ्रेड 5
🔸 अंग्रेजी से दूरी, हिंदी का समर्थन
चरण सिंह ने कभी अंग्रेज़ी में भाषण देना पसंद नहीं किया। एक बार संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बने तो उन्होंने सिर्फ हिंदी में बात की।
उनका मानना था:
“भारत का नेता अपनी मातृभाषा में ही प्रभावशाली हो सकता है, उधार की ज़बान से नहीं।”
चौधरी चरण सिंह के जीवन से जुड़े कुछ मजेदार, दिलचस्प और प्रसिद्ध किस्से भी हैं जो उनके व्यक्तित्व और राजनीतिक शैली को दर्शाते हैं। नीचे ऐसे ही कुछ रोचक घटनाओं को बिंदुवार प्रस्तुत किया गया है:
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थ्रेड 1
🔸इंदिरा गांधी से दो टूक अंदाज़
चौधरी चरण सिंह साफ़गोई के लिए जाने जाते थे। जब वे इंदिरा गांधी की सरकार में मंत्री थे, तब उन्होंने एक बार उनके नीतियों की आलोचना कर दी।
इंदिरा गांधी ने उनसे कहा:
“आप मेरे अधीन काम कर रहे हैं!”
इस पर चरण सिंह ने तुरंत जवाब दिया:
“मैं संविधान के अधीन काम कर रहा हूँ, किसी व्यक्ति विशेष के नहीं।”
यह जवाब उस दौर में बहुत चर्चित हुआ और उनकी स्वतंत्र सोच की मिसाल बन गया।
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पूरी जानकारी अगले थ्रेड में जरूर पढ़े ।।
थ्रेड २
ये इकलौता मौक़ा नहीं था जब विराट कोहली ने किसी भारतीय 🇮🇳खिलाड़ी को नीचा दिखाया हो ये पूरे आईपीएल में देखा गया है ।।
मुंबई इंडियंस के ख़िलाफ़ मैच जीतने के बाद ड्रेसिंग रूम में बैठे हार्दिक और रोहित के तरफ़ इशारा कर aggressive सेलिब्रेशन करना हो या ,
पंजाब के ख़िलाफ़ league मैच जीत कर Shreyas Iyer के तरफ़ घिनौना इशारा करना हो ।।
कोई भी इंडियन प्लेयर आउट हो तो जाके उसको कुछ उल्टा सीधा बोलना हो ,
या कोई इंडियन बॉलर अच्छी bowling कर दे तो उसको आँख दिखाना हो ।।
ये मैंने बाक़ी किसी बड़े भारतीय खिलाड़ी के ओर से अभी तक एनएचआई देखा है , खैर भगवान इसका हिसाब हर साल ipl फाइनल में कर देते है ।
उम्मीद 🤞 है भगवान इस बार भी किसी के घमंड को चूर चूर कर देंगे ।।
X पर ज़बरदस्ती 😫 एक ट्रेंड चलाया जा रहा है , #BiharThanksModiji
पर इसकी क्या सच्चाई है , हर एक बिहारी को पता है ।।
बिहार की राजधानी पटना को छोड दे तो कोई भी एक city तक नहीं है बिहार में स्मार्ट city तो बहुत दूर की बात है ।।
अगर बिहार में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ढूँढने जाओगे तो खाली हाथ ही लौटोगे ।। ☹️
इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद ना पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा ना अभी तक मेट्रो 🚇 स्टार्ट हुआ है ।।
बिहार में आज तक कोई एक इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम 🏟️ नहीं बन पाया ।
सचाई यही है कि बिहरियों को मोदी जी सिर्फ वोट बैंक और गुजरात में लेबर बनाने के लायक़ ही समझते है ।।
वैसे ही यहाँ के सब नालायक नेता लोग मोदी भक्ति में डूबे रहेंगे, चाहे वो बीजेपी के हो या सहयोगी दल के ।।
एक समय हुआ करता था, जब यूपी,बिहार ,झारखंड ये सब एक समान हुआ करते थे , मगर आज यूपी बिहार से बहुत आगे चला गया और जब तक यहाँ के लोग और नेता नहीं सुधरेंगे मुझे डर है कहीं बिहार देश के सबसे बर्बाद परदेश में ना आ जाए ।।
यहाँ चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक यात्रा के प्रमुख बिंदु दिए गए हैं:
•🔹 जन्म: चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर गाँव में हुआ था।
•🔹 शिक्षा: उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और वकालत शुरू की।
•🔹 राजनीति में प्रवेश: 1937 में उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य चुने गए।
•🔹 कांग्रेस के नेता: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कांग्रेस पार्टी के सक्रिय सदस्य रहे और कई बार जेल गए।
•🔹 भूमि सुधार के पक्षधर: उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार कानूनों को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेषकर ‘जमींदारी उन्मूलन’ कानून में।
•🔹 राज्य मंत्री: 1950-60 के दशक में उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों (जैसे राजस्व, कृषि, न्याय) का कार्यभार संभाला।
•🔹 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री:
•पहली बार 3 अप्रैल 1967 से 25 फरवरी 1968 तक।
•दूसरी बार 18 फरवरी 1970 से 1 अक्टूबर 1970 तक।
•🔹 कांग्रेस से अलगाव: इंदिरा गांधी के नीतियों से असहमति के चलते कांग्रेस पार्टी से अलग होकर 1974 में भारतीय लोक दल की स्थापना की।
•🔹 जनता पार्टी में भूमिका: 1977 में जनता पार्टी के गठन में भाग लिया और मोरारजी देसाई सरकार में उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री बने।
•🔹 प्रधानमंत्री पद:
•28 जुलाई 1979 को भारत के 5वें प्रधानमंत्री बने।
•उनकी सरकार मात्र 23 दिन चली, क्योंकि उन्हें लोकसभा में बहुमत नहीं मिला। उन्होंने 20 अगस्त 1979 को इस्तीफा दे दिया।
•🔹 किसानों के नेता: चौधरी चरण सिंह को ‘भारत के किसान नेता’ और ‘किसान राजनीति के मसीहा’ के रूप में जाना जाता है।
•🔹 मृत्यु: 29 मई 1987 को उनका निधन हुआ।
#chaudharycharansingh ❤️🙏🏻🙏🏻
‘X’ पर मैंने बहुत सारे कंटेंट राइटर देखा जो बहुत अच्छा लिखते है , जिसे पढ़ कर लोगो को राजनीतिक बौद्धिक कि समझ होगी ।।
पर मगर मेरा उन सभी राइटर से एक सवाल है , की अगर आप एक जेनियुइन राइटर है तो आपका काम जो पार्टी सरकार चला रही है उनसे सवाल करना ,
जो नेता वोट मांगने जनता के बीच जाएँगे उनसे जानता के behalf पर सवाल करना तो आप किसी पार्टी की दलाली क्यो करने में लग जा रहे है ।।
अगर यहाँ भी आप यही करेंगे तो लोग न्यूज़ चैनल वालो को सिर्फ़ क्यों गलिया दे आप सब भी गाली सुनने के ही लायक है ।।
Right to speech का सही उसे तब होगा जब आप इसे सरकार से सवाल करने में इस्तेमाल करेंगी उनकी नीतियों को उनकी नियत को ना की दलाली करने से ।।
धन्यवाद 🙏🏻
थ्रेड 2
🔸23 दिन का प्रधानमंत्री, फिर भी न झुके
1979 में प्रधानमंत्री बनने के बाद चरण सिंह को संसद में बहुमत साबित करना था। कांग्रेस (इंदिरा) ने समर्थन वापस ले लिया।
बहुमत साबित करने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया – लेकिन इंदिरा गांधी से समर्थन मांगने नहीं गए, जबकि उनसे समर्थन मिलने पर वे प्रधानमंत्री बने रह सकते थे।
यह घटना बताती है कि वह सत्ता के लिए समझौता करने को तैयार नहीं थे।