तुकाराम मुंढे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अस्पतालों में बिकने वा��े मेडिकल प्रोडक्ट्स की कीमतों पर सवाल खड़े किए हैं.
एक सर्वे में आईवी सेट, सिरिंज और मास्क जैसी चीज़ों की कीमत में बड़ा फर्क सामने आया है.
बेटियों के लिए जितना काम नीतीश कुमार जी ने किया है, उतना काम आजादी के बाद कोई भी मुख्यमंत्री नहीं कर पाया। नीतीश कुमार जी की योजनाओं को इस वीडियो में देखिए।
FSSAI वालों तुम्हारे नोटिस को ये आदमी इतने हल्के में ले रहा है कि नोटिस को फाड़कर फेंक दिया ,
FSSAI वालों तुम्हारी इतनी बेइज्जती अब मुझसे देखी नहीं जाती आए दिन लोग तुम्हारे कार्यप्रणाली पर सवाल उठते है और तुम्हारे FIR, नोटिस का मजाक बनाते है।
जहर बेचने वालों को फां��ी की सजा दो नहीं तो तुम्हारी नोटिस फाड़ने वालों का एक तूफान आएगा।
मुख्यमंत्री @NitishKumar जी- आपने पटना की बड़ी कुर्सी छोड़ने से पहले, दिल्ली की कुर्सी हासिल कर ली है, आपको बहुत बधाई!!
लेकिन बिहार के ये नौजवान अभी भी धूप में बैठे हैं, बस एक सवाल के जवाब के लिए... सरकार, अपने वादे कब पूरे करेगी? बहाली कब निकालेगी?
नीतीश जी, आपने तो खुद पिछले साल वादा किया था, कहा था- टीचर बहाली के लिए BPSC TRE 4.0 का आयोजन जल्द किया जाएगा
BPSC कैलेंडर में अगर ये एग्जाम 2024 में हो जाना था, तो कम से कम अप्रैल 2026 में तो डेट फाइनल करा दीजिए... और लाखों लोगों की दुआ के साथ दिल्ली जाइए....
Telecom Companies ऐसे Recharge Plans offer करती हैं जिनमें ‘Daily Data Limits’ जैसे 1.5GB, 2GB या 3GB per day होती हैं, जो हर 24 hours में reset हो जाती हैं। बचा हुआ data midnight पर expire हो जाता है, जबकि उसके पूरे पैसे पहले ही दिए जा चुके होते हैं।
आपको 2GB के लिए charge किया जाता है। आप 1.5GB use करते हैं। बचा हुआ 0.5GB दिन खत्म होते ही गायब हो जाता है। कोई refund नहीं। कोई rollover नहीं।
मैंने आज यह मुद्दा Parliament में उठाया की जिस data के लिए हमने पूरी payment की है, वो दिन समाप्त होने पर Expire नहीं होना चाहिए।
बचा हुआ data अगले दिन की data limit में carry forward होना चाहिए, ताकि users Data इस्तेमाल कर सकें जिसके लिए उन्होंने पहले ही pay किया है।
संसद में आज मेरी demands हैं -
1.सभी users के लिए Data carry-forward / Data rollover की सुविधा दी जाए। जो data दिन के अंत तक use नहीं होता, उसे अगले दिन की limit में add किया जाए, न कि validity खत्म होते ही ख़त्म कर दिया जाए।
2.अगले महीने के recharge amount में unused data का adjustment का option दिया जाए। अगर कोई user लगातार अपना data under-utilise करता है, तो अगले monthly recharge में उस value का adjustment या discount मिलना चाहिए। users को बार-बार उस लिमिट के लिए pay नहीं करना चाहिए जो वे use ही नहीं करते।
3.Unused data को relatives और friends को transfer करने का option दिया जाए। Unused data को user की digital property माना जाना चाहिए। उपभोक्ता को अपने daily data limit से unused data दूसरों को transfer करने की permission होनी चाहिए, बिल्कुल उसी तरह जैसे पैसे transfer किए जा सकते हैं।
आज मोबाइल डेटा कोई luxury नहीं, Digital oxygen बन चुका है। टेलीकॉम कंपनियों की ये लूट बंद होनी चाहिए।
एक लड़के के पैर के अंगूठे की हड्डी टूटी थी तो इलाज करवाने हॉस्पिटल गया...
लेकिन डॉक्टर साहब ने जिस अंगूठे की हड्डी टूटी थ�� उस अंगूठे को छोड़कर पूरे पैर पर प्लास्टर चढ़ा दिया...
अब हमे विश्वगुरु बनने से कोई रोक ही नहीं सकता।https://t.co/jk8t433MW2
विशाखापट्टनम की बेटी, ज्योति याराजी 🇮🇳
एशियन चैंपियनशिप 2025 (गुमी) में
100 मीटर हर्डल्स का गोल्ड मेडल डिफेंड करती है 🥇
और जीत के बाद बस एक खामोश आँसू…
हम क्रिकेट जीतें तो सड़कों पर जश्न,
और जब देश के लिए इतिहास रचने वाली बेटी जीते —
तो सन्नाटा?
ये आँसू हार के नहीं थे,
ये आँसू अनदेखे संघर्ष और अनसुनी जीत के थे।
सलाम है तुम्हें, ज्योति।
देश को तुम पर गर्व है
आज मैं अपनी प्रोफाइल पिक्चर (DP) बदलकर #SaveAravalli अभियान का हिस्स�� बन रहा हूँ। यह सिर्फ एक फोटो नहीं, एक विरोध है उस नई परिभाषा के खिलाफ जिसके तहत 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को 'अरावली' मानने से इंकार किया जा रहा है। मेरा आपसे अनुरोध है कि अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदलकर इस अभियान से जुड़ें:
अरावली के संरक्षण को लेकर आए इन बदलावों ने उत्तर भारत के भविष्य पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह निर्णय हमारे अस्तित्व के लिए खतरनाक है क्योंकि:
1️⃣ मरुस्थल एवं लू के खिलाफ दीवार: अरावली कोई मामूली पहाड़ नहीं, बल्कि कुदरत की बनाई 'ग्रीन वॉल' (Green Wall) है। यह थार रेगिस्तान की रेत और गर्म हवाओं (ल���) को दिल्ली, हरियाणा और यूपी के उपजाऊ मैदानों की ओर बढ़ने से रोकती है। अगर छोटी पहाड़ियाँ (Gaping Areas) खनन के लिए खुल गईं, तो रेगिस्तान हमारे दरवाज़े तक आ जाएगा और गर्म हवाएं तापमान को बढ़ा देंगी।
2️⃣ प्रदूषण से रक्षा: ये पहाड़ियाँ और य���ाँ के जंगल NCR और आसपास के शहरों के 'फेफड़ों' (Lungs) की तरह काम करते हैं। ये धूल भरी आंधियों (Dust Storms) को रोकते हैं और जानलेवा प्रदूषण को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। दिल्ली और आसपास के इलाके में अरावली के बावजूद इतनी गंभीर स्थिति है तो अरावली के बिना कैसी स्थिति होगी, उसकी कल्पना करना भी वीभत्स है।
3️⃣ भूजल (Groundwater): अरावली हमारे लिए पानी का मुख्य रिचार्ज ज़ोन है। अरावली की चट्टानें बारिश के प��नी को ज़मीन के भीतर भेजकर भूजल रिचार्ज करती हैं। अगर पहाड़ खत्म हुए, तो भविष्य में पीने के पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ेगा,जिससे वन्यजीव लुप्त होने की कगार पर आ जाएंगे तथा इकोलॉजी को खतरा होगा।
वैज्ञानिक सच यह है कि अरावली एक निरंतर शृंखला (Continuous Chain) है। इसकी छोटी पहाड़ियाँ भी उतनी ही अहम हैं जितनी बड़ी चोटियाँ। अगर दीवार में एक भी ईंट कम हुई, तो सुरक्षा टूट जाएगी।
📢 हमारी अपील:
हम केंद्र सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट से विनम्र निवेदन करते हैं कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए इस परिभाषा पर पुनर्विचार (Reconsider) करें। अरावली को 'फीते' या 'ऊंचाई' से नहीं, बल्कि इसके 'पर्यावरणीय योगदान' (Ecological Impact) से आंका जाए।
#SaveAravalli