राम मंदिर ट्रस्ट में पच्चीस हजार करोड़ का घोटाला हुआ है। यह कोई चंपत राय की छोटी चोरी का मामला नहीं है जहां सौ दो सौ करोड़ गायब हुआ है। पच्चीस हजार करोड़ से अधिक का मामला है। दरअसल इसका तार दिल्ली से जुड़ा हुआ है। द�� बड़े खिलाड़ी है। यह जमीन घोटाला है। अयोध्या में लाख रुपये की जमीन खरीद कर उसी दिन उसी जमीन को करोड़ों में ट्रस्ट को बेचा गया।
बागेश्वर धाम महाराज धीरेंद्र शास्त्री ने कहा ही कि मैं दोनों नाम नहीं बता सकता क्योंकि मेरी जान को खतरा है। तो मेरी क्या हैसियत जो मैं बता पाऊंगा।
राम के नाम पर चालीस साल की राजनीति, और उसी राम के घर डकैती करवाना। यही चरित्र है भाजपा का? अब ज्यादा नहीं लिखूंगा। दिल्ली के दो ब्राह्मण है जिन्होंने डकैती की है। पंडितों का पूरा सिंडिकेट काम किया है पिछले चार सालों में। नाम पता कीजिए। अगर पता है तो बताइए। मैं किसी को नहीं बताऊंगा। चंपत राय बलि का बकरा है और कुछ नहीं।
मोदी जी, अमित शाह जी... अगर जरा सा भी भारतीयों के आस्था का सम्मान है तो घोटाला उजागर कीजिए। दोषियों पर कार्रवाई कीजिए। उम्मीद अ��� आपलोग से नहीं बचा है। फिर भी...
बाद बाकी इथेनॉल वाला पेट्रोल भरवाते रहना है। राम भजन करते रहना है। भारत माता की जय।
मैं लिखना नहीं चाह रहा था। लेकिन बचपन से दादी को रोजाना सुंदरकांड पढ़ते देखा हूं। अब पिताजी को सात दिन में तुलसीदास रामायण पूरा करते देखता हूं। राम हमारे डीएनए में है। ��र्यादा पुरुषोत्तम के लिए न्याय की उम्मीद तो कर ही सकता।
@narendramodi @AmitShah
मिलिए पृथ्वी शॉ से, जिन्हें कभी भारतीय क्रिकेट का अगली पीढ़ी का सबसे बड़ा प्रतिभाशाली खिलाड़ी माना जाता था।
• 2025 के मध्य में उन्होंने आकृति अग्रवाल को डेट करना शुरू किया।
• 2026 में दोनों ने अपनी सगाई की घोषणा की और पृथ्वी ने आकृति को अपना "लकी चार्म" बताया।
• इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर कई बार आकृति के साथ बेवफाई की।
• आकृति ने एक बार उन्हें माफ भी किया, लेकिन उन्होंने अपनी हरकतें नहीं बदलीं।
इस शख्स ने न केवल अपने क्रिकेट करियर को नुकसान पहुँचाया बल्कि कथित तौर पर आकृति की ज़िंदगी भी मुश्किलों में डाल दी।
पृथ्वी शॉ की निजी ज़िंदगी में एक और नया मोड़ आ गया है....!!
हाल ही में उनकी सगाई हुई थी लेकिन अब उनकी मंगेतर ने बेवफाई (चीटिंग) से जुड़ी एक स्टोरी साझा की है और अपने सोशल मीडिया से उनसे जुड़ी लगभग सभी चीज़ें हटा दी हैं...!!
पृथ्वी ने नई ज़िंदगी की शुरुआत के लिए एक घर खरीदा था और सगाई भी की थी लेकिन सगाई के कुछ ही महीनों बाद यह सब हो गया...ऐसा लगता है कि मुश्किलों और विवादों से उनका नाता अभी भी खत्म नहीं हुआ है...!!
भारत सरकार में कें���्रीय मंत्री(खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय तथा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री @iChiragPaswan जी से मेरे बड़े भाई अधिवक्ता रवि सिंह जी ने भेंट किया ...!!
ज्यादा लफंडरगिरी बहुत खरतनाक ही नहीं परेशानी का पिटारा होता है.... इधर देखिए वायरल होने के चक्कर में सोशल मीडिया पर हथियार दिखाना युवक को पड़ा महंगा, मुजफ्फरपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार...
नेहा और दानिश ::::: जहाँ भी लोगों की आवाज़ दबाने की कोशिश होती है, वहाँ वे अपनी बु���ंद आवाज़ के साथ पहुँच जाते हैं
समकालीन राजनीति में नेहा और दानिश दो ऐसे प्रमुख युवा चेहरे बनकर उभरे हैं, जो न्याय, सम्मान और जवाबदेही की मांग करने वाले लोगों के साथ मजबूती से खड़े दिखाई देते हैं। चाहे वह किसी आंदोलन का धरना स्थल हो, किसी विश्वविद्यालय का परिसर हो या कोई सार्वजनिक सभा—जहाँ आम लोग अपने असाधारण सवालों को उठाते हैं, वहाँ अक्सर उनकी मौजूदगी देखने को मिलती है।
जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलनों से लेकर जेएनयू और अन्य विश्वविद्यालयों में होने वाली चर्चाओं तक, वे लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले मंचों पर एक परिचित चेहरा बन चुके हैं। उनकी राजनीति केवल भाषणों या सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी सक्रिय भागीदारी, एकजुटता और उन लोगों के साथ खड़े होने की प्रतिबद्धता में दिखाई देती है, जो स्वयं को उपेक्षित या अनसुना महसूस करते हैं।
कई युवाओं के लिए नेतृत्व का अर्थ केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि संघर्षों को साझा करना और हाशिए पर धकेली गई आवाज़ों को बुलंद करना है। इसी मायने में नेहा और दानिश उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मानती है कि राजनीति का संबंध हमेशा आम लोगों के रोज़मर्रा के जीवन और उनकी समस्याओं से बना रहना चाहिए।
उनके समर्थकों के लिए वे संवाद, जनभागीदारी और अन्याय के विरुद्ध लोकतांत्रिक प्रतिरोध की भावना का प्रतीक हैं। उनकी यात्रा इस महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक परंपरा को दर्शाती है कि एक जिम्मेदार नागरिक होना केवल दर्शक बने रहना नहीं, बल्कि दूसरों के अधिकारों और न्याय के लिए अपनी आवाज़ उठाना भी एक सार्वजनिक जिम्मेदारी है।
इतिहास हमेशा उन लोगों को याद रखता है, जिन्होंने कठिन समय में लोगों के साथ खड़े होकर सच बोलने का साहस दिखाया। लोकतंत्र का भविष्य भी ऐसी ही भागीदारी, साहस और प्रतिबद्धता पर निर्भर करता है।
इस देश में जितना भी विचारधारा है सब ब्राह्मणों का इजाद किया हुआ है। जितने भी विचारधारा है, सब के सब एक जाति के दिमाग का उपज है। वामपंथ से लेकर दक्षिणपंथ तक। समाजवाद से सामंतवाद तक। पूरी सिस्टम, पूरी लड़ाई का जो सॉफ्टवेयर है न वह एक जाति ने बनाया है। और स���फ्टवेयर बनाने से पहले वायरस भी बना दिया जिससे जरूरत पड़ने पर सॉफ्टवेयर को मालफंक्शन किया जा सके।
आप उससे बाहर नहीं निकल सकते। आप और आपका आने वाला पीढ़ी कौन सा पेशा करेगा यहां तक वो तय कर चुके थे। कौन तलवार चलाएगा, कौन कलम चलाएगा और कौन खेती करेगा यह सब वही तय किया। हजारों साल देश उसी पर चला। आज का हिंदू भी जन्म से मरने तक वही व्यवस्था पर चलता है जो ब्राह्मणों ने बनाया।
आप सोचिए वाम लड़ रहा दक्���िण से, सामंत लड़ रहा समतामूलक से... सब लड़ रहा।
बहुजन महापंचायत होने वाला था। करवाने वाला भी वही था, खत्म करवाने वाला भी वही था। कहा पार पाइएगा उससे।
जनेऊ पहनने वाला और तोड़ने वाला, दोनों वही है। आप बस पीछे चलिए। चलते रहिए।
बाकी सब अपनी जाति पर गर्व करे। कोई बड़ा छोटा नहीं है। लेकिन सिस्टम मेकर एक ही है। दूसरा कोई नहीं हुआ, न होगा। ~ उदिप्त
सवाल पूछने पर भड़के भरत तिवारी के यहाँ टीआरपी बटोरने गए बाबा! 🔥
छपरा एक्सप्रेस न्यूज़ वाले ने जब पूछे तीखे सवाल, तो बाबा का पारा चढ़ गया। देखिए वीडियो में आगे क्या हुआ! पूरा मामला जानने के लिए अंत तक देखें👇
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ये अलग लेवल का न्यूज संस्थान है देखिए लगता है भरत तिवारी को न्याय दिलाने से ज्यादा महत्वपूर्ण इसके लिए खाने में भरत के लिए क्या बन रहा है वो है.... इसे कौन सी पत्रकारिता कहा जाए?
ये हैँ आईपीएस अधिकारी स्वर्ण प्रभात जी वर्तमान में मोतिहारी यानी पूर्वी चंपारण के जिला पुलिस अधीक्षक हैं। इससे पहले ये गोपालगंज के जिला पुलिस कप्तान रह चुके हैं।
जब वे गोपालगंज के एसपी हुआ करते थे, तब मैंने एक मामले को लेकर एसपी हेल्पलाइन पर कॉल किया था। मामला यह था कि सघन जांच के दौरान आम लोगों को ज्यादा परेशान किया जा रहा था। हेल्पलाइन नंबर से मुझे कॉल आया, मेरी समस्या को स��झा गया और फिर उस पर कार्रवाई भी की गई।
यह घटना छोटी-सी थी, लेकिन मैंने इसे इसलिए साझा किया क्योंकि गोपालगंज में उनके कार्यकाल के दौरान पुलिस व्यवस्था बहुत शानदार तरीके से काम कर रही थी। यह मामला मीरगंज थाना क्षेत्र के सुरवनिया पुल का है, जो सीवान और गोपालगंज का बॉर्डर इलाका है।
इस घटना ने मेरे मन में ऐसे पुलिस अधिकारी के प्रति सम्मान और बढ़ा दिया। शासन-प्रशासन में भी बहुत शानदार और ईमानदार��� से काम करने वाले अधिकारी मौजूद हैं। ऐसे अधिकारियों के बारे में जरूर बात करनी चाहिए। आज मैंने फेसबुक पर एक पो��्ट देखा, तो मुझे यह अनुभव याद आ गया। @swarnprabhat516
खुलकर फॉरवर्ड बैकवर्ड हो रहा बिहार में...सोशल मीडिया पटा पड़ा है। नीतीश जी जबतक थे, तबतक इसको दाब कर रखे थे। लेकिन सम्राट जी के आते एकदम गनगना गया है। भरत तिवारी के जनेऊ का खिलाफत करना है कीजिए, लेकिन इसके आड़ में बिहार पुलिस और गृह मंत्रालय को काहे डिफेंड कर रहे है।
क्यों नहीं मान लेते कि बिहार पुलिस ने अपराध किया है। सम्राट असक्षम लीडर है। उनसे कही ज्यादा सक्षम उपेंद्र कुशवाहा होते। बहुत से अन्य नाम गिनवाया जा सकता है जो पिछड़ा समाज से आते है लेकिन जिन्हें नेतृत्व करना आता है। नीतीश जी भी पिछड़ा थे। कभी देखा था आपने की कुर्मियों को छोड़कर बाकी सब जात उनके खिलाफ हो गया हो?
आज सिवाय कुशवाहा समाज का कोई दूसरा मुझे नहीं दिखता जो मौजूदा मुख्यमंत्री को डिफेंड कर रहा हो। कुछ तो कारण होगा। सवर्ण के साथ यादव भी उतना ही खिलाफत कर रहे। स्थिति सामान्य नहीं है। आप माने य�� न माने~उदिप्त
भरत तिवारी एनकाउंटर में अपने रिपोर्टिंग से खूब TRP बटोरने वाले यह वही श्रीकांत प्रत्यूष हैं, जिन्हें अयोध्या स्थित बिहार भवन प्रिया प्रीतम दास कुंज मंदिर का महंत बनाया गया था...आखिर पत्रकार श्रीकांत प्रत्यूष महंत क्यों बने ��े?
कोरोना के बाद साल 2022 में पटना के जाने-माने पत्रकार श्रीकांत प्रत्यूष, जो बिहार डीजीपी रहे और अब कथावाचक बने गुप्तेश्वर पांडेय के भाई हैं, वे भी बाबा बन गए थे..यानी अयोध्या स्थित बिहार भवन प्रिया प्रीतम दास कुंज मंदिर के वे महंत बने थे...उस दौरान उन्होंने अपना नाम श्रीकांत प्रत्यूष से बदलकर श्रीकांत दास बताया था, जिसका जिक्र वे अपने वीडियो में भी करते नजर आए थे....!!
आखिर एक पत्रकार मंदिर का मह��त क्यों बना? यह सवाल कई लोगों के मन में है....!!
देखिए, एक पत्रकार की भूमिका कितनी अलग हो सकती है...एक तरफ वह पत्रकारिता करता है, वहीं दूसरी तरफ किसी मठ-मंदिर का महंत भी बन जाता है...महंत बनने के बाद मंदिर पर कंट्रोल करना फिर महंतगिरी छोड़करपत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय होना, गृहस्थ जीवन में वापस होना भी चर्चा का विषय है...!!
श्रीकांत प्रत्यूष के इस दूसरे पहलू को भी लोगों के सामने रखना जरूरी है, ताकि बिहार के लोग पूरी बात को समझ सकें....!!
मठ-मंदिरों में कई बार बड़ी संपत्ति, जमीन और ��्यवस्थाएं जुड़ी होती हैं...ऐसे में महंत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि मंदिर के संचालन और व्यवस्था की जिम्मेदारी महंत के पास होती है....!!
श्रीकांत जी बहुत समझदार व्यक्ति हैं... उनसे मेरा आग्रह है कि अगर वे किसी को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठा रहे हैं तो यह सराहनीय है, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि वे अयोध्या में उस मठ-मंदिर के महंत क्यों बने थे और इसके पीछे की वास्तविक वजह क्या ���ी?
अयोध्या में उस मठ-मंदिर के आसपास के लोगों से बातचीत के दौरान अलग-अलग बातें सामने आईं...कुछ लोगों का कहना था कि महंत बनने का उद्देश्य मंदिर अकूत सम्पति पर कंट्रोल करना था, तो कुछ लोग इसे अलग नजरिए से देखते हैं..अब इसकी सच्चाई क्या है, यह भी सामने आना चाहिए....!!
क्योंकि हर मामले के दो पहलू होते हैं और लोगों को पूरी जानकारी मिलनी चाहिए..... #मृग_विचार
भरत तिवारी प्रकरण पर सिटी पोस्ट के श्रीकांत प्रत्यूष ने धरातल से सचाई को दिखाने ��ी कोशिश की पर एक सच्चाई इसकी ये भी है कि कुछ वर्ष पहले एक मठ के कंट्रोल के लिए खुद बाबा बन गए थे फिर कुछ महीनों बाद मोहमाया में वापस आ गए और कोरोना के टाइम मैं ज़ब सिटी पोस्ट से जुडा तो 40 हजार हमारा माल भी नहीं दिया इन्होंने और दूसरी तरह बिहार के हर मुद्दे पर कवरेज करने वाला @Live_Cities अब सरकारी चैनल हो चुका है! ज्ञानेश्वर तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद पर खूब बोलते हैं लेकिन अभी पता ना काहे मुँह में इनके दही जम गया लगता है मोटा माल का मामला है
भोजपुर जिला, बिहार के शाहपुर रेफरल अस्पताल का यह मामला है
इस रोते हुए लड़के का परिवार संपन्न है, गरीब नहीं है... अमीर है
फिर भी इसके भाई की जान नहीं बचाई जा सकी
गांव में कोई अस्पताल नहीं था, जिसकी वजह से मरीज को 50 किलोमीटर दूर ले जाना पड़ रहा था
एंबुलेंस में बैठते समय उसकी सांसें चल रही थीं,
लेकिन एंबुलेंस की ऑक्सीजन मशीन न चलने के कारण उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया
अस्पताल में इमारत और क��र्सियाँ सब हैं लेकिन जो सबसे जरूरी था, वो ऑक्सीजन ही गायब
यह सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही है
जब अस्पताल और एंबुलेंस में ऑक्सीजन ही उपलब्ध नहीं है तो जनता कहाँ ��ाए?
🚨 #BreakingNews | अभिनेता पंकज त्रिपाठी के भाई विजेन्द्र तिवारी पर धारदार हथियार से जान��ेवा हमला।
घटना गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव की बताई जा रही है। हमले में गंभीर रूप से घायल विजेन्द्र तिवारी को बेहतर इलाज के लिए PMCH रेफर किया गया है।
घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है। हमले के पीछे के कारणों का अभी तक आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है।
📍 गोपालगंज, बिहार
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श्वेत नरायन दलित हैं पत्रकार श्रीकांत जी से वो जो रोकर कहतें हैं वो आपका कलेजा चिर देगा और राजाओं को अपार बदुआएं देगा.!
नरायन जी कहतें हैं -
"बाऊ वो हमारा भगवान था उसका यहाँ मंदिर बनवाया दीजिए हम पूजा करेंगे, यह सड़क ये बिजली, ये घर, ये सब हमें भरत तिवारी के वजह से मिला था उन्हें हमारा नेता नही भगवान बोलिए
स्लेंडर करने के बाद पुलिस खिंचकर मारी DSP साहब आये बोले मार madharchod को ��सके बाद गिराकर हम सबके सामने पंडित बाऊ को मारे पुलिस वाले.
पत्रकार- आप सब गवाही देंगे??
ग्रामीण- जी सर हमारे गाँव के तमाम युवाओं पर केस दर्ज कर दिया है धमकी दे रहें हैं कि हम डर जाएं पर हम कोरट में गवाही देंगे..
क्योंकि पंडित बाऊ हमारी मांग के लिए मार दिए गए.."
रोते हुए श्वेत नारायण पीले गमछे में व अन्य ग्रामीण.
पटना में आयोजित जदयू राज्य परिषद और भाजपा की बैठकी में गौर से देखिए भाजपा जदयू के आकाओ के प्यादे, सरेंडर कर चुके राजपूत नेता मंच पर नहीं दिखे, कम से कम यहां दरी बिछान���, कुर्सी लगाने और ताली बजाने के लिए भी किसी को रहना चाहिए था
बिलौटी फेक एनकाउंटर के7 दिन बाद, भरत तिवारी फेक एनकाउंटर केस में भोजपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई,जगदीशपुर SDPO और शाहपुर थानाध्यक्ष के ऊपर FIR,मामला बढ़ा!
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