इथेनॉल के नाम पर गाड़ियों को बर्बाद करने का काम नितिन गडकरी कर रहे हैं.
फिर बेशर्मी से सुप्रीम कोर्ट में कहते हैं कि साल भर बाद पता चलेगा कि इसका असर क्या होगा!
पेड ट्रोल के सहारे पूरे देश को चुप कराने का काम किया जा रहा है. यह शर्मनाक है !
तेंदूखेड��ा में गणतंत्र दिवस पर बच्चों ने बापू पर आपत्तिजनक गीत गाया ऐसा की पोस्ट भी नहीं कर सकता...
बच्चे निर्दोष हैं, दोष उनका है जो ताली बजाते रहे...
बापू को गाली देकर देश नहीं बनता... जब शिक्षा के मंदिर में विवेक मर जाए, तो आज़ादी भी रोती है...
आदरणीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी
छत्तीसगढ़ का अर्थ सिर्फ रायपुर दुर्ग भिलाई क्लस्टर नहीं है
135000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में केवल एक एयरपोर्ट की बोइंग और और एयर बस के लायक है
इससे छोटे राज्य तमिलनाडु में छह बड़े एयरपोर्ट है
छत्तीसगढ़ प्रवास में निम्न मांग पूरी करें
मोदी सरकार मानसिक दिवालियेपन का शिकार हो गई है।
@Wangchuk66 की गिरफ़्तारी हिटलरशाही का प्रतीक है।
लद्दाख की जनता को आंदोलन करने से रोकना बड़े जनविद्रोह का कारण बनेगा।
#SonamWangchuk
कल मोदी जी को ट्रम्प ने बधाई दी मोदी जी ने दिल खोलकर धन्यवाद दिया गोदी मीडिया ने चिल्ला-चिल्ला कर पूरी दुनिया को बताया।
आज ट्रम्प ने भारत को ड्रग्स तस्करी करने वाले देशों की सूची में शामिल कर दिया।
तो क्या मोदी जी ड्रग्स तस्करी करने वाले देश के प्रधानमंत्री हैं?
तियानजिंग में SCO की बैठक नही हुई।
चीन का राज्याभिषेक हुआ है।
इसकी घोषणा विक्ट्री परेड से हुई।
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दूसरे विश्वयुद्ध में जापान का सबसे क्रूर रक्तपात चीन में हुआ। मंचूरिया,बीजिंग और नानजिंग के कब्जे के दौरान खुल्लम खुल्ला नरसंहार हुआ। कोई 20 लाख लोग मारे गए।
उस गर्त से निकलकर चीनियों ने युद्ध जीता। विजेता गुट में होने के कारण, 1945 में UN की पांच बड़ी पावर्स में एक बना।मिली सिक्युरिटी काउंसिल की स्थायी सीट, वीटो पॉवर
(जी ��ां, वह नेहरू ने नही दिलवाई थी)
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लेकिन चीन में सत्ता परिवर्तन हुआ। वैश्विक व्यवस्था भी बदली। व्यापार और धन नया साम्राज्यवाद बने। चीन इसमे पिछड़ गया।
इतना कि लोग भूल गए कि अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस के अलावे चीन भी उस युद्ध मे विजेता था। चीन वह याद दिला रहा है।
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बता रहा है कि 20 साल उसने वैश्विक व्यापार, अर्थव्यवस्था में US को टक्कर दी। अब मिलिट्री इंडस्ट्रियल सुपरपावर भी है।
बता रहा है ��ि दुनिया का बड़ा ब्लॉक उसके साथ है। SCO में रूस, सेंट्रल एशिया, पूर्वी यूरोप के सोवियत संघ हिस्से , आसियान देश, कुछ यूरोपियन-अरब- अफ्रीकन लीडर्स को इसकी पुष्टि करने को बुलाया।
दुनिया एकध्रुवीय नही रही। चीन दूसरा ध्रुव है।
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उसने यह चाल, बेहद माकूल वक्त पर चली। जब USA एक ��ागल शासक के अंगूठे तले खुद को तबाह कर रहा है। जनता विभाजित है, कन्फ्यूज्ड है। आर्थिक हालात डांवाडोल है। चीजें महंगी, जीना मुश्किल कर दिया है।
वह तमाम पड़ोसियों, मैक्सिको, कनाडा, पनामा को धमका रहा है। USA यूरोप के परंपरागत- विश्वस्त दोस्तों का भरोसा खो बैठा है।
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तब चीन ने वियतनाम, लाओस, उत्तर कोरिया, म्यंमार, रूस, मंगोलिया, पाकिस्तान को विक्ट्री परेड में साथ बिठा लिया। ये उसके सीमावर्ती देश हैं।
इसमे 4 परमाणु शक्तियां हैं।
साउथ चाइना सी उसके जेहन में है। वहां से इंडोनेशिया को इस परेड का मुख्य अतिथि बनाकर बिठाया।
और फिर जापान के खिलाफ जीत के 80 साल पुराने क्षण को इस तरह से सेलिब्रेट कर जापान को चुनौती दी है।
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कहिए, एक तरह से क्वाड को चुनौती दी है। इसमे जापान के साथ अमेरिका, जापान ऑस्ट्रेलिया और भारत बैठे हैं।
सबसे सख्त चेतावनी भारत को है। भारत को घेरने वाले मालदीव, पाकिस्तान, नेपाल और म्यांमार के राष्ट्राध्यक्ष, चीन की विक्ट्री परेड में बैठे दिखे।
संकटमोचक रहा रूस भी, उत्तर कोरिया के साथ, गेस्ट ऑफ ऑनर बनकर, जिनपिंग के बगल में बैठा था।
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कहा जा रहा है कि SCO दुनिया के 35% जीडीपी को कवर करता है। इसके मुकाबले यूरोपियन यूनियन महज 15% कवर करता है।
RCEP करीब 30% कवर करता है, मगर इसमे चीन सहित आस��यान के देश शामिल है। मोदी RCEP को 2019 में ठुकरा चुके है।
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वे इस समिट से फिर से कुछ नई, विश्व नेताओ को उंगली दिखाती, डांटती मुद्राओं और हंसी ठट्ठा करती तस्वीरे खिंचवाकर लौट आये
सीधे बिहार चुनाव में कूदे, माँ की गाली का मुद्दा गर्म किया।तो अब बिहार बन्द की तस्वीरें आ रही हैं। लेकिन नई वैश्विक व्यवस्था में हमारी दुकान पर ही ताला बंद�� के हालात हैं।
"अबकी बार ट्रम्प सरकार" की ख्वाहिश तो पूरी हुई। पर अमेरिकी बाजार के दरवाजे हम पर बन्द है। SCO में चेहरा दिखाकर हमने अमेरिका को और क्रुद्ध किया। लेकिन चाइनीज ब्लॉक में कोई जगह मिलती नही दिखती।
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विदेश नीति, राजनीति और समाज की जमीन पर फसल बोने, उगने, काटने में समय लगता है। मोदी सरकार के शुरुआती 5-7 साल, पुरानी फसल काटते हुए चैन से गुजरे।
विगत 3-4 सालों से, हर मोर्चे पर उनकी खुद की लगा�� फसल पकने लगी है।इसके जहरीली बालियां इस देश की छाती पर अब लंबे समय लहलहाने वाली हैं। सरकार चाहे जिसकी हो।
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जियोपोलिटिक्स के स्तर पर, भारत मे जिस तरह का विमर्श चलता है, पूरी सोसायटी, अखबार, चैनलों पर जो नरेटिव चलता है, वह गुप्त नही होता।
आपकी उंगली दिखाती,शेर के समान चलती तस्वीरें वे विदेशी भी देखते हैं, जो भारत की एम्बेसियो में बैठे होते हैं। अपनी सरकारो को रिपोर्ट करते हैं।
दरअसल,उनका काम यही नजर रखना होता है। कुछ उनसे छूट जाए, तो सरकारी ट्रोल्स विदेशो तक हमारी सोच को पहुंचाने में कोई कसर नही छोड़ते। उनके नेताओ से हंसी ठट्ठा कर,आप यह इम्प्रेशन बदल नही सकते।
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शी जिनपिंग हर छोटे बड़े देश के नेता को गरिमा के साथ, ससम्मान मिलकर बात की। अपनी ताकत, विक्ट्री परेड औऱ SCO के जरिये दिखाई।
यहाँ आधी दुनिया और आधे ह��ंदुस्तान को यह सरकार, तुच्छ दुश्मन मानती है। समर्थंक एब्यूज करके ही खुश है।
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तो यह इतिहास आपको याद रहे।
जब चीन एक नया वैश्विक ब्लॉक बनाकर राज्याभिषेक करवा रहा था। हम अपने पीएम के नेतृत्व में, आत्मप्रवंचना और बेवकूफाना हरकतों में प्रसन्न मुदित, बगलें बजा रहे थे।
"मेरा परिवार नहीं है भीख माँगकर खाता हूँ और मुझे नोटिस दे दिया है " - आदिवासी बालक
मध्यप्रदेश में बीजेपी सरकार द्वारा आदिवासी बच्चों को बेघर कर भीख मांगने पर मजबूर किया जा रहा है। वन अध���कार अधिनियम 2006 के बावजूद सरकारें वन भूमि कॉर्पोरेट्स को बेच रही हैं और आदिवासियों को उजाड़ रही हैं। यह सिर्फ विकास नहीं, यह विनाश है।
सीज़फ़ायर करने वाला देश भारत ग़ज़ा में सीज़फ़ायर करने के ख़िलाफ़ वोट नहीं कर पाता है। पहले मतदान फिर जलपान की बात कहने वाले संयुक्त राष्ट्र में मतदान से नदारद हो गए। शायद जलपान की याद आ गई होगी। गांधी और बुद्ध के कथनों का इस्तेमाल केवल भाषण को ज़ोरदार ���नाने के लिए किया जाता है। बुद्ध के नाम से वोट मिले तो नाम लो लेकिन बुद्ध को याद करते हुए मानवता के पक्ष में वोट देना हो तो भाग लो। शर्मनाक है।
खबर बताती है कि पांच महीने से कोयले की खुदाई जारी है और अब जा कर सरकार इस खदान को शुरू करने के लिए विशेष ग्रामसभा आयोजित करना चाह रही है.
हालाँकि खनन करने वाली कंपनी का दावा है कि उसके पास सारी अनुमतियाँ हैं.
दावा सही है तो फिर सरकार ग्राम सभा क्यों कराना चाहती है ?