तुम्हारे से अगर कोई गलती हो गई है, तो इसका फल ये नही कि आप कायर बनकर आत्महत्या कर लो... कभी नही!
गलती हो गई लेकिन दोबारा गलती न हो, ये बड़ा प्रायश्चित है । गलती नहीं हुई है और आरोप लग रहा है तो आप और भी मजबूत ह�� जाओ। मानो बिना साबुन, बिना पानी आपके वस्त्र वो धो रहा है।
यदि आप पर झूठा आरोप लग रहा है तो समझो आपके पाप धुल रहे हैं और अगर कुछ सच्चाई है तो वे आपको सावधान कर रहे हैं।
#AsharamjiBapuQuote
शत्रुओं को मित्र बनाने वाला मंत्र देता हूँ। गुरु गीता का पाठ कर लेना। ललाट पे तिलक कर लेना। हो सके, दीया जलाओ तो ठीक है, नहीं तो चलेगा।
मंत्र बड़ा सरल है, लेकिन बड़ा शक्तिशाली।हूं, हूं, ह��ं,हूं, हूं, हूं, हूं, हूं, हूं, हूं , हूं इक्कीस बार।
दूसरा मंत्र है, अं रां अं, अं रां अं।
दोनों में से जो अधिक अनुकूल लगे, शत्रुओं को मित्र बना देता है। बस
#AsharamjiBapu
@Asharamjibapu__ सत्संग मनुष्य के जीवन को उज्ज्वल बनाता है। जैसे शुक्ल पक्ष में ���न्द्रमा की ज्योति बढ़ती है, वैसे ही सत्संग से विवेक, ज्ञान और आत्मबल निरंतर बढ़ते जाते हैं। 🌙✨Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ गीता की अभय विद्या का सार यही है कि परिवर्तनशील संसार के बीच भी आत्मा अचल, शुद्ध और सनातन है। इस सत्य का अनुभव जीवन में स��थिरता, साहस और आंतरिक शांति प्रदान करता है। #AsharamjiBapuQuotes #Brahmavidya
सत्संग वह अमूल्य साधन है जो मनुष्य को भ्रम से सत्य की ओर, अशांति से आनंद की ओर और बंधन से मुक्ति की ओर ले जाता है। इसलिए इसका लाभ सजगता और श्रद्धा से लेना चाहिए। #AsharamjiBapuQuotes#Adhyatma
इष्ट के गुणों का निरंतर स्मरण मन को दिव्यता की ओर ले जाता है। ब्रह्मज्ञानी गुरु के मार्गदर्शन में साधक आत्मस्वरूप में स्थित होकर उस परम सत्य का अनुभव कर सकता है, जो सर्वत्र व्याप्त है। #AsharamjiBapu#Adhyatma
इष्ट के गुणों का निरंतर स्मरण मन को दिव्यता की ओर ले जाता है। ब्रह्मज्ञानी गुरु के मार्गदर्शन में साधक आत्मस्वरूप में स्थित होकर उस परम सत्य का अनुभव कर सकता है, जो सर्वत्र व्याप्त है। #AsharamjiBapu#Adhyatma
आप जिस इष्ट देव का ध्यान धरेंगे, ज्ञान सुनेंगे, उसके गुण, उसका स्वभाव आएगा, उसकी आकृति और उसके लक्षण आप में आ जाएंगे। उसकी दिव्यता आप में आएगी।
अगर गुरु ब्रह्म ज्ञानी है, तो उस इष्ट देव का या उस आकृति का ध्यान छोड़कर अपने स्व आत्मा में आएंगे, तो आप व्यापक ब्रह्म भी हो जाएंगे,जिसमें भगवान ब्��ह्मा, विष्णु, महेश ठहरे हैं, वहां भी पहुंच जाएंगे।#AsharamjiBapu
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परदेसी का CHALLENGE कैसे पूरा किया वज़ीर ने ?
एक परदेसी आदमी वैशाली नगरी के राजा के दरबार में आया और दो घोड़ियाँ थीं उसके पास। उसने कहा, इसमें कौन पुत्री है और कौन माँ है? वो अगर कोई मुझे बता दे तो ये दो घोड़े उसको इनाम में और एक हज़ार रुपया भी दूँगा...
#AsharamjiBapu
गीता में ये बड़ी अद्भुत विद्या (ब्रह्मविद्या) है । आप ध्यानपूर्वक सुनो और व्यवहार में लाओ तो व्यवहार करते करते भगवत प्राप्ति हो जाए।
ब्रह्मविद्या में एक है अभय विद्या।
आत्मा अमर है, आत्मा सुखरूप है, चेतनरूप है, ज्ञानरूप है और सदा रहता है। मन, शरीर और संसार बदलता है लेकिन चैतन्य आत्मा ज्यों का त्यों रहता है।
#AsharamjiBapuQuotes
आप जिस इष्ट देव का ध्यान धरेंगे, ज्ञान सुनेंगे, उसके गुण, उसका स्वभाव आएगा, उसकी आकृति और उसके लक्षण आप में आ जाएंगे। उसकी दिव्यता आप में आएगी।
अगर गु���ु ब्रह्म ज्ञानी है, तो उस इष्ट देव का या उस आकृति का ध्यान छोड़कर अपने स्व आत्मा में आएंगे, तो आप व्यापक ब्रह्म भी हो जाएंगे,जिसमें भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश ठहरे हैं, वहां भी पहुंच जाएंगे।#AsharamjiBapu
सनातन धर्म में कुछ विशेष चिन्हों को अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना गया है, जिन्हें “अष्टमंगल चिन्ह” कहा जाता है। इनका धार्मिक अनु��्ठानों, मंदिरों, देवी-देवताओं की मूर्तियों और पूजा विधियों में भी इनका महत्वपूर्ण स्थान है।
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संभल जिले में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस हिंसा के दौरान वकील विष्णु शंकर जैन की हत्या की साजिश रचने वाले को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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स्वस्थ शरीर, प्रसन्न मन और दीर्घायु जीवन की कामना रखने वालों के लिए आंवला विशेष महत्व रखता है। आयुर्वेद में इसे पोषण, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला तथा त्रिदोष हर बताया गया है।
#AsharamjiBapu#Ayurveda
आंवले का रस। आंवले के रस का भी अपना महत्व है। आंवला श्रेष्ठ रसायन, माना tonic है।
132 प्रकार की बीमारी का raw material है। वात, पित्त और कफ। जैसे वायु से 80 प्रकार की बीमारियां, पित्त से 32 प्रकार की और कफ से 20 प्रकार की। 132 प्रकार की बीमारियां इन तीनों से बनती है और इनका तीनों का विमिश्रण, कुमिश्रण से 800 प्रकार की बीमारियां बन जाती है।
लेकिन आंवले में ऐसी योग्यता है कि इन तीनों दोषो�� को हर लेता है— वात, पित्त, कफ।
दीर्घायुष्य देता है, आरोग्य उत्तम देता है और चेहरे पर चमक भी लाता है, कांति बढ़ाता है।
#AsharamjiBapu
@Asharamjibapu__ आंवला आयुर्वेद में एक श्रेष्ठ रसायन माना गया है। नियमित सेवन शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, पाचन शक्ति और त्वचा की कांति को बढ़ाने में सहायक है। स्वास्थ्य की रक्षा में प्रकृति के ऐसे उपहारों का विशेष महत्व है।
#AsharamjiBapu#Amla#Ayurveda
आंवले का रस। आंवले के रस का भी अपना महत्व है। आंवला श्रेष्ठ रसायन, माना tonic है।
132 प्रकार की बीमारी का raw material है। वात, पित्त और कफ। जैसे वायु से 80 प्रकार की बीमारियां, पित्त से 32 प्रकार की और कफ से 20 प्रकार की। 132 प्रकार की बीमारियां इ��� तीनों से बनती है और इनका तीनों का विमिश्रण, कुमिश्रण से 800 प्रकार की बीमारियां बन जाती है।
लेकिन आंवले में ऐसी योग्यता है कि इन तीनों दोषों को हर लेता है— वात, पित्त, कफ।
दीर्घायुष्य देता है, आरोग्य उत्तम देता है और चेहरे पर चमक भी लाता है, कांति बढ़ाता है।
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