देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे
त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे।
शङ्करमौलिनिवासिनि विमले
मम मतिरास्तां तव पदकमले॥
हे देवी गंगे!
आप देवताओं की अधीश्वरी, तीनों लोकों का उद्धार करने वाली और तरंगों से शोभायमान हैं।
आप भगवान शिव के मस्तक में निवास करती हैं। मेरी बुद्धि सदा आप���े चरणकमलों में लगी रहे।
गंगा दशहरा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ । ❤️
#गंगा_दशहरा_की_हार्दिक_शुभकामनाएं #गंगा #Ganga
🕉️🙇♀️ Devshayani Ekadashi 🙇♀️🕉️
– The Day the Universe Teaches Us the Meaning of Divine Trust
According to Sanatana Dharma, on Devshayani Ekadashi, Lord Vishnu enters Yoga Nidra upon Adi Shesha in the Kshira Sagara (Ocean of Milk). This is not ordinary sleep—it is a state of supreme awareness, perfect balance, and divine consciousness.
Even while resting, Lord Vishnu continues to sustain and protect the universe. His Yoga Nidra reminds us that true strength is not found in constant action alone, but also in inner peace, patience, and unwavering faith.
For devotees of Sri Ranganathaswamy, who is the reclining form of Mahavishnu, this day is especially sacred. His serene posture is a timeless reminder that the Divine is always watching over creation, even in profound stillness.
As Chaturmas begins, may we also pause, reflect, let go of ego and negativity, and awaken the divinity within ourselves.
Jai Shrihari. 🙏
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O ShreeRanganatha! Though You eternally recline upon Adisesha in the Ocean of Milk, Your infinite compassion for all beings brought You to dwell at Srirangam on earth. Just as You remain undisturbed by the ocean's waves, You teach us to remain steadfast amidst the waves of life. Your boundless mercy and love are beyond the power of words to describe.
Hari Bol! 🙌🙇♀️🙏
🕉️🌸🙏 देवशयनी एकादशी 🙏🌸🕉️
– जब सृष्टि हमें धैर्य, विश्वास और ईश्वर की शरण का संदेश देती है।
सनातन धर्म के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में अनंत शेष पर योगनिद्रा में विराजमान होते हैं। इसे देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी कहा जाता है और इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ होता है।
यह योगनिद्रा सामान्य निद्रा नहीं है। यह पूर्ण जागरूकता, दिव्य चेतना और ब्रह्मांडीय संतुलन की अवस्था है। भगवान विष्णु विश्राम करते हुए भी सम्पूर्ण सृष्टि का पालन करते रहते हैं। उनका यह स्वरूप हमें सिखात�� है कि सच्ची शक्ति केवल निरंतर कर्म में नहीं, बल्कि धैर्य, संतुलन और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास में भी होती है।
भक्ति परंपराओं में यह भी माना जाता है कि चातुर्मास के दौरान माँ लक्ष्मी, भगवान शिव, माँ दुर्गा, भगवान ब्रह्मा तथा भगवान विष्णु के विभिन्न दिव्य स्वरूप अपनी-अपनी शक्तियों से सृष्टि के संतुलन और लोककल्या�� का कार्य निरंतर करते रहते हैं। इसका संदेश स्पष्ट है—परमात्मा एक हैं, उनके स्वरूप अनेक हैं, और प्रत्येक स्वरूप जगत के कल्याण के लिए समर्पित है।
इसी कारण श्रीरंगनाथस्वामी, जो भगवान विष्णु के शेषशायी स्वरूप हैं, इस एकादशी पर विशेष रूप से पूजनीय हैं। उनके शांत और दिव्य दर्शन हमें विश्वास दिलाते हैं कि जब जीवन में सब कुछ स्थिर प्रतीत होता है, तब भी ईश्वर मौन रहकर हमारी रक्षा और मार्गदर्शन कर र��े होते हैं।
इस पावन अवसर पर आइए, केवल उपवास ही नहीं, बल्कि अपने भीतर के क्रोध, अहंकार, लोभ और नकारात्मकता का भी त्याग करें। अपने मन को भगवान के चरणों में समर्पित करें और प्रार्थना करें कि हमारा जीवन भी धर्म, करुणा और सेवा के मार्ग पर अग्रसर रहे।
॥ जय श्रीराधाश्याम॥ 🙇♀️
सभी को देवशयनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
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देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे
त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे।
शङ्करमौलिनिवासिनि विमले
मम मतिरास्तां तव पदकमले॥
हे देवी गंगे!
आप देवताओं की अधीश्वरी, तीनों लोकों का उद्धार करने वाली और तरंगों से शोभायमान हैं।
आप भगवान शिव के मस्तक में निवास करती हैं। मेरी बुद्धि सदा आपके चरणकमलों में लगी रहे।
गंगा दशहरा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ । ❤️
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