“100 मीटर से ऊँची पहाड़ी को ही अरावली माना जाएगा”—सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने अरावली संरक्षण की समझ को बेहद संकुचित कर दिया है। अरावली सिर्फ़ कुछ ऊँची पहाड़ियों का नाम नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है, जो राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात तक फैला हुआ है।
अरावली वर्षा जल को रोककर भूजल का पुनर्भरण करती है, रेगिस्तान के विस्तार को रोकती है, जैव विविधता को आश्रय देती है और करोड़ों लोगों के लिए जलवायु सुरक्षा की ढाल है। केवल ऊँचाई के आधार पर इसकी पहचान तय करना वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और सामाजिक—तीन��ं दृष्टियों से खतरनाक है। इससे 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियाँ, वन क्षेत्र और पारंपरिक जल स्रोत संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगे।
इस फैसले का सीधा लाभ खनन माफिया, रियल एस्टेट और कॉर्पोरेट हितों को मिलेगा, जो पहले से ही अरावली को खोखला कर चुके हैं। इसका नतीजा होगा—जल संकट, बढ़ता प्रदूषण, तापमान में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं का बढ़ता खतरा। यह केवल पर्यावरण का सवाल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन के अधिकार का मुद्दा है।
अरावली को नक्शे की रेखाओं और मीटरों में नहीं, बल्कि उसकी पारिस्थितिक भूमिका के रूप में समझना होगा। अगर आज हमने अरावली को नहीं बचाया, तो कल शहर, गाँव और खेती—सब असुरक्षित होंगे।
This image sums up how Indian politicians “Respect” nature.
Full hill cut open to build a personal palace. Forests gone. Slopes scarred. Ecosystem sacrificed.
Former Andhra CM Y. S. Jagan Mohan Reddy didn’t just misuse power, he bulldozed a hill to flaunt it.
Before & After
आपकी मेहनत रंग ला रही है।
करीब 40k लोगों के पिटिशन भर दी है।
यदि ये संख्या सोमवार तक 50k हो गई तो सोमवार को इसका रिकॉर्ड देश और विदेश के सभी जिम्मेदार विभागों तक पहुंचा दिया जाएगा।🙏
#Aravali#SaveAravali
प्रिय दिल्लीवासियों,
बची रहे जो ‘अरावली’
तो दिल्ली रहे हरीभरी!
अरावली को बचाना कोई विकल्प नहीं है ���ल्कि ये तो संकल्प होना चाहिए। मत भूलिए कि अरावली बचेगी तो ही एनसीआर बचेगा।
अरावली को बचाना अपरिहार्य है क्योंकि यह दिल्ली और एनसीआर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है ��ा कहें क़ुदरती ढाल है। अरावली ही दिल्ली के ओझल हो चुके तारों को फिर से दिखा सकती है, पर्यावरण को बचा सकती है।
अरावली पर्वतमाला ही दिल्ली के वायु प्रदूषण को कम करती है और बारिश-पानी में अहम भूमिका निभाती है।
अरावली से ही एनसीआर की जैव विविधता बची हुई है। जो वेटलैंड गायब होते चले जा रहे हैं, उन्हें यही बचा सकती है। गुम हो रहे परिंदों को वापस बुला सकती है।
अरावली से ही एनसीआर का तापमान नियंत्रित होता है।
इसके अलावा अरावली से एक भावात्मक लगाव भी है जो दिल्ली की सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा है।
अरावली को बचाना, दिल्ली के भविष्य को बचाना है, नहीं तो एक-एक साँस लेने के लिए संघर्ष कर रहे दिल्लीवासी स्मॉग जैसे जानलेवा हालात से कभी बाहर नहीं आ पाएंगे। आज एनसीआर के बुज़ुर्ग, बीमार और बच्चों पर प्रदूषण का सबसे ख़राब और ख़तरनाक असर पड़ रहा है। यहाँ के विश्व प्रसिद्ध हॉस्पिटल और मेडिकल सर्विस सेक्टर तक बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जो लोग बीमारी ठीक करने दिल्ली आते थे, वो अब और बीमार होने नहीं आ रहे हैं।
- यही हाल रहा तो उत्तर भारत के सबसे बड़े बाज़ार और आर्थिक केंद्र के रूप में भी दिल्ली अपनी अहमियत खो देगी।
- विदेशी तो छोड़िए, देश के पर्यटक भी यहाँ नहीं आएंगे।
- न ही दिल्ली में कोई बड़ा इवेंट आयोजित होगा।
- न ही कोई राजनीतिक, शैक्षिक, अका��मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक सम्मेलन आयोजित होगा।
- न ही ओलंपिक, कॉमनवेल्थ या एशियाड जैसी कोई बड़ी खेल प्रतियोगिता आयोजित होगी।
- यहाँ का होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी-कैब, गाइड, हैंडीक्राफ़्ट बिज़नेस, हर काम-कारोबार व अन्य सभी आर्थिक-सामाजिक गतिविधियाँ ठप्प हो जाने के कगार पर पहु��च जाएंगी।
- जब प्रदूषण की वजह से हवाई जहाज़ नहीं चलेंगे, ट्रेनें घंटों लेट होंगी, सड़क परिवहन असुरक्षित हो जाएगा, तो दिल्ली कौन आएगा।
- यहाँ तक कि इसका असर ये भी पड़ेगा कि लोग अपने बेटी-बेटे की शादी तय करने से पहले दिल्ली के हवा-पानी के बारे में सोचने लगेंगे।
- इसीलिए हर नागरिक के साथ हर स्कूल-कोचिंग, हर व्यापारी, हर कारोबारी, हर दुकानदार, हर रेहड़ी-पटरीवाले, हर घर-परिवार तक को ‘अरावली बचाओ’ अभियान का हिस्सा बनना चाहिए।
- हर चैनल, हर अख़बार को ये अभियान चलाना चाहिए। जो लोग सरकार की चाटुकारिता कर रहे हैं, वो भी समझ लें कि उनका स्वयं का जीवन भी ख़तरे में है।
अरावली को बचाना मतलब ख़ुद को बचाना है।
अगर अरावली का विनाश नहीं रोका गया तो भाजपा की अवैध खनन को वैध बनाने की साज़िश और ज़मीन की बेइंतहा भूख देश की राजधानी क�� दुनिया की ‘प्रदूषण राजधानी’ बना देगी और लोग दिल्ली छोड़ने को बाध्य हो जाएंगे।
इसीलिए आइए हम सब मिलकर अरावली बचाएं और भाजपा की गंदी राजनीति को जनता और जनमत की ताक़त से हराएं!
आपका
अखिलेश
#SaveTheAravallis | The Aravalli Range is under serious threat after a Supreme Court ruling that limits its definition to hills rising 100 metres above the local terrain, potentially stripping protection from nearly 90% of the Aravallis across Delhi-NCR, Rajasthan, and Haryana and leaving them exposed to mining, deforestation, and excavation.
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Save Aravali: India’s oldest mountain range is under severe threat from mining, deforestation & unchecked construction. Aravalis protect our climate, groundwater & biodiversity. Urgent action is needed to ensure strict conservation. #SaveAravalli#aravallihills#arava
Revoke the Bill. Don’t Gaslight Us. Save the Aravalli.
We heard what Bhupender Yadav said that the Aravalli is safe.
With respect, we don’t believe it.
Because:
🔴If 90% is opened for mining and construction, the range is not safe
🔴 If groundwater recharge zones are stripped, Delhi–Rajasthan is not safe
🔴 If wildlife corridors are broken, ecosystems are not safe
🔴If dust, heat, and desertification rise, people are not safe
Please don’t tell us “Aravalli is protected” while approvals increase and hills disappear overnight.
Our demand is simple.
Revoke the bill.
We don’t need assurances.
We need action.
Protect the oldest parvat mala of India not in speeches, but in law.
Photos by - rover_shutterbug (ig )