नरेन्द्र मोदी या अमित शाह ने छात्रों पर गोली नहीं चलवाई। लेकिन कारसेवकों पर गोली नेताजी मुलायम सिंह ने चलवाई थी। ग़ज़ब दोगलापन है भाई।
सच्चाई यह है कि इसको मानते हुए तमाम लोग बीजेपी को आसानी से वोट भी देते हैं और आज वही लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं कि मोदी ने छात्रों पर गोली...
@PrinceV93789344 भईया दीदी को यह रिपोर्ट पढ़नी चाहिए थी लेकिन दीदी पढ़ना नहीं चाहती और सड़क पर आकर धरना प्रदर्शन कर रहीं हैं.
ऐसी बहुत सारी रिपोर्ट्स हैं लेकिन दीदी पढ़ना नहीं चाहती है.🥲🥲🥲
ओबीसी कोटे की मंत्री वाली सीट बीजेपी ने ब्राह्मण को क्यों दे दी? अनुप्रिया पटेल को भी दे सकती थी। खैर, दिमागी गुलामी भी तो कोई चीज होती है न! गुलाम दिमाग़ चिंतन कहाँ कर सकता है?
क्या ओबीसी दलितों के आरक्षण पर डाका डालने की तैयारी शुरू हो रही है।
कल CJP प्रोटेस्ट खत्म होने के बाद अचानक रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन नाम का पेज बनाया जाता है।
और देखते ही देखते उस पर 1.5M फॉलोवर्स हो जाते हैं सारे भाजपा IT सेल वाले उसको समर्थन दे रहे हैं।
2027 में अगर भाजपा जीत गई तो क्या विधानसभा में बिल लाकर आरक्षण खत्म कर देगी बड़ा सवाल और साजिश है।
@ranvijaylive सरकार अच्छी तरह समझती है कि इस नाराज युवा वर्ग तक अपनी बात पहुंचाने और उन्हें शांत करने के लिए उसी प्लेटफॉर्म पर जाना होगा जहां वे मौजूद हैं.
@nishikant_dubey@RahulGandhi@INCIndia सांसद महोदय जब आधा घंटा देर हो गया था तो फिर प्रवेश कैसे मिल गया...?
आम जनता के बेटा/बेटी से अगर एक सेकेंड भी देर हो जाएं तो प्रवेश नहीं मिलता है।।
जब रजनी तिलक की इन पंक्तियों को पढ़ता हूँ तो कबीर और रैदास की कविताई याद आती है:-
"औरत होने में
जुदा-जुदा फर्क नहीं क्या?
एक भंगी है तो दूसरी ब्राह्मणी
एक डोम है तो दूसरी क्षत्राणी
दोनों सुबह से शाम खटती है।
क्या एक-सी?"
स्वामी विवेकानंद ने कहा था - "आप सब आश्चर्यचकित होंगे अगर मैं आपसे कहूँ कि पुराने अनुष्ठानों के मुताबिक़ जो बीफ़ नहीं खाता, वो एक अच्छा हिन्दू नहीं है। कुछ अवसरों पर उसे बैल की बलि चढ़ाकर उसका सेवन करना चाहिए।"
(The Complete Works of Swami Vivekananda, Volume 3, 1997)
दुनियां के 177 देशों की लिस्ट में प्रदूषण के मामले में भारत सबसे निचली पायदान से ठीक एक पायदान ऊपर क्यों है?
क्या दुनियां का हर अध्ययन भारत के खिलाफ षडयंत्र कर रहा है? या हम अपनी बरबादी क़बूल करने को किसी सूरत में तैयार नहीं हैं क्योंकि हम स्वयंभू विश्वगुरू हैं!
(वीडियो लिंक कमेंट्स में है)
कट-ऑफ ने आज सिर्फ़ चयन नहीं किया,
कई लोगों के सिद्धांतों की भी परीक्षा ले ली।
जब लाभ दूसरों को मिले तो 'मेरिट' याद आती है,
और जब अपने हिस्से में आए तो 'व्यवस्था' सही लगने लगती है।
विचारधारा की असली पहचान भाषणों से नहीं,
अपने स्वार्थ के सामने भी उस पर टिके रहने से होती है।
@VivekGa54515036 प्रयागराज की वास्तविकता जहां तक मैं समझा हूं अब वहां एकदिवसीय परिक्षाओं का बोलबाला ज्यादा है।
दूसरी बात जो मुझे समझ में नहीं आती है जब आप अपना शहर/गांव छोड़कर प्रयागराज में कमरा लेकर रह रहे हैं तो फिर एक स्टडी रूम (सो कॉल्ड लाइब्रेरी)की क्या ज़रूरत है...?