ये खाली गांवों का सूनापन
भीड़ भरे शहरों की तन्हाई
क्या भूलूं, क्या बयां करूं..
भूख की पीड़ा
रातों की करवट
या जगमग करते
फुटपाथों की सच्चाई
क्या बयां करूं..
अनगिनत ख्वाहिशों के बोझ तले
मील���ं पैदल ही नाप गया
कंधों से कंधों का मिलन तो हुआ
लेकिन मंज़िल अब तक नजर ना आई
क्या भूलूं, क्या बयां करूं
ये खाली गांवों का सूनापन
भीड़ भरे शहरों की तन्हाई।।
- आलोक राजवीर
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When it comes to relations/friendships, it's not about priorities. People have such complex lives and we all sharing it with each other. Neither we can choose someone, nor we can make people choose us. There's not a list of people with importace in descending order. You love
ऐसा नहीं है कि खून में उबाल नहीं है
पर शायद सही दिशा में उछाल नहीं है
और कौन नहीं चाहता बेफिक्री से जीना मगर
शायद उनके घरों में अच्छे हाल नहीं हैं।
📝 : राहगीर • 📸 : आर्यन राज