भाजपा एक ओर मध्यप्रदेश में भगवान राम को ‘जातिवादी हत्यारा’ बता कर कोर्ट में उन्हें वही साबित करने के लिए केस लड़ रही है, और दूसरी ओर अपने नए ईश्वर, भगवान श्री नरेन्द्र मोदी, के जन्मदिवस पर दीवाली मनाने की घोषणा भी कर रही है।
यानी, राम को भूलो। मंदिर में डाका डलने दो। नए राम को स्वीकारो। उनके जन्मदिन पर दीपक जलाओ। सही जा रहे हो @BJP4India वालों।
बिहार के लोगों से आग्रह है कि ऐसा कोई भी दीपक आपको 17 सितम्बर को दिखे, उसे फोड़ दीजिए। यह जातिवादी नेता समाज को तोड़ने पर जुटा हुआ है। वह इस सम्मान के योग्य नहीं है।
आज फिर से ये पेला जाएगा। मोदी का सलाहकार यह बता रहा है कि @narendramodi केवल SC-ST-OBC के हैं, सवर्ण टैक्स देता रहे ताकि मोदी की राजनीति चलती रहे।
सवर्णों, तुम यह तय करो कि तुम्हें आगामी चुनावों में किसे वोट देना है। जो भय यह तुम्हें दिखा रहे हैं, इन्हें याद दिलाओ कि राहुल के आते ही इनकी BJP और RSS का क्या होगा। हिंदू तो मुग़ल, अंग्रेज़ सब झेल चुका है। हिंदू तो विकल्प खड़ा कर लेगा, पर राजनैतिक पार्टियाँ प्रतिबंधित होने के बाद कहाँ चुनाव लड़ेगी?
मीरा रोड मुंबई में एक व्यक्ति ने अपना डेढ़ करोड़ का फ्लैट एक मुस्लिम परिवार को किराए पर दिया था
अब वह मुस्लिम परिवार ना तो भाड़ा दे रहा है ना फ्लैट खाली कर रहा है
और देखिए किस तरह का दादागिरी दिखा रहा है
और महिलाओं को सामने कर रहा है
आरफा खानम शेरवानी से लेकर राहुल गांधी अखिलेश यादव राना अय्यूब जैसे लोग कितने भी छाती कुटे की भारत में लोग मुसलमानों को भाड़े पर मकान नहीं देते तो उसका सबसे बड़ा कारण यही है
बंडलवा को ओवरटाइम करना पड़ रहा है। और मैं कह रहा हूँ इनकी औकात से बाहर जा चुका है समेटना। ज्ञान रखो अपने पिछवाड़े में।
भारत में न्याय सुस्त है तो तुम्हारा नया बाप उसको टाइट क्यों नहीं कर पा रहा? उसको झालमूढ़ी खाने और नाक के बाल वाले वीडियो बनाने के लिए जनता ने वोट दिया था?
मोदी ने मोदी एक्ट को अपनी घटिया, जातिवादी नीतियों के कारण ऐसा बनाया है। जितने एक्ट लिखें हैं इस चूतिए ने, एक में भी 75% धन और पेंशन की सुविधा है?
इसी कारण फर्जी केस अधिक होते हैं क्योंकि केस का परिणाम कुछ भी हो मोदी जी अपने बाबूजी द्वारा घड़े में रखे गए स्वर्ण मुद्राओं का एक हिस्सा दलीत-पीड़ीत-वंचीत-शोषीत को दिलवा देते हैं।
मोदी एक्ट पर कुछ तथ्य और आँकड़े
एक पार्टी चाटुकार का वीडियो देखा जिसमें उक्त व्यक्ति, पत्रकार @23pradeepsingh जी को ज्ञान दे रहा है कि उन्होंने जो 'मोदी एक्ट' के बारे में दलित नागरिकों द्वारा पैसों की उगाही की योजना पर टिप्पणी की, वह ग़लत है।
बिल्कुल नहीं! प्रदीप जी ने जो कहा वह तथ्यात्मक रूप में उचित है क्योंकि न तो 1989 के मूल क़ानून में, न ही 2018 के मोदी संशोधन में इस बवासीर एक्ट में किसी भी तरह की '75% दिए पैसों की रिकवरी' का कोई भी प्रावधान है ही नहीं।
हाँ, कभी-कभी कोर्ट को लगता है कि ये कुछ ज़्यादा ही हो गया तो वह आदेश दे सकती है, परंतु लाखों ऐसे केस के 99% मामलों में कोर्ट सरकार द्वारा चार्जशीट फाइल होने तक दी गई धनराशि की कोई रिकवरी नहीं करवाती। उसके लिए आरोपित को बाद में केस फाइल करना होता है, और अधिकांश समय लोग कोर्ट के झंझट में नहीं पड़ना चाहते।
यह केस मोदी एक्ट के सेक्शंस के तहत नहीं होता, वह अन्य IPC/BNS के माध्यम से होगा। यानी एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। 3(1)(p), 3(1)(q) या 3(2)(i)–(ii) में स्पष्ट रूप से 'फ़र्ज़ी केस, फ़र्ज़ी साक्ष्य, फ़र्ज़ी सूचना' देने पर आप पर केस बनेगा, लेकिन यह प्रावधान केवल SC/ST लोगों के लिए है, ना कि अन्य भुक्तभोगियों के लिए। और यह मोदी जी ने ही 2015 में संशोधन करके डाला है। यानी, SC/ST पर केस करने के लिए यदि आपने ग़लत सूचना, प्रमाण का प्रयोग किया तो उसे सुरक्षा है, आपको नहीं।
उक्त चटुआ महोदय से आग्रह है कि हमें पुनः वीडियो में जन-गण-मन की धुन बजा कर समझाएँ कि नियम 12(4), 12(7) अथवा किसी अन्य एनेक्सर में 'ऑटोमैटिक रिकवरी' की बात है क्या? साथ ही, यह भी बताएँ कर्नाटक, इलाहाबाद एवं एकाध अन्य हाई कोर्ट के अलावा कुल कितने ऐसे केस हैं जिसमे कोर्ट्स ने ऐसे स्टार्ट-अप योजना के लाभार्थियों से अठन्नी भी वसूली है? आज तक कुल ऐसी रिकवरी 10-20 करोड़ भी नहीं होगी।
आपकी सूचना हेतु बता दूँ कि 8-10% कन्विक्शन रेट वाले इस कानून ने 2018 के बाद से 2024 तक 5.7 लाख लोगों के लिए ₹3650 करोड़ रुपए बाँटे हैं। 2.88 लाख केस पेंडिंग हैं कोर्ट्स में लेकिन पैसे 75% तक दे दिए जाते हैं।
₹3650 करोड़ का आँकड़ा केवल कन्विक्शन के बाद का नहीं है, यह आँकड़ा FIR, चार्जशीट के स्तर तक दी गई 75% धनराशि के साथ है। तो आप स्वयं कैलकुलेट कीजिए कि इसमें कितने हज़ार करोड़ झूठे केस करने वालों को दे दिए गए।
मजेदार वीडियो है, एक ABSA, जिनका सरनेम पटेल करके था,एक गांव के घर पर छापा मारते हैं,जहाँ एक बाल्मीकि सरनेम वाले व्यक्ति बगैर राज्य शिक्षा बोर्ड की अनुमति के 'वाकायदा'... 'स्कूल' चलाते पाए जाते हैं...
जब ABSA जवाब तलब करते हैं तो बगैर अनुमति-रजिस्ट्रेशन स्कूल चलाने वाले बाल्मीकि जी.... पटेल साहब पर उल्टा चढ़ बैठते हैं... पटेल साहब को जम कर हड़काते हैं... और अंत में बाल्मीकि जी...पटेल साहब पर जातिसूचक/जातिवादी गाली देने का आरोप लगा देते हैं....
ABSA साहब... तुरन्त सिर पर पैर रखकर... निकल लेने में भलाई समझते हैं 😁.. यह है नया भारत !!!
भीड़ तंत्र का तमाशा देखिए कि शिवम् नाम के सवर्ण लड़के को 2 वर्ष पुराने रैंडम वीडियो के कारण @bihar_police ने एक मुस्लिम अधिकारी को दिल्ली भेज दिया अरेस्ट करने को। यही बिहार पुलिस जातिवादी DJ गीत, वीडियो, पोस्ट आदि में टैग करने के बाद भी देखती रहती है कि क्या करें।
स्वतंत्र के साथ जो हुआ, वह भीड़ द्वारा प्रशासनिक प्रक्रिया को भयाक्रांत करने का उत्तम उदाहरण है। शिवम ने स्वतंत्र के समर्थन में पोस्टर उठाया, तो पुराना वीडियो निकाल कर अब इसका उदाहरण बनाना चाह रही है सरकार।
मुझे लगता है ये साले पगला गए हैं। इनको समझ में नहीं आ रहा कि एक और भीड़ भी है। यह वही भीड़ है जो तुम्हारे चूतड़ों से सर तक अपने कंधे लगा कर तुम्हें खड़ा रखे हुए है। या भीड़ जिस दिन वहाँ से हट कर दूसरी भीड़ का सामना करने के लिए उतरेगी, तुम पीठ के बल धराशायी हो जाओगे।
हमारे साथ के लोगों ने यह तय किया है कि अब हमारे बच्चों, युवाओं, बहनों या नेताओं पर जो भी केस होगा, दिल्ली में हम 500 वकीलों और 2000 समर्थकों के साथ हम हमेशा तैयार रहेंगे। @BhaiPreetSingh जैसे लोग अपना सर्वस्व त्याग कर इसमें लगे हुए हैं।
मैं इन सारे ही लोगों को समर्थन देता रहूँगा। आने वाला समय भयभीत हो कर छुपने के नहीं है। अपनी माँ के नाम की गाली सुन कर उसे भी अपनी राजनीति के लिए प्रयोग करने वाले लोग हमारे लिया घंटा खड़े होंगे। हमें अपनी रक्षा स्वयं ही करनी होगी। तैयार रहिए, उचित समय पर आप सबकी आवश्यकता पड़ेगी।
आरक्षण, UGC, मोदी एक्ट, सब पर सरकार को बात करनी होगी, नहीं करेंगे तो उचित मार्ग हमें पता है।
जय परशुराम!
Sc St Act का एक और मामला सामने आया है कि एक सहायक अध्यापिका ने इंचार्ज प्रधान अध्यापिका को गैरहाज़िर करने पर SC/ST Act में फँसा देने की धमकी दी। इससे परेशान होकर इंचार्ज प्रधान अध्यापिका निशि श्रीवास्तव ने CM, DM, SP और BSA से शिकायत की और मामले की जाँच कर कार्रवाई की माँग की।
उनका आरोप है कि उनके साथ गाली-गलौज भी की गई। उन्होंने कहा कि अगर मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो उनके लिए नौकरी करना मुश्किल हो जाएगा और उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा।
प्रश्न यही है, कानून जिन लोगों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है, क्या उसके दुरुपयोग की शिकायतों पर भी उतनी ही गंभीरता से विचार नहीं होना चाहिए?
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह कहते हैं कि गैर-जाटव दलितों को अब किसी पार्टी की ज़रूरत नहीं है, वे ऑटो-पायलट मोड पर हैं। बस उनका SC/ST कानून नहीं बदलना चाहिए। उनको अपना हथियार मिल गया है ,ऐसा हथियार, जिससे वे हर पार्टी को ठीक कर सकते हैं।
मोदी सरकार ने दलितों के एक वर्ग को रोजगार का नया अवसर दे दिया है। कुछ करने की ज़रूरत नहीं है, सुबह उठो, थाने जाओ और जिस पर मन हो, उस पर FIR करा दो।
16 लाख कुल आपको मिलना है। तुरंत आपको 8 लाख तुरंत मिल जाएगा, फिर केस की सुनवाई पर और 25 प्रतिशत, और बाकी 25 प्रतिशत फैसला आने पर।
और सबसे बड़ी बात, अगर आपका आरोप झूठा साबित हुआ तो आपको मिले हुए पैसे लौटाने भी नहीं हैं। तो इसलिए वे परवाह ही नहीं करते कि झूठा आरोप लगा रहे हैं या सही आरोप लगा रहे हैं।
पैसा तो मिलेगा ही, बस वो आखिरी वाला 25 प्रतिशत नहीं मिलेगा। बस इतना ही नुकसान है। मतलब, मुनाफे में घाटा है।
सवाल यह है कि अब देखना है BJP इसे कहाँ तक लेकर जाती है।
प्रदर्शन की तो अनुमति देंगे ही नहीं, चार लोग कमरे में बैठ कर बात भी करें, उसके लिए भी अनुमति चाहिए। अब सवर्ण लोग अपने बेडरूम में बच्चे पैदा करने की योजना बनाने से पूर्व भी अनुमति लेंगे सरकार से। तैयार रहो मित्रों!
पिछले 15-20 दिनों में इसे देश में 4 SC/ST एक्ट के केस दर्ज हुए जो पूरे देश में चर्चित हुए:-
- राहुल गांधी, आशुतोष रांका, अजीत भारती स्वतंत्र भरद्वाज
- इन चारों ने ही प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष किसी दलित समाज का उत्पीड़न नहीं किया, ना ही किसी पर जातिसूचक टिप्पणी करने के सबूत मौजूद हैं
- स्वतंत्र भारद्वाज 14 दिन की हिरासत में हैं, अजीत भारती की अग्रिम जमानत रिजेक्ट हो गई है
- राहुल गांधी और आशुतोष रांका का कोई बाल-बांका नहीं कर सकता
एससी एसटी के दुरपयोग का अब तक का सबसे बड़ा मामला बलिया जनपद के भोजपुरी थाने का अहिरौली और कसेसर गांव का है , तथाकथित दलित लड़का ब्राह्मण लड़की को रोज़ छेड़ता था लेकिन पुलिस ने उल्टा लड़की के परिवार पर ही एससी एसटी एक्ट लगा दिया ।
बलिया पुलिस ने यदि पास्को का मुकदमा नहीं लिखा था जल्द थाने का घेराव होगा ।
@balliapolice बेटी का भी सून लीजिए उसके साथ अन्याय हुआ है पास्को का मुकदमा लिखिए जल्द से जल्द।
MCD का कमिश्नर कौन है? दिल्ली होटल में लगी आग के बाद @BJP4India ने कितने अधिकारी सस्पेंड किए? लखनऊ में आग लगने के बाद कितने अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई? दिल्ली में ही मुखर्जीनगर और करोलबाग में पिछली बारिशों में बच्चों के मरने पर कितनी बार और किस पर क्या कार्रवाई हो गई? NDLS स्टेशन पर भगदड़ में हुई मौतों के बाद कौन सा बड़ा अधिकारी सस्पेंड हुआ?
सील की हुई, बिना उचित ढाँचे के बनायी बिल्डिंग कैसे खोल दी गई? @gupta_rekha जी की वीडियो तो अच्छी आती है पर उनके हाथ में भी नगर निगम पर कार्रवाई करना है? MHA द्वारा लाए गए, स्टेडियम बंद करवा कर कुत्ता घुमाने वाले IAS अधिकारी का कोई दायित्व नहीं?
ABVP का प्रदर्शन हमें पता नहीं है कि तुमने क्यों करवाया? जो विद्यार्थी परिषद विद्यार्थियों के हर विषय पर चुप रहा है, वो अचानक से अपनी ही केंद्र-राज्य-निगम के शासन में जग कर प्रदर्शन कर रहा है!
भाजपा अधिकारियों के खिलाफ कभी भी एक्शन नहीं लेती। इस हरामखोर, निकम्मी लॉबी से इनकी जितनी फटती है, उतनी हमने किसी झाँटू से क्षेत्रीय दल की फटती नहीं देखी है। इन दोगले, भ्रष्टाचारियों ने देश को बरबाद कर दिया है, लोगों के मरने पर भी इन्हें अंतर नहीं पड़ता।
दिल्ली में जो हुआ है, वह मैंने अपनी आँखों के सामने 2004 से हमेशा बारिश में होता देखा है। गाँधी विहार, नेहरू विहार, इंदिरा विकास कॉलोनी समेत ऐसी हर अनरेगुलेटेड कॉलोनी में आप पिलर ढूँढते रहिए, एक-एक ईंट पर पाँच फ्लोर तक की बिल्डिंग खींच दी जाती है। हर बारिश में पुराने मकान ढहते हैं, बच्चे मरते हैं।
भाजपा 2007-22 तक MCD में थी, पिछले 12 वर्षों से केंद्र में है, डेढ़ वर्ष से राज्य में है, इसके पास ऐसा कुछ भी नहीं है कि यह त्रासदी किसी और पार्टी पर यह डाल सके। यह ऑडिट और भ्रष्टाचार का विषय है। इसमें सब आकंठ डूबे हुए हैं।
यदि यह भी एक 'नकारात्मक ही सही, पर डिफ्लेक्शन तो हो गया' जैसा दिख रहा है, तो तुम्हारा भगवान ही मालिक है।
आश्चर्यजनक तरीके से सवर्ण समाज जाग गया है , किसको किसको उखाड़ेगा कह नहीं सकते ,लेकिन आरक्षण में सुधार ,एससी एसटी की समाप्ति और यूजीसी रोलबैक तो होकर रहेगा ।
जमीन पर ये आदेश कागज का टुकड़ा बनकर रह गया है।
28 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने साफ आदेश दिया था कि देवी-देवताओं के अपमान पर पुलिस को किसी की शिकायत का इंतजार नहीं करना है, खुद स्वतः संज्ञान लेकर FIR दर्ज करनी है। WP(C) 943/2021 में यही कहा गया था कि धर्म कोई भी हो, हेट स्पीच और धार्मिक भावनाओं के अपमान पर तुरंत कार्रवाई हो।
पुलिस कब स्वतः संज्ञान लेती है? जब मर्ज़ी हो तब। भगवान का अपमान हो रहा हो तो इंतजार करती है कि कोई शिकायत लेकर आए, जबकि दूसरे मामलों में रातोंरात FIR लिख जाती है। ये दोहरा मापदंड अब छिपाने लायक नहीं बचा।
कोर्ट ने बाद में कहा कि सिर्फ FIR न लगाना अवमानना नहीं माना जाएगा जब तक पुलिस जानबूझकर आंखें न मूंदे। यानी सिस्टम ने खुद को बचाने का रास्ता निकाल लिया। सवाल ये है कि हिंदू देवताओं के अपमान पर आंख मूंदने की ये आदत कब छूटेगी?
देवी-देवताओं के अपमान पर पुलिस को शिकायत की प्रतीक्षा नहीं करना है बल्कि स्वतः संज्ञान लेकर FIR दर्ज करना है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है
Supreme Court of India
Order Date: 28.04.2023
Case No: WP(C) 943/2021
Ashwini Upadhyay vs. UOI
@HMOIndia@AmitShah@PMOIndia@narendramodi
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर संजय (नाबालिग निशु आजाद के पिता) की पिटाई पर POCSO क्यों लगाया?
धातु की कड़ा से पिता पर हमला हुआ।
बच्चे पर कोई यौन अपराध नहीं हुआ।
फिर POCSO कैसे लग गया?
CJP वाले FIR में 307, SC/ST एक्ट और POCSO जोड़ने की मांग कर रहे थे ।
लेकिन POCSO बच्चों के यौन शोषण का कानून है।
यहाँ तो पिता की पिटाई है।
कानून का दुरुपयोग हो रहा है।
वोटबैंक के लिए विशेष कानूनों का मनमाना इस्तेमाल हो रहा है।
न्याय नहीं, दबाव बन रहा है।