सोशल मीडिया पर एक वर्ग ने तय कर लिया था कि 'ब्राह्मणवाद' मिटाने का मतलब केवल नारों और मीम्स में गाली देना है।
जब जंतर-मंतर से रील्स बनकर खत्म हुईं और मंत्रालयों के बंटवारे का समय आया, तो सत्ता ने साबित किया कि राजनीति नफ़रत के हैशटैग से नहीं, बल्कि अपने हिसाब से चलती है। ज��स वर्ग को मिटाने के नारे लग रहे थे, उसी का चेहरा व्यवस्था का संचालन करने कुर्सी पर आ बैठा। @narendramodi जी आपने ठीक नहीं किया । तेलचट्टे सीधे नहीं हो पाएंगे।
Meet the new Education Minister, Pralhad Joshi!
वामपंथी लॉबी की खुशी 24 घंटे भी नहीं टिक पाई।
मोदी जी ने मानो साफ़ संदेश दे दिया—"Not today."
यही है RSS।
जिसकी जड़ें इतनी गहरी हैं कि स��य आने पर खेल का पूरा समीकरण बदल देती हैं।
झारखंड की राजनीति में इन दिनों गजब का ड्रामा चल रहा है। झारखंड की राजनीति के दो नकारे @INCJharkhand_ और @BJP4Jharkhand राज्य की मिट्टी में अपनी ���ोई हुई साख तलाशने के लिए ऐसा तमाशा कर रहे हैं, जिसे देखकर लोग कह रहे हैं बारात कब की विदा हो चुकी है, पर ये लोग चौराहे पर बैठकर अभी भी ढोलक बजा रहे हैं। @JmmJharkhand के सहारे सत्ता का सुख भोगने वाले जब सड़कों पर 'संघर्ष' का नाटक करते हैं, ��ो वो जन-आक्रोश नहीं, सिर्फ अपनी गिरती साख को बचाने की एक बेबस कोशिश लगती है।
झारखंड के लोगों ने दोनों ही दलों को यह साफ संदेश दे दिया है कि केंद्रीय आलाकमान के इशारों पर चलने वाली राजनीति यहाँ नहीं बिकने वाली। लेकिन साख बचाने का दबाव ऐसा है कि काम तो इन्हें कुछ दिख नहीं रहा, बस हंगामा ही एकमात्र रणनीति बच गई है।
हकीकत यह है कि दोनों दलों के पास न तो कोई ठोस स्थानीय विज़न है और न ही राज्य के लोगों के दिलों में जगह। झारखण्ड में इनकी हैसियत सिर्फ इतनी रह गई है कि ट्विटर पर एक-दूसरे को नीचा दिखा सकें और फेसबुक पर झंडे फहरा सकें।
यह झारखंड के अधिकार की लड़ाई नहीं, बल्कि कौन कितना बड़ा रील्स स्टार है उसकी होड़ है। दोनों दलों को यह गलतफहमी है कि दो घंटे सड़क जाम करके और रील्स बनाकर वे झारखंड की जमीन पर दो��ारा पैर जमा लेंगे। यहाँ की जनता अब ड्रामेबाज़ी पर नहीं, काम पर 2019 से @JmmJharkhand को नंबर दे रही है।
रोड जाम करके लोगों का वक्त बर्बाद करने से वोट बैंक नहीं बनता, सिर्फ लोगों का गुस्सा बढ़ता है।
ज़मीन गायब, मुद्दा गायब... बस कैमरा चालू
अपन् खेत में धान रोपले, त समझ में आवत रहे, मुद्दा-सौदा सब सिराय गेलक, आब ख़ाली द���खावा ले 'रोपनी खेल' चलत है…
जरा face उठाइयेगा तो
मैं तकनीकी रूप से इस योजना की लाभार्थी नहीं हूँ, फिर भी सरकार की इस पहल की सराहना करती हूँ।मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के जरिए झारखंड की लाखों बहनों को हर साल ₹30 हजार का हक मिल रहा है।
यह राशि बहनों को विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का संबल दे रही है और उनके कदम आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ चले ���ैं। आधी आबादी को पिछले दो वर्ष से आर्थिक रूप से सशक्त करने के इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी का आभार।
झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत रांची जिले में कुल 3 लाख 87 हजार 195 लाभुकों के मध्य कुल ₹290 करोड़ 39 लाख 62 हज़ार 500 की सम्मान राशि का भुगतान कर दिया गया है।
द्वितीय चरण में ईटकी प्रखण्ड और बड़गाईं अंचल के लाभुकों को भी एक साथ अप्रैल से जून 2026 तक की सम्मान राशि (7500 रूपये) का भुगतान कर दिया गया। ईटकी प्रखण्ड के 10327 और बड़गाईं अंचल के 10204 लाभुकों के मध्य 15 करोड़ 39 लाख 82 हजार 500 की सम्मान राशि का आधार बेस्ड (DBT) के माध्यम से भुगतान किया गया।
इसके साथ ही दोनों चरण मिलाकर कुल 3 लाख 87 हज़ार 195 लाभुकों को कुल ₹290 करोड��� 39 लाख 62 हज़ार पाँच सौ भुगतान किया गया। इससे पहले प्रथम चरण में जिले की 3 लाख 66 हज़ार 664 लाभुकों के मध्य अप्रैल 2026 से जून 2026 तक की 03 माह की सम्मान राशि कुल ₹274 करोड़ 99 लाख 80 हज़ार का भुगतान किया गया था।
@prdjharkhand
@JharkhandCMO
@HemantSorenJMM
@mbhajantri
जब टाटा, गूगल और जिंदल जैसे बड़े नाम झारखंड के साथ हाथ मिला रहे हैं, तो समझिए ��ि हमारे युवाओं के लिए अवसरों के नए दरवाजे खुल रहे हैं।
विशेषकर AI और IT के क्षेत्र में जो यह निवेश हो रहा है, अगर यह सचमुच धरातल पर उतर आया तो बदलते समय के साथ यहाँ की फ़िज़ा ही बदल जाएगी। हमारी वर्तमान युवा पीढ़ी और आने वाली नन्हीं पीढ़ी भी तकनीक के मामले में दुनिया के बड़े-बड़े शहरों के बच्चों से कंधे से कंधा मिलाकर, बराबरी से पंजा लड़ा सकेगी।
एक आम नागरिक के तौर पर अपने राज्य को आत्मनिर्भर, हा��-टेक और मजबूत बनते देखना बहुत गर्व देता है। यही तो है हमारे सपनों का सोना झारखंड।
@TataCompanies @JindalSteel_In @Google #AI #IT #Investment
National Stakeholders Consultation 2026 समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित झारखंड की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
चौथे सत्र में Green Steel, Renewable Energy, Nuclear Energy, Food Processing, AI, Digital Governance सहित अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में Jindal Group, Tata Group, Varun Beverages, Google, EaseMyTrip एवं अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ हजारों करोड़ रुपये के निवेश से जुड���े महत्वपूर्ण MoUs पर हस्ताक्षर हुए।
यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आज देश और दुनिया की अग्रणी कंपनियाँ झारखंड की अपार संभावनाओं पर भरोसा जता रही हैं और यहाँ निवेश कर विकास की नई साझेदार बनना चाहती हैं।
इन साझेदारियों के माध्यम से नए उद्योग, व्यापक रोजगार और सतत विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। यही विकसित, समृद्ध और अवसरों से परिपूर्ण Vision 2050 के झारखंड की मजबूत नींव है।
सभी निवेशकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों एवं साझेदारों का हार्दिक अभिनंदन, बधाई एवं जोहार।
@HemantSorenJMM
झारखण्ड को आज चुनावी मौसम में परोसे जाने वाले डर की नहीं, बल्कि राज्य के हक और अधिकार के लिए @HemantSorenJMM जैसी एक लंबी लकीर खींचने वाले सकारात्मक विजन की जरूरत है। @BJP4India जनसांख्यिकी बदलाव और घुसपैठ का शोर मचा रही हैं, उन्हें सबसे पहले राज्य की जनता को यह जवाब देना चाहिए कि झारखण्ड के गठन के बाद लगभग दो दशकों तक जब यहां BJP का शासन रहा, तब उन्होंने इस कथित घुसपैठ को रोकने के लिए क्या किया। इतने लंबे कार्यकाल के बाद भी अगर यह मुद्दा आज भी बना हुआ है, तो यह उनकी नीतिगत विफलता और राजनीतिक अवसरवाद को दर्���ाता है।
वैसे भी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा और अवैध प्रवासियों की पहचान का जिम्मा पूरी तरह से के���द्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आता है, जहां पिछले एक दशक से अधिक समय से उनकी अपनी सरकार मजबूत स्थिति में है।
झारखण्ड को एक "अधूरा एजेंडा" बताकर राजनीतिक जमीन तलाशने की बात कही जा रही है, उसके विपरीत झारखण्ड की जनता अब जागृत है। राज्य को विभाजनकारी राजनीति के चक्रव्यूह में फंसाने के बजाय आज @JMMKalpanaSoren और मौजूदा गठबंधन के उस सकारात्मक विजन की जरूरत है जो जल, जंगल, जमीन, 1932 खतियान, रोजगार, सरना धर्म कोड, मूलवासियों को पहचान देने जैसे मूल मुद्दों पर आधारित हो ताकि झारखण्ड बाहरी एजेंडों की भेंट चढ़ने के बजाय तरक्की की राह पर आगे बढ़ सके, जैसे वर्तमान में आगे बढ़ रहा है।
@JmmJharkhand @BJP4Jharkhand
गणपति बप्पा की सवारी मूषक राज के कान में अपनी मन्नतें और प्रार्थनाएं कहने की परंपरा सदियों पुरानी है।
ऐसे में एक खूबसूरत नजारा देखने को मिला, जहां सत्ता प���्ष की विधायक @JMMKalpanaSoren मूषक राज के कान में अपनी बात कह रही हैं और दूसरी तरफ से विपक्ष की महिला विधायक @sahupurnima0818 ने स्नेहपूर्वक दूसरा कान बंद किया है, ताकि प्रार्थना सीधे ईश्वर तक पहुंचे।
राजनीति से परे, एक बेहद खूबसूरत और जीवंत तस्वीर है।
आदिवासी समाज की एक विशिष्ट पहचान उनकी अनूठी परंपराओं, प्रकृति पूजा (सरना धर्म) और उनके सामाजिक नियमों से जुड़ी है। जब @OraonNesha
जैसी उच्च पद पर बैठी महिलाएं जमीन पर जाकर समाज को जागरूक करतीं हैं, तो इससे युवा पीढ़ी में अपनी जड़ों के प्रति गौरव का भाव जागता है। यह कार्य किसी के विरोध में नहीं, बल्कि आदिवासियों की समृद्ध विरासत को लुप���त होने से बचाने और उसे अक्षुण्ण रखने के लिए किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से आदिवासी समाज के दीर्घकालिक हित में है।
यह नेतृत्व आदिवासी समुदाय को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में सहायक साबित हो सकता है।
अगर चर्च में पादरी का धर्���ांतरण हो जाए , तो क्या वह पादरी बना रह सकता है ? इसी प्रकार अगर पाहन का धर्मांतरण हो जाता है , तो वह पाहन पद क्यों नहीं छोड़ रहा है ?
👉🏽दरअसल पाहन को अपनी जिम्मेदारियों के बदले , पहनाई ज़मीन दी जाती है । इसी ज़मीन के लालच के कारण पद नहीं छोड़ा जा रहा है
👉🏽उसी प्रकार अन्य पारंपरिक पद के भी लाभ के लालच में , पद नहीं छोड़ा जा रहा है
👉🏽ग्राम सभा केवल प्रशासनिक केंद्र नहीं है - वह धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र भी है !
👉🏽इन आदिवासी पारंपरिक पद पर बैठे धर्मांतरित ��दिवासी , सामाजिक जिम्मेदारी तो निभा लेते हैं , लेकिन धार्मिक जिम्मेदारी नहीं निभा पाते हैं
👉🏽 धर्मांतरित आदिवासी को स्वेच्छा से पद को छोड़ देना चाहिए । दोहरा मापदंड नहीं चलेगा ।
झारखण्ड का 'अछूता' रहना उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी विशिष्टता है। यह इस बात का प्रमाण है कि झारखण्ड की रगों में आज भी संघर्ष का खून दौड़ता है। चारों तरफ @BJP4India भाजपा मय वातावरण के बीच झारखण्ड का अपनी पहचान बचाए रखना यह बताता है कि यहां केवल नारे नहीं, बल्कि इस मिट्टी से जुड़े @JmmJharkhand के इरादे चलते हैं। यहां की जनता ने दिखावे की राजनीति के बजाय अपने झारखण्ड के सिपाही #JMM पर भरोसा जताया है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम में आधी आबादी को सिर्फ 33% आरक्षण क्यों? 50% क्यों नहीं? जब देश की प्रगति में महिलाओं का योगदान बराबर का है, तो नीति-निर्धारण में उनकी हिस्सेदारी जनसंख्या के अनुपात में क्यों नहीं?
@JMMKalpanaSoren की यह मांग केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं की आकांक्षा है।
माटी कर बोली,संसद में गूंजक...
झारखंड कर बेटी,नवा इतिहास लिखलक।
रांची(कांके)की बेटी संदीपा कुमारी बेदिया ने संसद में नागपुरी भाषा में संबोधन देकर हम सभी को गौरवान्वित किया है।बाबा साहेब की जीवनी को अपनी मातृभाषा में पिरोकर उन्होंने बता दिया कि हमारी संस्कृति.1/2
@HemantSorenJMM
नेतृत्व जब संवेदनशीलता के रूप में सामने आता है, तब वह @JMMKalpanaSoren जैसा दिखता है।
क्षेत्र की माताओं-बहनों की आँखों की व्यथा को प���़ना और उनके संघर्ष को अपना मानकर उनके साथ खड़े होना, इस संवेदनशीलता की परिभाषा है।
जब @JMMKalpanaSoren किसी बुजुर्ग माँ का झुर्रियों भरा हाथ थामती हैं, तो वह केवल एक मुलाकात नहीं, बल्कि भरोसे का जीवंत संगम होता है।
@JmmJharkhand @JMM_Giridih #womensempowerment #Women
झारखण्ड से लेकर असम तक फैले साझा स्वाभिमान की गूंज…
ना डरना, ना झुकना और ना ही पीछे हटना, यही वह मंत्र है जो आज असम की फिजाओं में गूंज रह��� है और एक नए राजनीतिक युग की आहट दे रहा है।
झारखण्ड की दहाड़ @JMMKalpanaSoren असम की धरती पर खड़े होकर लगातार साबित कर रहीं हैं कि जब इरादों में मजबूती हो, तो पूरा समाज एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो जाता है।
@JmmJharkhand @JMM_E_Singhbhum #AssamElections #Jharkhand
असम के तिनसुकिया में मंच प�� पहुँचने से पूर्व आदिवासी महिलाओं ने अपनी पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार 'लोटा-पानी' देकर @JMMKalpanaSoren का स्वागत किया। यह दर्शाता है कि दूरी चाहे कितनी भी हो, हमारी जड़ें और संस्कार हमेशा एक रहेंगे।असम की इस माटी में दशकों से रह रहे आदिवासी भाई-बहनों ने आज भी अपनी संस्कृति और परंपराओं को सीने से लगाकर रखा है। लेकिन यह कैसी विडंबना है कि जो समाज झारखण्ड में आदिवासी है, उसे असम में वह संवैधानिक दर्जा औ��� सम्मान नहीं मिला?
यही वह सवाल है जिसे @JMMKalpanaSoren ने असम की धरती में मुखरता के साथ उठाया है…
@JmmJharkhand @JMM_E_Singhbhum #AssamElections
राजनेता वही है जो हार-जीत के समीकरणों से ऊपर उठकर जनता के बुनियादी मुद्दों को विमर्श के केंद्र में ले आए। असम के चाय बागानों में @JMMKalpanaSoren ने श्रमिकों के पारिश्रमिक और अधिकारों को जिस तरह चुनावी मुद्दा बनाया है, उसने @assambjp को सोचने पर मजबूर कर दिया है। चुनावी परिणाम चाहे जो भी हों, श्रमिकों के जीवन में आने वाला सुधार @JMMKalpanaSoren की वैचारिक जीत का प्रमाण होगा। आदिवासी भाई-बहनो�� के हक, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य के लिए उनका संघर्ष एक नई शुरुआत की ओर इशारा कर रहा है।
#Dibrugarh #AdivasiRights #AssamElections #AssamElections
2024 में झारखण्ड के चुनावी समीकरणों को ध्वस्त करने वाला नेतृत्व अब देश के वंचितों को एकजुट कर रहा है। झारखण्ड की क्रांति अब असम के चाय बागानों तक न्याय का सेतु बनाएगी।@JMMKalpanaSoren अब राष्ट्रीय पटल पर एक नई क्रांति का सूत्रपात कर रहीं हैं…
@JmmJharkhand@JMM_E_Singhbhum #AssamElections #Leader