सरकार की इस मनमानी और कर्मचारी विरोधी RGHS नीति का हम सामूहिक रूप से विरोध करते है कैशलैस सुविधा खत्म करना तर्कहीन है भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा इलाज अधिक महंगा होगा प्रोसेस में समस्या उत्पन्न होगी। यदि य��� कर्मचारी विरोधी निर्णय थोपा जाता है तो प्रदेश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
अभय सिंह उर्फ़ IITian बाबा की कहानी एक असाधारण परिवर्तन की दास्तान है। बचपन से ही तेजस्वी दिमाग वाले अभय ने IIT बॉम्बे से बी.टेक किया और क��ाडा में सालाना 36 लाख के पैकेज पर नौकरी की। उनके जीवन में हर वह चीज़ थी जिसे समाज “सफलता” मानता है।
लेकिन, उनकी इस बाहरी चमक-दमक भरी ज़िंदगी के पीछे एक गहरी व्यक्तिगत उथल-पुथल थी। उन्होंने खुद स्वीकारा कि वे दारू, सिगरेट जैसी बुरी आदतों में फंसे थे और उनकी एक गर्लफ्रेंड भी थी। शादी और रिश्तों से उनका भरोसा इसलिए उठ गया क्योंकि उनके माता-पिता के बीच लगातार झगड़े होते थे।
इन सबके बीच, अभय को महस���स हुआ कि भौतिक सुख और बाहरी सफलता जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है। जब दुनिया के प्रति उनका विश्वास डगमगाया, तो उन्होंने आध्यात्म का मार्ग अपनाया और सत्य की खोज में निकल पड़े।
आज, “IITian बाबा” के नाम से जाने जाने वाले अभय सिंह संन्यासी बनकर समाज को जीवन के गहरे अर्थ और ईश्वर से जुड़ने की प्रेरणा दे रहे हैं। उनका यह सफर कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह बताता है कि सच्ची शांति बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि आत्मा की खोज में है।
नाम: अभय सिंह
योग्यता: B. Tech IIT Bombay
पद: संन्यासी
काम: आध्यात्म के मार्ग से सत्य की खोज
अभय सिंह उर्फ़ IITian बाबा कनाडा में भी नौकरी करके आए, वहां इन्हें साल का 36 लाख का पैकेज था मगर
इन्होंने उसे छोड़ दिया, यही नहीं इन्होंने स्वयं कबूला है कि
इनकी 4 साल तक एक गर्ल फ्रेंड भी रही है, यह दारू, सिगरेट सबकुछ पीते थे,
इनका शादी से भरोसा इसलिए उठा क्योंकि इनके पेरेंट्स आपस में लड़ाई करते थे जब
हर जगह दुनि��ा से भरोसा उठा तो अभय सिंह ने संन्यास का मार्ग अपना लिया और ईश्वर की खोज में निकल पड़े।
अलविदा सिंह साहब 🙏
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- 1991 और 2008 में भारत को आर्थिक संकट से बचाया
भारत ने आज अपना असली रत्न खो दिया,
विनम्र श्रद्धांजलि 💐