“नए भारत” में यह छुआछूत का एक नया रूप प्रतीत होता है। यदि उत्तराखंड सरकार इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करती, तो कांग्रेस को इस विफलता को उजागर करने और उत्तराखंड सरकार की वास्तविक मंशा से जनता को अवगत कराने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए।
“नए भारत” में यह छुआछूत का एक नया रूप प्रतीत होता है। यदि उत्तराखंड सरकार इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करती, तो कांग्रेस को इस विफलता को उजागर करने और उत्तराखंड सरकार की वास्तविक मंशा से जनता को अवगत कराने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए।
“नए भारत” में यह छुआछूत का एक नया रूप प्रतीत होता है। यदि उत्तराखंड सरकार इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करती, तो कांग्रेस को इस विफलता को उजागर करने और उत्तराखंड सरकार की वास्तविक मंशा से जनता को अवगत कराने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए।
“नए भारत” में यह छुआछूत का एक नया रूप प्रतीत होता है। यदि उत्तराखंड सरकार इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करती, तो कांग्रेस को इस विफलता को उजागर करने और उत्तराखंड सरकार की वास्तविक मंशा से जनता को अवगत कराने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए।
“नए भारत” में यह छुआछूत का एक नया रूप प्रतीत होता है। यदि उत्तराखंड सरकार इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करती, तो कांग्रेस को इस विफलता को उजागर करने और उत्तराखंड सरकार की वास्तविक मंशा से जनता को अवगत कराने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए।
“नए भारत” में यह छुआछूत का एक नया रूप प्रतीत होता है। यदि उत्तराखंड सरकार इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करती, तो कांग्रेस को इस विफलता को उजागर करने और उत्तराखंड सरकार की वास्तविक मंशा से जनता को अवगत कराने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए।
“नए भारत” में यह छुआछूत का एक नया रूप प्रतीत होता है। यदि उत्तराखंड सरकार इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करती, तो कांग्रेस को इस विफलता को उजागर करने और उत्तराखंड सरकार की वास्तविक मंशा से जनता को अवगत कराने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए।
“नए भारत” में यह छुआछूत का एक नया रूप प्रतीत होता है। यदि उत्तराखंड सरकार इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करती, तो कांग्रेस को इस विफलता को उजागर करने और उत्तराखंड सरकार की वास्तविक मंशा से जनता को अवगत कराने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए।
“नए भारत” में यह छुआछूत का एक नया रूप प्रतीत होता है। यदि उत्तराखंड सरकार इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करती, तो कांग्रेस को इस विफलता को उजागर करने और उत्तराखंड सरकार की वास्तविक मंशा से जनता को अवगत कराने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए।
“नए भारत” में यह छुआछूत का एक नया रूप प्रतीत होता है। यदि उत्तराखंड सरकार इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करती, तो कांग्रेस को इस विफलता को उजागर करने और उत्तराखंड सरकार की वास्तविक मंशा से जनता को अवगत कराने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए।
“नए भारत” में यह छुआछूत का एक नया रूप प्रतीत होता है। यदि उत्तराखंड सरकार इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करती, तो कांग्रेस को इस विफलता को उजागर करने और उत्तराखंड सरकार की वास्तविक मंशा से जनता को अवगत कराने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए।
कानून की अवहेलना करने पर न्यायसंगत दंड का प्रावधान इसलिए होता है ताकि लोगों में कानून तोड़ने का भय बना रहे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अपराधियों के बीच यह भय लगातार कम होता दिखाई दे रहा है।
इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि आज अपराधियों को जेल जाने का डर नहीं लगता। बल्कि कई मामलों में वे जेल को ही अधिक सुरक्षित ठिकाना समझने लगे हैं। कुछ कुख्यात अपराधी तो जेल में रहते हुए भी अपने "अपराध का साम्राज्य " बाहर से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से चला पाते हैं।
जब जेल अपराधियों के लिए सज़ा का स्थान न रहकर सुरक्षित ठिकाना बन जाए, तो यह कानून के शासन के लिए बेहद गंभीर चिंता का विषय है।
“नए भारत” में यह छुआछूत का एक नया रूप प्रतीत होता है। यदि उत्तराखंड सरकार इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करती, तो कांग्रेस को इस विफलता को उजागर करने और उत्तराखंड सरकार की वास्तविक मंशा से जनता को अवगत कराने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए।
कानून की अवहेलना करने पर न्यायसंगत दंड का प्रावधान इसलिए होता है ताकि लोगों में कानून तोड़ने का भय बना रहे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अपराधियों के बीच यह भय लगातार कम होता दिखाई दे रहा है।
इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि आज अपराधियों को जेल जाने का डर नहीं लगता। बल्कि कई मामलों में वे जेल को ही अधिक सुरक्षित ठिकाना समझने लगे हैं। कुछ कुख्यात अपराधी तो जेल में रहते हुए भी अपने "अपराध का साम्राज्य " बाहर से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से चला पाते हैं।
जब जेल अपराधियों के लिए सज़ा का स्थान न रहकर सुरक्षित ठिकाना बन जाए, तो यह कानून के शासन के लिए बेहद गंभीर चिंता का विषय है।
फिर इससे तो @kpmaurya1 जी, आप लोगों को कोई दिक्कत नहीं होगी! देश की आज़ादी के संघर्ष में @RSSorg की भूमिका के बारे में आप लोगों को आख़िर क्या बता पाएँगे?
यही कि जिस आज़ादी के लिए शहीद-ए-आज़म भगत सिंह ने हँसते-हँसते फाँसी का फंदा चूम लिया, उसी आज़ादी की लड़ाई में आपके वाले पेंशन माँग रहे थे!
@myogiadityanath जी, वैसे तो सुनने में आया है कि आपकी @RSSorg वालों से कम ही बात होती है। फिर भी कभी बात हो तो एक बार पूछ लीजिएगा कि उन्हें तिरंगा फहराने में 50 साल क्यों लग गए!
वैसे, जिस शिद्दत से @AmitShah जी आपके पीछे लगे हैं, उससे तो लगता है कि आपको नागपुर के चक्कर लगाने ही पड़ेंगे! 😉
कांग्रेस के समय में घर पर तिरंगा लगाने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ती थी,
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने 140 करोड़ भारतीयों को घर के ऊपर तिरंगा लगाने की आजादी दी...
@myogiadityanath जी, वैसे तो सुनने में आया है कि आपकी @RSSorg वालों से कम ही बात होती है। फिर भी कभी बात हो तो एक बार पूछ लीजिएगा कि उन्हें तिरंगा फहराने में 50 साल क्यों लग गए!
वैसे, जिस शिद्दत से @AmitShah जी आपके पीछे लगे हैं, उससे तो लगता है कि आपको नागपुर के चक्कर लगाने ही पड़ेंगे! 😉