आज देश और पंजाब ने एक सुंदर और शानदार कवि को खो दिया। सुरजीत पातर अब हमारे बीच नहीं हैं।
इतिहास तो हर पीढ़ी लिखेगी
बार-बार पेश होंगे
मर चुके
जीवितों की अदालत में
बार-बार उठाए जाएँगे क़ब्रों से कंकाल
हार पहनाने के लिए
कभी फूलों के
कभी काँटों के
समय की कोई अंतिम अदालत नहीं
और इतिहास आख़िरी बार कभी नहीं लिखा जाता ।
( हिन्दवी की साइट से कविता ली है)
अपने प्यारे कवि को अलविदा कैसे कह दूँ । उसकी कविताओं को ख़ुद से जुदा कैसे कर दूँ ।
आप याद आएँगे पातर साहब। आपकी रचनाओं का पंजाब, आपका संसार हमेशा हमें बेहतर बनने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
इंडियन एक्सप्रेस में पारुल कुलश्रेष्ठ ने राजस्थान से रिपोर्ट की है। अग्निपथ योजना के बाद से कूचामन क़स्बा में कोचिंग और ट्रेनिंग संस्थान बंद हो गए। पहले यहाँ प्रदेश भर से नौजवान कोचिंग और ट्रेनिंग के लिए आते थे। पारुल की रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में नौजवानों ने सेना में जीवन बनाने का सपना छोड़ दिया है। यह ख़बर पहले पन्ने पर छपी है । तो नौजवान कर क्या रहे हैं? जहां एक हॉस्टल में पंद्रह सौ लड़के तैयारी करते थे वहाँ अब 150 रह गए हैं। चार साल की नौकरी का यह फ़ार्मूला वाक़ई ग़ज़ब का है। पूर्व सेनाध्यक्ष की जो किताब आ रही थी, जिसमें अग्निवीर के बारे में काफ़ी कुछ कहा गया था, उस किताब का क्या हुआ? पूर्व सेनाध्यक्ष को भी अपनी किताब की फ़िक्र नहीं? नवंबर से अप्रैल आ गया। उन्हें तो बोलना चाहिए।
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