क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संधर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही।
वरदान माँगूँगा नहीं।।
- शिवमंगल सिंह सुमन
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��्रेम सकल श्रुति-सार है प्रेम सकल स्मृति-मूल।
प्रेम पुरान-प्रमाण है कोउ न प्रेम के तूल॥
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र 💫
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आओ वापस चलें
रात के रास्ते पर वहाँ
नींद की बस्तियाँ थीं जहाँ
ख़ाक छानीं
कोई ख़्वाब ढूँडें
कि सूरज के रस्ते का रख़्त-ए-सफ़र ख़्वाब है
और इस दिन के बाज़ार में
कल तलक
ख़्वाब कमयाब था
आज
नायाब है
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If someone asks why poetry is important, tell them that only poets can take all the love and heartbreak of the world and give it words that we can understand.
@AmritaPritam_
साग़र की अपनी क्षमता हैं,
पर मांझी भी क़ब थकता हैं,
ज़ब तक सासों में स्पन्दन हैं,
उसका हाथ नही रुक़ता हैं।
- शिवमंगल सिंह 'सुमन'
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