मुझे अच्छा लगा ये वीडियो, so sharing with you all.
राम को न भुलाओ, मतलब? जब भी कुछ पाने के लिए कपट, छल, पाप करो तो याद रहे ईश्वर देख रहा है���
कठिन मगर सच की राह चुनो।
इसे अपने भाई बहनों से भी शेयर करो।
Hey @JioMart and @JioMart_Support! 👋 I received a product that's missing crucial manufacturing and expiry dates. This is a safety concern! 😟 Could you please help me with a return or replacement? 🙏 #CustomerService
Telecom Companies ऐसे Recharge Plans offer करती हैं जिनमें ‘Daily Data Limits’ जैसे 1.5GB, 2GB या 3GB per day होती हैं, जो हर 24 hours में reset हो जाती हैं। बचा हुआ data midnight पर expire हो जाता है, जबकि उसके पूरे पैसे पहले ही दिए जा चुके होते हैं।
आपको 2GB के लिए charge किया जाता है। आप 1.5GB use करते हैं। बचा हुआ 0.5GB दिन खत्म होते ही गायब हो जाता है। कोई refund नहीं। कोई rollover नहीं।
मैंने आज यह मुद्दा Parliament में उठाया की जिस data के लिए हमने पूरी payment की है, वो दिन समाप्त होने पर Expire नहीं होना चाहिए।
बचा हुआ data अगले दिन की data limit में carry forward होना चाहिए, ताकि users Data इस्तेमाल कर सकें जिसके लिए उन्होंने पहले ही pay किया है।
संसद में आज मेरी demands हैं -
1.सभी users के लिए Data carry-forward / Data rollover की सुविधा दी जाए। जो data दिन के अंत तक use नहीं होता, उसे अगले दिन की limit में add किया जाए, न कि validity खत्म होते ही ख़त्म कर दिया जाए।
2.अगले महीने के recharge amount ���ें unused data का adjustment का option दिया जाए। अगर कोई user लगातार अपना data under-utilise करता है, तो अगले monthly recharge में उस value का adjustment या discount मिलना चाहिए। users को बार-बार उस लिमिट के लिए pay नहीं करना चाहिए जो वे use ही नहीं करते।
3.Unused data को relatives और friends को transfer करने का option दिया जाए। Unused data को user की digital property मान��� जाना चाहिए। उपभोक्ता को अपने daily data limit से unused data दूसरों को transfer करने की permission होनी चाहिए, बिल्कुल उसी तरह जैसे पैसे transfer किए जा सकते हैं।
आज मोबाइल डेटा कोई luxury नहीं, Digital oxygen बन चुका है। टेलीकॉम कंपनियों की ये लूट बंद होनी चाहिए।
राघव चड्डा ने पार्लियामेंट में कंज्यूमर अधिकार से जुड़ा बेहद अहम और बुनियादी मुद्दा उठाया.
राघव चड्डा ने कहा, यूजर अपने मोबाइल फ़ोन पर जब डेली डाटा रिचार्ज कराता है, तो रिचार्ज प्लान के हिसाब से डाटा यूज लिमिट मिलती है,
यूजर का 1.5 GB, 2 GB य��� 3 GB डाटा रात को 12 बजे EXPIRE हो जाता है, यूजर का बचा हुआ डाटा कैरी फॉरवर्ड नही होता.
राघव चड्डा ने कहा, यूजर हर डाटा या प्लान पूरा पैसा देता है. अगर 3 GB में 1 GB डाटा बच जाता है तो उसे यूजर को दूसरे दिन मिलना चाहिए.
Monthly प्लान में कंपनी किस तरह डाटा लूट रही है, राघव चड्डा जी का पूरा वीडियो सुनिए. अक्सर हम सबका 30% या 40% तक डाटा बच ही जाता है. इस बचे हुए डाटा पर यूजर का ही अधिकार होना चाहिए.
🚨आवाज़ उठाओ – अब बदलाव जरूरी है!🚨
नौकरी करने वाले का महीना 30 से 31 दिन का होता है,
दूध वाले का महीना भी 30 से 31 दिन का होता है…!
लेकिन मोबाइल रिचार्ज कराने वाले का महीना 28 दिन का क्यों?
हर बार 349 -399 रुपये का रिचार्ज,
और साल में 12 नहीं बल्कि 13 बार Sim Recharge कराना क्या ये सही है?
क्या आम जनता से ऐसे ही ज्यादा पैसा लिया जाएगा?
अगर आप भी चाहते हैं कि
✅ रिचार्ज 28 दिन की जगह 30 दिन का हो
✅ Incoming कॉल हमेशा फ���री रहे
तो अब चुप मत रहो…
अपनी आवाज उठाओ और इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा से ज्यादा Repost करें
एकजुट होंगे तभी बदलाव आएगा! #RaghavChadha
आज मेरे घर में चीनी खत्म हो गई थी सोचा, बाहर जाने से अच्छा है Blinkit से ऑर्डर कर दूँ।
मोबाइल उठाया, double क्लिक किए, और स्क्रीन पर दिखा....
10 मिनट में डिलीवरी।
मन में सुकून �� गया। अपने काम में लग गई।
लेकिन आज के वो 10 मिनट
हम सब अब इसी के आदी हो गए हैं। एक बटन दबाया,
और मान लिया ��ब सामने वाला इंसान नहीं,एक मशीन काम करेगी।
समय पर आए तो ठीक,और अगर दो-चार मिनट भी देर हो जाए
तो गुस्सा, शिकायत, या ऑर्डर कैंसल। आज भी दरवाज़े पर दस्तक हुई
लेकिन समय से थोड़ी देर बाद।
दरवाज़ा खोला तो सामने एक लड़का खड़ा था।
उम्र बहुत ज़्यादा नहीं,
लेकिन चेहरे पर ज़िम्मेदारियों की शिकन थीं।
उसकी साँसें तेज़ थीं, हाथ हल्के काँप रहे थे, और आँखें
जैसे बहुत कुछ कहना चाह रही हों।
मैंने सामान लिया। लेकिन जाने क्यों मुँह से बस एक ही सवाल निकला
सब कुछ ठीक है?
आप बहुत परेशान लग रहे हो
बस यहीं उसका सब्र टूट गया।
उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। बिना आवाज़ के।
जैसे किसी ने सालों से
रोने की इजाज़त ही नहीं दी हो। थोड़ी देर बाद बोला मैम
आज तक किसी ने ये नहीं पूछा।
ले�� होने पर लोग सिर्फ गुस्सा करते हैं।
कभी सामान लौटा देते हैं,
कभी ऑर्डर कैंसल।
वो रुक गया।
साँस संभाली।
फिर बहुत धीमी आवाज़ में बोला
मेरी पत्नी हॉस्पिटल में है।
अभी उसकी डिलीवरी है।
फोन आ रहा है
जल्दी आ जाओ
उस पल जैसे समय थम गया।
मेरे सामने कोई डिलीवरी बॉय नहीं खड़ा था।
मेरे सामने एक पति था
जो पिता बनने वाला था।
उसने आगे कहा
रास्ते में ही हॉस्पिटल पड़ता है। सोचा एक बार देख आऊँ।
बस एक प��� लेकिन उसी पल में देर हो गई।
वो शर्मिंदा था।
जैसे उसने कोई गुनाह कर दिया हो।
लेकिन सच्चाई ये थी वो गुनहगार नहीं,
मजबूर था।
एक तरफ उसकी पत्नी दर्द से जूझ रही थी। दूसरी तरफ काम
जिससे घर चलता है।
अगर वो ड्यूटी छोड़ देता
तो शायद नौकरी चली जाती। और अगर देर करता
तो लोगों का गुस्सा झेलना पड़ता।
आज वो बीच में फँसा था परिवार और पेट के बीच।
मैं पूर��� तरह निशब्द थी। आँखें भर आईं।
दिल भारी हो गया।
हम जिन 10 मिनट के लिए लड़ते हैं, चिल्लाते हैं,
कभी-कभी वही किसी की ज़िंदगी के
सबसे अनमोल पलों को छीन लेते हैं।
आज मैंने एक बात समझी हर देर लापरवाही नहीं होती।
हर इंसान लापरवाह नहीं होता। कुछ लोग चुपचाप
अपनी खुशियाँ अपने आँसू और अपने सपने
दूसरों की सुविधाओं के लिए कुर्बान कर रहे होते हैं।
हम कमरे में बैठकर समय गिनते हैं। और कोई सड़क पर
अपनी ज़ि��दगी समेटे भाग रहा होता है।
एक छोटी-सी अपील
अगली बार अगर कोई थोड़ा देर से आए तो गुस्सा करने से पहले
बस एक बार पूछ लीजिए
सब ठीक है?
हो सकता है सामने खड़ा इंसान किसी का पति हो,
किसी का पिता हो, या किसी का बेटा
जो अपनी ज़िम्मेदारियों के नीचे दबा
बस थोड़ी सी इंसानियत चाहता हो।
क्योंकि हम ग्राहक हैं ,लेकिन वो भी इंसान हैं।
इंसान पहले।
सुविधा बाद में।
~ credit : Surbhi Choubey
चीन की मेट्रो में एक छोटा सा बच्चा गलती से Cold drink गिरा देता है।
फिर चुपचाप बैग से टिशू निकालता है,और खुद ही साफ कर देता है।
कोई डांट नहीं, कोई बहाना नहीं बस जिम्मेदारी का सुंदर एहसास।
ये है असली परवरिश की ताकत। ऐसे बच्चे बड़े होकर दुनिया को और बेहतर बनाएंगे।
@Deepeshpatel87 लड़की के पिता ने अपनी सूझबूझ से लड़की को बताया कि लड़का चाहे किसी भी Caste का हो लेकिन लड़का सही होना चाहिए जो उनकी लड़की को खुश रह सके।
इतनी समझदारी अगर माता पिता दिखाने लग जाएं तो लड़कियां कभी भागकर शादी नहीं करेंगी।
Video 👇 🎥
A proud moment for every Indian, when an educated New York City Mayor #ZohranMamdani repeats the words of educated PM of India #JawaharlalNehru Ji to celebrate his victory.🙏
भारत के लिए विदेश में अपना एकमात्र सैन्य ठिकाना खाली करना कितना बड़ा झटका है
रिपोर्ट: चंदन कुमार जजवाड़े
प्रोड्यूसर: शिल्पा ठाकुर
आवाज़: मानसी ��ाश
एडिट: अदीब अनवर
इस महिला ने दुनिया भर के करोड़ों प्रवासियों की ओर से अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance से इमिग्रेशन और धर्म को लेकर स्पष्ट और सीधा सवाल पूछा - जो सवाल शायद भारतीय मूल के बड़े-बड़े CEO और पावरफ़ुल लोग भी आमने सामने नहीं पूछ पाए।
मैं आपसे यह पूछना चाहती हूँ कि आपकी पत्नी ईसाई नहीं हैं, और मैंने अभी उनके बारे में पढ़ा कि वे खुद को हिंदू मानती हैं।
आप दोनों के तीन बच्चे हैं, जो एक ऐसे परिवार में पले-बढ़ रहे हैं जहाँ संस्कृति, नस्ल और धर्म सब मिश्रित हैं।
तो मेरा सवाल यह है -
आप अपने बच���चों को कैसे सिखाते हैं कि वे आपके धर्म को अपनी माँ के धर्म से ऊपर न रखें?
या फिर आप उन्हें कैसे बताते हैं कि आपके पूर्वज जो अमेरिका में कुछ सौ सालों पहले या कुछ पीढ़ियों पहले आए, वो उनकी माँ की ओर के पूर्वजों से ज़्यादा सही या बेहतर हैं?
और जब आप कहते हैं कि अमेरिका में बहुत ज़्यादा immigrants आ गए हैं - तो यह संख्या किसने तय की? कब यह फैसला लिया गया कि अब काफी लोग आ चुके हैं?
आप लोगों ने हम जैसे लोगों को यहाँ आने का सपना दिखाया, हमने अपनी जवानी, अपना पैसा, अपनी मेहनत इस देश में लगाया, और अब आप कह रहे हैं कि हम ही ज़्यादा हो गए?
हमने आपसे कुछ मुफ्त नहीं माँगा।
हमने काम किया, टैक्स चुकाए, योगदान दिया।
तो अब आप कैसे कह सकते हैं कि
हम यहाँ ज़्यादा हो गए या हमें अब यहाँ नहीं रहना चाहिए?
हम यहाँ कानूनी रूप से आए, आपकी नीतियों, प्रक्रियाओं और फीस का पालन किया, अब आप कह रहे हैं कि हम फिट नहीं होते?
और एक बात -
आप बार-बार ईसाई पहचान की बात करते हैं। लेकिन मैं खुद ईसाई नहीं हूँ -फिर भी मैं यहाँ अमेरिका से प्यार और समर्थन दिखाने बैठी हूँ। तो फिर ऐसा क्यों है कि इस देश से प्यार करने के लिए ईसाई होना ही शर्त बन जाती है? क्यों बार-बार यह सवाल उठता है कि जो ईसाई नहीं हैं, क्या वे सच में अमेरिकी नहीं हैं?
मैं यह सब पूरे सम्मान के साथ पूछ रही हूँ।
मेरा उद्देश्य कोई विवाद खड़ा करना नहीं है।
लेकिन ये सवाल जरूरी हैं।