यही हमारा संकल्प है—हर म़ेहनतकश को सम्मान, हर छोटे व्यवसाय को सुरक्षा और हर परिवार को बेहतर भविष्य क्योंकि जब छोटा आदमी बिना डर के कमायेगा, तभी उत्तर प्रदेश आगे बढ़ पाएगा।
#Vision_India_PDA_Agra_Summit
भविष्यवाणी करनेवाले अपनी पार्टी की भविष्यवाणी करें कि उन्हें भाजपा 75 सीट दे रही है 50 या फिर सिर्फ़ आश्वासन।
इन्होंने भाजपा के गठबंधन से 30 सीटें मिलने की अफ़वाह फैलाकर जो पैसा एडवांस लिया है, वो लोग इन्हें ढूँढ रहे हैं।
भाजपाई विधायक ने जनता को बहलाने के लिए सबके सामने एक भ्रष्ट फ़ूड इंस्पेक्टर को फोन पर नाटकीय चेतावनी दी (लेकिन जनता के चले जाने के बाद उसी फ़ूड इंस्पेक्टर को फिर एक फोन और किया होगा, अपनी हिस्सेदारी के हिसाब के लिए)
विशेष : स्मृत रहे कि इसी भाजपा सरकार ने एक आत्मनिर्भर ग़रीब चायवाले की दुकान बंद कराने के लिए, इसी भ्रष्ट फ़ूड विभाग का गलत इस्तेमाल किया था। भाजपाई ही विभागों को भ्रष्ट करते हैं, फिर दिखावा करते हैं। उस बेचारे ग़रीब चायवाले का दोष सिर्फ़ इतना था कि हमने उसके काम-कारोबार को प्रोत्साहित करने के लिए उसकी दुकान पर चाय पी ली थी। जिन्हें नहीं मालूम, उन्हें बता दें कि उस बेचारे चायवाले पर फ़ूड विभाग द्वारा ये आरोप लगाया गया था कि वो एल्यूमीनियम के बर्तन का इस्तेमाल करता है।
भाजपाइयों को अपने शासनकाल की अंतिम छमाही में ईमानदारी की याद आ रही है। साढ़े नौ साल काटी मलाई, चुनाव आए तो अब जनता की याद आई।
दुकानदार कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
ये हैं असंवेदनशील भाजपा सरकार के ग़ैरज़िम्मेदार और अमानवीय प्रयागराज विकास प्राधिकरण का हृदयहीन कारनामा जिसमें प्रयागराज के सिविल लाइंस में PDA समाज की एक महिला का घर और उस घर के अंदर उसकी बेटी को भी सील कर दिया। ये सब उस समय हुआ जब महिला अपने दूसरे बच्चे को परीक्षा दिलवाने बाहर गई हुई थी।
भाजपा नारी वंदना का यही है असली सच। दोषियों का निलंबन हो और सख़्त दंडात्मक कार्रवाई भी।
घोर निंदनीय!
कोई है?
पंचायती-समाचार :
टिकटार्थियों के बाद अधिकारी और ठेकेदार मिलके कर रहे ‘ढुंढाई पंचायत’
समाचार-विस्तार : कल तक तो ‘अफ़वाही’ मंत्री जी को केवल वो भावी प्रत्याशी ही ढूँढ रहे थे जिनसे इन्होंने टिकट के नाम पर एडवांस वसूल लिया था, लेकिन अब जो जान गये हैं कि ‘30 सीट’ की बात अफ़वाह है। न तो इन्हें एक भी सीट मिल रही है और ले-देकर मिल भी गई तो भी ये जीतनेवाले नहीं हैं।
इनकी सच्चाई बाहर आते ही अब तो सुना है, वो एई, जेई और एएमए अधिकारी और विभागीय ठेकेदार भी इनको ढूँढने के लिए मिल-बैठकर ‘पंचायत’ कर रहे हैं, जिनसे ट्रांसफ़र-पोस्टिंग व कॉन्ट्रैक्ट दिलवाने के नाम पर इन्होंने एडवांस वसूल लिया है।
जिस काली-कमाई के पैसे के बल पर इनके ‘बड़े बोल’ निकल रहे हैं, अब वो पैसा ही इनके ख़िलाफ़ ‘पंचायत’ बैठा रहा है।
CM यानी करप्ट माउथ
• ANI पर गाली।
• सदन में नेता प्रतिपक्ष जैसे वयोवृद्ध को अभद्र शब्दों से संबोधित किया।
• गुरुजनों से अभद्र वाचिक व्यवहार
• मंच से गाली।
• और अब भाषण का यह निम्न स्तर।
आख़िर क्यों?
विज्ञान कहता है की किशोरावस्था में किया गया “वनस्पति” का अत्यधिक सेवन व्यक्ति के बोलने और समझने की छमता को प्रभावित करता है। वही मनोविज्ञान कहता है कि बचपन और किशोरावस्था के अनुभव व्यक्ति की भाषा, व्यवहार और व्यक्तित्व पर गहरी छाप छोड़ते हैं। वही संस्कार आगे चलकर सार्वजनिक जीवन में भी झलकते हैं।
CM के “करप्ट माउथ” होने की वजह शायद यही है।
जिन्हें CM का इतिहास नहीं पता, उनके लिए यह दबाई गई जानकारी है:
• मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय में सहयोग कर रहे थे।
• उस समय उनके पास तीन बसें और एक ट्रक था।
• संभवतः उन्होंने यह भाषिक अभद्रता उसी दौर में, डग्गामार वाहन चलवाते समय सीखी।
• अजय सिंह बिष्ट के पिता श्री आनंद सिंह बिष्ट और गोरखनाथ मठ के पूर्व महंत श्री अवैद्यनाथ जी यानी श्री कृपाल सिंह बिष्ट जी, रिश्ते में भाई बताए जाते हैं।
• कहा जाता है कि बाद में उनके चाचा ने ही उन्हें मठ में बुलाया।
• महंत श्री अवैद्यनाथ जी ने अपने भतीजे अजय सिंह बिष्ट को कुछ ही वर्षों में मठ का उत्तराधिकारी बना दिया।
सवाल उठता है: उत्तराधिकारी के रूप में उन्हीं को क्यों चुना गया? क्या यह केवल योग्यता का निर्णय था या रिश्तेदारी का भी प्रभाव था? पहले मठ की गद्दी मिली, फिर कुछ ही वर्षों में लोकसभा की सीट भी।
स्पष्ट किया जाए कि मठ में महंत चुनने के लिए क्या कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया हुई थी? डग्गामार वाहन चलवाने वाला व्यक्ति क्या 4 वर्षों में ही इतना योग्य हो गया? यदि नहीं, तो क्या इसे ‘पक्षपाती परिवारवाद’ नहीं कहा जाना चाहिए?
और अंत में- पद और परिधान रिश्तों और समय की मदद से मिल सकते हैं, पर भाषा और व्यवहार नहीं।
#असफल_मुख्यमंत्री
#CM_CorruptMouth
‘गुरूरमंद हुक्मरानों’ तक पहुँचे ये आवाज़
सुनो दरवाज़े पर खटखटा रहा है ‘बदलाव’
दरारें पड़ गईं क़िलों में, दरक रही बुनियाद
अब नौजवानों ने भी कर दिया है इंक़लाब!
ज़हरीली साज़िशों से तब तक न निजात मिल पाएगी जब तक केवल शाख पर उँगली उठाई जाएगी और सिर्फ़ वो शाख हटाई जाएगी, असली आज़ादी, तरक़्क़ी और इंसाफ़ तब मिलेगा जब इस गुनाह का असली तना और ज़मीन के अंदर गहरी छुपी दीमकी जड़ उखाड़ी जाएगी।
एक देश-एक आवाज़ मतलब इंक़लाब!
#BJP_बनाम_CJP
जिस युग में पुलिस ही अपराधी बन जाए वही कलयुग है।
माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भाजपा सरकार के समय में हो रही पुलिसिया ज़्यादतियों को देखकर, उप्र की पुलिस व्यवस्था पर जो सख़्त टिप्पणी की है उसे सुनकर तो नैतिक रूप से भाजपा सरकार को शासन करने का कोई अधिकार नहीं बचता है परंतु नैतिकता, निष्पक्षता, सत्यनिष्ठता, ईमानदारी व इंसाफ़ जैसे शब्द भाजपा के शब्दकोश में हैं ही नहीं।
भाजपा राज में पुलिस भाजपा के भ्रष्टाचार की ‘भ्रष्टपुतली’ बनकर, संविधान के स्थान पर अवैधानिक-आपराधिक तरीक़े अपनाकर सत्ता के सियासी फ़ायदे के लिए क़ानून अपने हाथ में ले रही है। भ्रष्ट पुलिसवाले दो बातें याद रखें :
1. भाजपा किसी की सगी नहीं है।
2. संविधान सदैव रहेगा, ये भाजपाई तो अंतिम दौर में हैं। भाजपाई निश्चित रूप से जा रहे हैं और फिर कभी लौटकर आएंगे भी नहीं।
न्याय कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
#असफल_मुख्यमंत्री_उप्र
#पक्षपाती_मुख्यमंत्री_उप्र
‘डबल इंजन’ का दावा करनेवालों की सरकार में डिब्बे ही टूटकर ‘डबल’ हो रहे हैं।
ये तो पहले ही कहा जा रहा था कि भाजपा में सिर्फ़ डबल इंजन ही नहीं डिब्बे भी टकरा रहे हैं। अब लुधियाना से आया ये वीडियो सारा सच बयां कर रहा है। भाजपा का भ्रष्टाचार ही हर चीज़ के निर्माण में घटिया क्वॉलिटी के लिए ज़िम्मेदार है। भाजपा का लालच आम जनता के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
भाजपा की गाड़ी बेपटरी हो गई है।
भाजपा जाए तो देश की तरक़्क़ी वापस पटरी पर आए!