.@BJP4India और @BJP4Bihar के नेताओं से एक प्रार्थना: बेगूसराय से हूँ। वहाँ तीन बड़े उद्योग हैं: बरौनी रिफायनरी है, थर्मल पावर स्टेशन है, उर्वरक यानी खाद कारखाना है।
ये तीनों ही वहाँ के युवाओं के रोजगार की रीढ़ हैं। नरेन्द्र मोदी की नीतियों के कारण तीनों ही उद्योगों का विकास हुआ, फर्टिलाइजर तो पुनर्जीवित हुआ, थर्मल को मॉडरनाइज किया।
सब सही है, पर आपसे आग्रह है, @girirajsinghbjp जी, आपसे विशेष रूप से, कि यहाँ जो ठेकेदार 15000 की सैलरी से पाँच हजार दलाली रख लेते हैं, उससे मुक्ति दिलाइए। बैंक में पैसा आता है, ठेकेदार को निकाल कर पाँच हजार वापस करना होता है।
किसी भी शहर या गाँव में दस हजार में व्यक्ति क्���ा जीएगा, क्या खाएगा, क्या बच्चे पढ़ाएगा। हाल ही में दो-तीन आंदोलन भी हुए, पर वो राष्ट्रीय तो छोड़िए, बिहार के स्तर तक भी नहीं पहुँचे। @samrat4bjp से भी अनुरोध है कि वो कुछ करें।
अगला आंदोलन यदि हुआ तो वह नेशनल न्यूज बन जाएगा। फिर आप नेता को उठा कर फलाने थाने में चुपचाप रखवाते रहिएगा, श्रमिक कार्य ठप्प कर देंगे, करते रहिएगा फिर नेगोशिएशन।
64 दिन बीत चुके हैं, सामान्य वर्ग आत्महत्या कर रहा है, 92% केस साबित नहीं होते, मोदी सरकार क्षीरसागर में शयन कर रही है! उदाहरण देखिए 👇🏻 और शेयर ��ीजिए!
सरकार ने तय किया है कि उन्हें यदि गाली खानी ही है तो सुप्रीम कोर्ट वाले विषय पर खा लेते हैं क्योंकि UGC इनसे सँभल नहीं रहा। यदि ऐसा नहीं है तो SC के CJI द्वारा एक पैराग्राफ पर थर्मोन्यूक्लियर मोड में जाने का और कोई मतलब है ही नहीं।
जज साहब भी जानते हैं कि इस पैराग्राफ में ऐसा कुछ भी नहीं है जो अनुचित है, या पढ़ाया नहीं जाना चाहिए। सरकार जैसे रेंगने लगी है, ताकि हम सब उसे पेलें, उसका औचित्य केवल UGC से ध्यान भटकाना है।
कोई बात नहीं, हम UGC पर कल पुनः लिखेंगे। एक-एक SC/ST एक्ट के कारण हो रही घटना पर लिखते रहें। 8 मार्च को जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में भी चलेंगे। ये दो कौड़ी के डायवर्सन टैक्टिक्स नहीं चलेंगे। याद रखना, हम वो हैं जो तुम्हारा नैरेटिव चलाते रहे हैं, हमे चूतिया मत बनाओ NCERT के नाम पर। हम बनेंगे नहीं।
पतितों की तरह, यूजीसी प्रकरण पर @BJP4India को कुछ सुझाव दे रहा हूँ:
१. धर्मेंद्र प्रधान बिना किसी स्पष्टीकरण के हटाए जाएँ।
२. यूजीसी वाली संसदीय कमिटी में जो भी सदस्य भाजपा के थे, उनमें से जो भी वामपंथियों के साथ कॉम्प्रोमाइज्ड हैं, उन्हें निकाला जाए।
३. अतिमहत्वपूर्ण: सामान्य वर्ग के निर्धन छात्र-छ���त्राओं को अनुसूचित जाति के स्तर ��ी निःशुल्क/सब्सिडी की सुविधा- निःशुल्क कोचिंग, परीक्षा के फॉर्म, हॉस्टल की फीस, कोर्स की फीस आदि SC के समकक्ष। ऐसा करने से किसी को कोई समस्या नहीं होगी।
४. UGC-AICTE को समाप्त करने वाले बिल को बजट सत्र में ही ला कर यह कहें कि पूर्व के जो भी नियम हैं, उन्हें वर्तमान परिस्थितियों के आलोक में समीक्षा के उपरांत ही लागू किया जाएगा एवम् समाज के हर वर्ग का उचित ध्यान रखा जाएगा। कैम्पस को पुलिस थाना नहीं बनने देंगे।
५. हर नेता की भाषा में ‘दलित-वंचित-पीड़ित’ जैसी शब्दावली का लोप और ‘हर वर्ग के लिए समर्पित’ जैसे वाक्यांशों का प्रयोग। टोन में यह बदलाव काफी सहायक सिद्ध होगा।
६. पार्टी के लिए ‘नैरेटिव बनाने वाली’ हर कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द करें, ऑडिट हो कि इ��्होंने कौन सा सर्वे सही किया, किस विषय पर कितना नैरेटिव बनाया, पार्टी के लिए कौन से बीस अकाउंट बनाए जो प्रभावशाली कहे जा सकते हैं। जो कसौटी पर खड़ा उतरे उसे रखें।
७. अम्बेडकर को बाप मानना बंद करें। जितना कर दिए, वही जितनी घृणा उत्पन्न कर रहा है, वह आपसे हैंडल नहीं हो सकेगा।
८. आइटी सेल (के नाम से चलने वाले, या माने जाने वाले) हैंडलों को पार्टी-विरोधी गतिविधि करने से रोकें। उन्हें समझाएँ कि किसी को पर्सनल गाली दे कर पार्टी को सामूहिक क्षति पहुँचाना किस स्तर की मूर्खता है। ऐसे लोगों को बताएँ कि उनकी डिफेंस पार्टी पर कितनी भारी पड़ रही है।
९. वैसी कोई योजना न बनाएँ जिसमें SC/ST/OBC का तुष्टिकरण स्पष्ट दिखे। जिन चीजों को माँगा न जाए, वो दे कर पागल न करें।
१०. कैम्पस और सोशल मीडिया में ब्राह्मण-घृणा फैलाने वाले लोगों पर पुलिसिया ��ार्रवाई, हैंडलों पर भारत में प्रतिबंध। इस बात की स्वीकार्यता हो कि ऐसी कोई बात हो रही है देश में जो नारेबाजी से आरंभ हो कर अब एक ब्राह्मण छात्र को बाथरूम में बंद कर, अग्निशामक से शुष्क कार्बन डाई ऑक्साइड चला कर मारने तक पहुँच चुका है। विक्टिम कार्ड नहीं, उचित कार्रवाई का आश्वासन और एक्शन।
११. हर राज्य में कुकुरमुत्ते की तरह पास होते सामान्य वर्ग के हिन्दुओं को अपराधी बनाने वाले कानून (BC एट्र���सिटी एक्ट) पर आपकी पार्टी के वकील उसका प्रतिकार कोर्ट में करें। या, आप उसे सर्वसमावेशी बनाने पर बल दें कि जातिवादी घृणा का शिकार किसी भी जाति का व्यक्ति हो सकता है।
१२. किसी बड़े नेता द्वारा किसी पॉडकास्ट आदि पर यह स्वीकार कराएँ कि पार्टी की चुप्पी ने बहुत क्षति पहुँचाई, दोनों ही तरफ के लोग अपने हैं, उनके कन्सर्न्स उचित हैं। यह भी कि यह नियमावली वर्तमान परिस्थितियों को देखने की ��गह वामपंथी प्रायोजित विमर्श को सत्य मान कर बनाई गई, जो अनुचित है।
१३. कोर्ट यदि ऐसे मामलों में कोई निर्णय दे, तो उसे पलट कर राजीव गाँधी न बनें।
🔸Story will make you cry and you should
Meet Vaibhav’s Tiwari - a boy supporting his family
Father is in coma, mother can’t leave father
How do we take his story to @myogiadityanath ji
cc @myogioffice
IT cell has no guts to attack those shouting “Azadi Azadi” or “Brahmin teri kabr khudegi.”
But if you demand equality for General Category, you are labeled as “Tukde Tukde” gang.
Counter me with facts & GC policies instead of labeling me and character assassination.
विष्णु तिवारी का जवानी कौन लौटाएगा?
झूठे SC/ST Act में 20 वर्षों की जेल
जब जेल से बाहर आएं तो पूरा परिवार बिखर चुका था
कौन लौटाएगा वह 20 वर्ष?
जमीन बिक गया
बाप मर गया
मां मर गई
जेल के बाहर रिसीव करने वाला कोई नही था
वजह : झूठी SC/ST Act
अब UGC
क्या SC/ST Act कम था?
क्यों हमें बर्बाद करने में लगें हैं? खुद बर्बाद हो जाओगे
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों को मेरा प्रणाम! यह आपके भविष्य की लड़ाई है, आपको ��र तरह से लड़ना होगा। तंत्र आपके विरोध में है परंतु बिना लड़े घुटने टेकने से अच्छा है कि लड़ते हुए छात्र अधिकारों की बात हो। https://t.co/r4zzYRuBT7
ओह! भाजपा लगी हुई है कि संसद सत्र के आरंभ का वीडियो सोशल मीडिया पर चल जाए, पर हो नहीं पा रहा।
जो तुम्हारे लिए निःस्वार्थ भाव से लिखते-बोलते थे, तुमने उसका उपहास किया, ताने कसे, बिका हुआ कहा, कॉन्ग्रेसी और डीप स्टेट एजेंट कहा, तो अब कौन लिखेगा तुम्हारे लिए?
तुम्हारे किस नेता/प्रवक्ता की (अपवादों को छोड�� कर) रत्ती भर की भी ऑर्गेनिक रीच है? जीवन मोदी जी के रीपोस्ट, वीडियो क्लिप्स के पोस्ट, पुष्पगुच्छ के आदान-प्रदान के फोटो लगाने में बीत रहा है, अब तुम्हें भ्रम है कि लोग तुम्हारे साथ हो लें?
‘वंदे मातरम्’ का अपमान दुर्भाग्यपूर्ण है, हम विपक्ष को पेलेंगे, पर आज नहीं। आज हमारे बच्चों के भविष्य की लड़ाई है जो तुम पतितों ने हमारे ऊपर लाद दी है। तुम चला लो नैरेटिव टुटपुँजिए औसत बुद्धि आइटी सेल के सहारे।
*झूठी कंप��लेन करने वालों पर कोई एक्शन नहीं !
* जाति के नाम पर भेदभाव और उत्पीड़न सिर्फ SC ST OBC के लिए ही ग़लत है?
‘ब्राह्मण तेरी कब्र खुदेगी BHU की धरती पर’
‘तिलक तराज़ू और तलवार इन्हें मारो जूते चार’
‘भूरा बाल साफ़ करो’
मैं पूछती हूँ भेदभाव की परिभाषा क्या है ?
क्या वह परिभाषा है जो बताई जा रही है । क्या एक वर्ग इस लायक की दोयम दर्जे का नागरिक बनाया जाए ? क्या एक वर्ग इस लायक हैं की उसके अधिकार छीने जायें ? क्युकी गणना में कम हैं इसीलिए यही इस वर्ग की औक़ात है !
जिसका डर था वही हुआ !
1. समिति का चूरन नहीं चाहिए, वापस लो, संशोधित करो
2. स्पष्ट लिखो कि किसी पर भी जातीय टिप्पणी, राजनैतिक नारेबाज़ी, दीवारों पर ग्रैफ़िटी पर समान दंड होगा, कोई भी 'विशेष कर' जैसे शब्द नहीं
3. जाँच होने तक सुरक्षा दो, बच्चे निलंबित न किए जाएँ
4. कैंपस में पुलिस नहीं चाहिए, जब तक अपराध ��घन्य/गंभीर ना हो
5. झूठा केस बनाने वाले को कॉलेज से निकाला जाए, आर्थिक दंड और जेल (क्योंकि उद्देश्य भविष्य की हत्या होती है)
UGC प्रकरण पर परोक्ष रूप से (मुझे कॉल आया था कहीं से) उनके अपने अधिकारी मान रहे हैं कि बवाल वाला विषय बन गया ये, त्रुटि हुई है। अमित ���ालवीय समेत पूरा परंपरागत आइटी सेल चुप रह कर इग्नोर कर रहा है कि बात दब जाए किसी तरह से।
फिर भी, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अमित मालवीय के डिंपल पर फिदा प्रतीत होते हैं। आदमी क्यूट है, पर इतना भी नहीं कि आप अपनी छवि की क्षति करवा रहे हो कि अगली बार लल्लनटॉप की जगह आपको अमित शाह जी के बगल की कुर्सी मिले!
आप तंत्र से बाहर हैं, यह मानिए। भाजपा को एक्स गर्लफ्रेंड की तरह ट्रीट मत कीजिए कि देखो मैं नस काट रहा हूँ तुम्हारे लिए। वो नहीं आने वाली। @BJP4India को धागे भर अंतर नहीं पड़ता कि कौन डिफेंड कर रहा है, कैसे कर रहा है, क्यों कर रहा है। वो महाराष्ट्र-हरियाणा-बिहार की खुमारी में हैं।
जो अच्छी नीतियाँ हैं, समर्थन था और रहेगा। जहाँ हगेंगे तो हम जियोटैग कर के फोटो भेजेंगे। आप हैं कि ‘मालिक ये ट्रिपल प्लाय का सॉफ्ट ट्वायलेट पेपर है, बहुत अच्छा पोंछता है।’ हद है भाई!
@ugc_india ने जो किया है, वह नीचत��� है। @dpradhanbjp ने आँख पर खीरे की स्लाइस रख कर, उस पर तारकोल का पेस्ट लगा कर, पट्टी बाँध ली है, या लेन्स लगा कर भाजपा की लेने पर तुला हुआ है।
आप अपने नेता जी को बचाने में चालीसा लिखिए, गाली सुनिए और फिर दोस्तों के बीच रोते रहिए कि भाजपा वाले ही गाली दे रहे हैं।
सवर्ण कं��ेंट क्रिएटर या पत्रकार इस बात से अवश्य डरते हैं कि कॉन्ग्रेस आई तो क्या होगा, पर जो सामान्य वोटर है उसे ऐसा कोई रिस्क नहीं है। एक बार तो SC/ST Act पलटने पर EWS का लॉलीपॉप लाए थे, अब क्या लाओगे?
इस नई नियमावली की समीक्षा होना चाहिए। एट्रोसिटी लिट्रेचर को प्रमोट करने वाले अधम सरकारी सलाहकार बने हुए हैं। जो कोर वोटर है, उसको नीचे सुला कर डंडों से पीटा जा रहा है। यह आशा मत करो कि कोई भी जाति तुम्हारे बाप का बँधुआ श्रमिक है। जिसको जहाँ जाना होगा जाएगा।
मायावती ने सवर्णों के अपमान पर बोला है। भाजपा का कोई भी दूबे-चौबे, पांडे, सिंह, मिश्रा, तिवारी इस पर एक शब्द नहीं बोल रहा। यह बताता है कि भाजपा वाले अम्बेडकरियम का पारस पत्थर लिए घूम रहे हैं कि जिसमें सटाएँगे, ब्लू सफायर हो जाएगा। परंतु, बो��ल की कटी तली को तराशने से वह रत्न नहीं बन जाता, वह काँच ही रहता है।