बहती हवा सा था वो…
सच में बहती हवा के जैसा था
जहाँ भी जाता सबके चेहरों पर रौनक़ ला देता था
आज सबके चेह��ों की रौनक़ ले गया
एक ऐसा कलाकार जिसे भले ही कोई मंच ना मिला हो लेकिन खुद ने अपने मंच से रंगमंच की शुरुआत की और खुद की पहचान बनाई
हेमन्त भाई को अन्तिम जोहार
ॐ शांति