लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आज दो साल पूरे हुए।
इन दो सालों का हर दिन एक ही काम रहा - हर भारतीय की आवाज़ को सत्ता तक पहुँचाना।
NEET के छात्रों की लड़ाई हो, वोट चोरी का पर्दाफाश हो या संविधान की रक्षा, हर मोर्चे पर आपके साथ खड़ा रहा, आज भी हूं, हमेशा रहूंगा।
सड़क से संसद तक, आपका भरोसा ही मेरी सबसे बड़ी ताक़त है। सफ़र लंबा है, पर संकल्प वही, आपके लिए हर लड़ाई लड़ता रहूँगा।
जय हिंद। जय संविधान। 🇮🇳
विस्तार में पढ़ें: https://t.co/vyj9WhFIhO
क्या आपको स्कैनिया विवाद याद है? 10 मार्च 2021 को स्वीडन के समाचार चैनल एसवीटी ने खबर दी थी कि स्वीडन की कमर्शियल-व्हीकल्स (वाणिज्यिक वाहन) निर्माण कंपनी स्कैनिया ने दिसंबर 2016 में गडकरी की बेटी की शादी में "गहरे लाल रंग की चमड़े की सीट वाली" एक लक्जरी बस उपहार में दी थी. एसटीवी ने स्कैनिया की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर यह खबर दी थी. एसवीटी ने आगे बताया था कि "सूत्रों ने स्कैनिया की मूल कंपनी फॉक्सवैगन को जानकारी दी है कि भारतीय मंत्री को यह उपहार सरकार से काम हासिल करने की नीयत से दिया गया है. गडकरी ने "किसी भी स्कैनिया बस" या "उससे जुड़े किसी भी फर्म या व्यक्ति" से संबंध होने से इनकार किया है लेकिन कारवां की पड़ताल बताती है कि केंद्रीय मंत्री का उक्त दावा झूठा है और बस गडकरी के प्लांट पर मौजूद थी और जिन कंपनियों से बस का संबंध है उन कंपनियों के उनके बेटों- सारंग और निखिल- के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध हैं.
मैं जुलाई 2018 की एक दोपहर में नागपुर स्थित पूर्ति सोलर सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के परिसर में पहुंचा. यह कंपनी केंद्रीय सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से जुड़ी है. वह परिसर एकदम खाली था और जंगली घांस की घनी चादर फैली हुई थी. लग रहा था मानो फैक्ट्री बहुत लंबे सम�� से बंद पड़ी है. इधर-उधर औजार बिखरे पड़े थे और किसी कामगार का नामो निशान नहीं था लेकिन ताज्जुब तब हुआ जब मैंने वहां एक बड़ी सफेद स्कैनिया मेट्रोलिंक बस खड़ी देखी. मैंने उस बस एक वीडियो बना लिया. उस वीडियो में साफ देखाई देता है कि बस में दो स्टीकर लगे हैं. एक चालक के दरवाजे के पास जिसमें लिखा है स्कैनिया मेट्रोलिंक और दूसरा बड़े अक्षरों वाला स्टीकर बस की साइड में लगा है जिसमें सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी लिखा था.
कारपोरेट मंत्रालय में दायर दस्तावेजों से पता चलता है कि सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी का संबंध सारंग और निखिल गडकरी की कंपनियों मानस एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और सियान एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से है. सारंग मानस एग्रो के और निखिल सियान एग्रो के निदेशक हैं. इसके अतिरिक्त कारपोरेट मंत्रालय के दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि सारंग गडकरी की मान��� एग्रो ने सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी को 2016-17 में 35 लाख रुपए का असुरक्षित कर्ज दिया था. यह तथ्य भी गडकरी के दावे को झूठलाता है.
पढ़ें कौशल श्रॉफ का 2021 का यह लेख: https://t.co/m57AbFCqbB
#ExpressInvestigation | Since he took oath as CM of Madhya Pradesh on December 13, 2023, Mohan Yadav’s family and their real estate companies have bought at least 137 plots, adding up to 168 acres, for Rs 45 crore, in zones most benefited by this infrastructure push, an investigation of land records by The Indian Express’ Jay Mazoomdaar has found.
🚨#𝐄𝐱𝐩𝐫𝐞𝐬𝐬𝐈𝐧𝐯𝐞𝐬𝐭𝐢𝐠𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧 | Our investigation found that Madhya Pradesh Chief Minister Mohan Yadav's family and their real estate firms acquired at least 137 plots spanning 168 acres in Ujjain for ₹45 crore in two years since December 2023 — mostly in areas benefiting from road projects and land-use changes his government announced. Here is a quick look at how much land each of his family members own
🔗 https://t.co/FEMW9VBzrO
भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है।
ज़रा सोचिए - देशभर के परिवार जितना पैसा सिर्फ़ NEET की तैयारी प�� ख़र्च करते हैं, वो भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है।
आज कोटा से, और देश के हर कोने से, लाखों युवा एक सुर में कह रहे हैं - इस व्यवस्था ने हमारे साथ अन्याय किया है।
हर युवा अलग है, पर सबकी कहानी एक - या तो सपने देखने नहीं दिए गए, या देखे हुए सपने तोड़ दिए गए।
‘छात्रों की गूंज’ सिर्फ़ अभियान नहीं - एक क्रांति है। हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी है जो आपको बड़े सपने देखने का हक़ दे और आपकी ज़िंदगी ग���रवी रखे बिना, उन्हें पूर�� करने में आपका साथ दे।
#ChhatronKiGoonj
पता है, भारत की सिर्फ़ 5 परीक्षाओं - NEET, JEE, SSC, UPSC और RRB की तैयारी पर छात्र और उनके परिवार हर साल कितना ख़र्च करते हैं?
₹3.5 लाख करोड़।
यानी भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट का लगभग तीन गुना। शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान और महिला-बाल विकास - इन पाँच मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर।
और बदले में करोड़ों युवाओं को क्या मिलता है? तनाव, अनिश्चितता, बेरोज़गारी, और टूटते सपने।
जो ख़र्च सरकार की ज़िम्मेदारी है, उसका बोझ आज परिवार उठा रहे हैं।
#ChhatronKiGoonj
इस वीडियो ने मुझे झकझोर दिया।
ये उस भारत के लाचार युवा हैं - जिसकी सरकार अपने अरबपति दोस्तों पर लाखों करोड़ लुटा देती है, पर अपने ही छात्रों को एक सुरक्षित सफ़र तक नहीं दे सकती।
चुनाव के वक़्त यही सरकार पूरी-पूरी ट्रेनों का इंतज़ाम कर लेती है। और परीक्षा देने जा रहे छात्रों के हिस्से में आती है - भीड़, घुटन, और बेबसी।
इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि मोदी सरकार छात्रों की गूंज सुनना ही नहीं ��ाहती।
पर मैं वादा करता हूँ - हम यह आवाज़ उन बहरे कानों तक पहुँचाएँगे। हर छात्र को उसका हक़ मिलेगा, उसका न्याय मिलेगा।
17 जून, कोटा। यही गूंज, अब हुंकार बनेगी।
#ChhatronKiGoonj
देश के हर युवा से मेरी एक बात - आज इस देश में मेहनत का फल नहीं, सपने देखने की सज़ा मिलती है।
हर पेपर लीक, हर रद्द परीक्षा, हर अधूरी भर्ती - सिर्फ़ सिस्टम की विफलता नहीं, लाखों सपनों पर प्रहार है।
मैं जानता हूँ आप थक चुके हैं। ग़ुस्से में हैं। पर याद रखिए - जब सरकार सुनने को तैयार न हो, तब आवाज़ ऊँची करनी पड़ती है।
इसलिए मैं आप सबको बुला रहा हूँ - 17 जून, कोटा। छात्रों की गूंज।
आइए, मिलकर एक ऐसी हुंकार बनें जिसे अनसुना करना नामुमकिन हो। कोटा से शुरुआत - फिर देश के हर कोने तक।
ये आपके भविष्य की लड़ाई है। और मैं आपके साथ हूँ।
🗓️ 17 जून | छात्रों की गूंज | कोटा महारैली
#ChhatronKiGoonj
12 वर्षों की गरीब-विरोधी आर्थिक नीतियों और compromised विदेश नीति ने आज देश को ऐसे हालात में ला खड़ा कर दिया है जहाँ लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को लकड़ी के ज़हरीले धुएं की तरफ धकेल दिया गया है।
उज्ज्वला योजना में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दिया गया। उसपर पिछले 3 महीनों में घरेलू LPG सिलेंडर के दाम ₹89 बढ़ा दिया गया - मतलब, पहले दाम बढ़ाओ, फिर सब्सिडी घटाओ, गरीबों का चूल्हा बुझाओ।
प्रवासी मजदूरों की जीवनरेखा, 5 किलो का सिलेंडर भी ₹323 महंगा कर दिया - वो कमाएगा क्या, खाएगा क्या, और बचाएगा क्या?
अरबपति मित्रों को लाखों करोड़ों की कर्ज़माफ़ी दिलाना और गरीबों को अपनी नाकामियों का बिल थमाना - ये लूट का मोदी मॉडल है।
मोदी जी, क्या आपकी नाकामियों का बोझ सिर्फ गरीब उठाएंगे? क्या आपकी बनाई इस चरमराती अर्थव्यवस्था की कीमत मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग ही चुकाएंगे?
I visited the southernmost tip of India.
I stood at Indira Point. I walked under trees that have stood for centuries. I dove into coral reefs among the most vibrant on earth.
And I sat with the people who live there. Tribal communities, whose land is being taken away by violating the Forest Rights Act. Settlers, many of them former soldiers, placed on these islands by the Indian government, who aren’t getting fair compensation.
The Modi government and BJP tells you Great Nicobar Project is about defence. It is not.
Expand INS Baaz - we will back the government fully. The Navy has been asking for expansion for five years - it has been ignored.
They tell you it is about a transhipment port. It is not. India is already building one in Kerala, which is on the mainland.
What it actually is: 1.5 crore trees felled. Coral reefs erased from official maps. Soldiers and tribals displaced - so one businessman can build hotels and casinos on India’s most irreplaceable ecological land.
Every young Indian I have spoken to understands this. You know that no amount of profit is worth destroying what can never be recovered.
I stand for ecologically balanced development. These islands can be the most extraordinary sustainable destination the world has ever seen. That is the India worth fighting for.
#GreenOverGreed
#NicobarMatters
#WorldEnvironmentDay
Dharmendra Pradhan ji, you can attack me all you want but it won’t absolve you of your crimes. Nor will it stop me from demanding answers for 18.5 lakh children.
Why was the CBSE OSM contract handed to COEMPT - a company already mired in controversy under its old name, Globarena? On whose orders was it done? Why were no background checks done? What is the connection between COEMPT’s management and the Modi government?
Either you ran a background check and went ahead anyway - or you didn’t run one at all. Either way, you are complicit.
As for responsibility - if the PM cared, he should have sacked you long ago for ruining the futures of lakhs of students.
2020 में शुरू हुई रेंबल ने मात्र तीन साल में (कोविड के दौरान) 72.56 करोड़ का राजस्व और स्टार निर्यातक का दर्जा प्राप्त कर लिया. इस तीव्र प्रगति के पीछे गडकरी की कंपनियों का वह जटिल जाल है, जिस पर बिज़नेस पत्रकार वर्षों से सवाल उठाते रहे हैं.
गडकरी के व्यापारिक साम्राज्य से जुड़ी बीफ कंपनी पर कौशल श्रॉफ की पूरी रिपोर्ट पढ़ें: https://t.co/p60QAfoDIl
महंगाई मानव मोदी का फिर से हमला।
पेट्रोल-डीज़ल के दाम किश्तों में बढ़ाते हैं - ताकि चुपके-चुपके आपकी जेब कटती रहे।
मैं महीनों से आर्थिक तूफान आने की बात कह रहा था। पर मोदी जी तब हमेशा की तरह चुनाव में व्यस्त थे - और चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल ₹8 महंगा कर दिया।
और, ये बढ़त होती ही जाएगी।
म���ंगाई मानव मोदी का एक ही काम है - चुनाव में वादे, और बाक़ी समय जनता की जेब पर वार।
जब मोदी जी इटली में टॉफी खिलाते ��ुए reels बना रहे थे - पेपर लीक से त्रस्त भारत के युवा सड़कों पर न्याय मांग रहे थे।
क्योंकि NEET Paper Leak ने लाखों छात्रों का भविष्य बर्��ाद कर दिया। कई बच्चों ने तो अपनी जान तक गंवा दी।
और मोदी जी ने न ज़िम्मेदारी ली, न धर्मेंद्र प्रधान को हटाया, न एक शब्द कहा।
अब जब छात्र, NSUI और INC के कार्यकर्ता न्याय की आवाज़ उठा रहे हैं - BJP की प्रदेश सरकारें उन पर लाठियाँ बरसा रही हैं।
जो सरकार छात्रों के सवालों का जवाब लाठी से देती है, वो जवाबदेही से नहीं - डर से चलती है।
पर हम डरने वाले नहीं हैं।
हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस���तीफ़ा नहीं देते और देश में पेपर लीक रोकने के लिए एक मज़बूत और सुरक्षित सिस्टम नहीं बनता।
यह लड़ाई हर उस छात्र के लिए है जिसका भविष्य इस नाकाम सरकार ने चुराया।
आर्थिक तूफ़ान सर पर है, और हमारे प्रधानमंत्री इटली में टॉफ़ी बाँट रहे हैं!
किसान, युवा, महिलाएँ, मज़दूर और छोटे व्यापारी सब रो रहे हैं - PM हंसकर रील बना रहे हैं, और BJP वाले ताली बजा रहे हैं।
यह नेतृत्व नहीं, नौटंकी है।
आर्काइव | अमित शाह उन चंद लोगों में थे जिन्हें इस फैसले की जानकारी पहले ��े ही थी और उन्होंने ही सार्वजनिक सफाई भी दी. गुपचुप की गई नोटबंदी ने लगभग सभी लोगों को हैरान कर दिया था. फौरन बाद हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में यह पार्टी के लिए वरदान लेकिन अर्थतंत्र के लिए शाप साबित हुआ. लेकिन इस अनुभव से जो नतीजा आता है और जिसे मोदी और शाह ने अपने कामकाज का तरीका बनाया है, वह स्पष्ट है : अगर मोदी और शाह को राजनीतिक लाभ की कीमत पर गणतंत्र का बेड़ा गर्क करना पड़े तो भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा.
कुछ ऐसा ही हुआ था जब सरकार ने जम्मू कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जे को खत्म किया था. कानूनी पेचों के नाटक को बारीकी से निपटाया गया और शाह ने संसद में जोरदार तरीके से फैसले का बचाव किया. नोटबंदी की तरह ही इस कदम में चालबाजी थी और नोटबंदी की तरह ही यह फैसल��� राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फलक पर लंबे दौर की शर्मिंदगी का कारण बन रहा है.
राष्ट्रीय सुरक्षा ऐसे दो शब्द हैं जिसके नाम पर मोदी और शाह ने यह कारनामा किया है. इस बात की बहुत कम संभावना है कि जो भारी-भरकम सैन्य और अर्धसैनिक बंदोबस्त किया गया है वह ढीला होगा. जिन मामलों में भारत की आतंक विरोधी मुहिम सफल साबित हुई है, उनमें स्थानीय पुलिस की बड़ी भागीदारी थी. लेकिन जम्मू-कश्मीर में अब लंबे समय तक ���ुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकेगा क्योंकि सरकार ने विशेष दर्जा खत्म करने से पहले अपमानित करते हुए उसके हथियार डलवा लिए थे.
मोदी और शाह के जमाने में पुलिस और सुरक्षाबलों में जिस तरह का नेतृत्व उभर कर आया, वह ऐसा है जिसमें कोई भी वरिष्ठ अधिकारी अपने जवानों के लिए खड़ा नहीं होता और ऐसी उम्मीद करना कि ऐसे अफसरों के प्रति जवान वफादार बने रहे���गे, भलमनसाहत के सिवा कुछ नहीं है.
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